वित्त मंत्री की जादू की टोकरी से बाहर आ सकते हैं ये बड़े ऐलान, सभी वर्गों को होगा लाभ…
Budget 2025: आज जैसे ही घड़ी की सूई 11 पर जाएगी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में राष्ट्र का बजट पेश करेंगी। अपने बजट भाषणा के जरिए वित्त मंत्री करीब 45 हजार करोड़ का बजट पेश करेंगी। जिस बजट को बनाने में 6 महीने का समय लग गया, उसे अपने घंटे-दो घंटे के भाषण से वित्त मंत्री राष्ट्र के सामने रखेंगी। किसी की उम्मीदें इस बजट से पूरी होंगी तो किसी की अधूरी रह जाएंगी। आइए समझते हैं कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का लगातार 8वां बजट कितना खास होगा। इस बजट में वो 6 घोषणाएं कर सकती है।

बजट में हो सकते हैं ये 6 ऐलान
बजट में सस्ता हो सकता है पेट्रोल-डीजल : यदि ऐसा हो गया तो आपकी बल्ले-बल्ले हो जाएगी। वित्त मंत्री महंगाई से परेशान जनता को राहत दे सकती हैं। एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर वित्त मंत्री महंगे पेट्रोल और डीजल की कीमतें घट सकती है। बता दें कि वर्तमान में पेट्रोल पर 19.90 रुपए और डीजल पर 15.80 रुपए एक्साइज ड्यूटी लगती है।
सस्ते हो सकते हैं मोबाइल टेलीफोन : लगातार 8वीं बार बजट पेश कर रहीं वित्त मंत्री कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े पार्ट्स की इम्पोर्ट ड्यूटी घटा सकती है। वर्तमान में इसपर अभी 20% ड्यूटी लगती है। यदि एक्साइज ड्यूटी बदली तो मोबाइल जैसे इलेक्ट्रिक सामानों की मूल्य घट सकती है।
सोने की मूल्य चढ़ने की आशंका: जहां पेट्रोल-डीजल की मूल्य घट सकती है तो वहीं सोने-चांदी की मूल्य में तेजी की आशा है। सोने-चांदी पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाई जा सकती है। बता दें कि वर्तमान में सोने-चांदी पर 6% ड्यूटी लगती है। बताया जा रहा है कि इसमें बढ़ोतरी हो सकती है।
इनकम टैक्स में मिल सकती है राहत : वित्त मंत्री लंबे समय से मिडिल क्लास की उम्मीदों को पूरा कर सकती है। आशा की जा रही है कि वित्त मंत्री 10 लाख रुपए तक की सालाना इनकम को टैक्स फ्री कर सकती है। बताया जा रहा है कि न्यू टैक्स रिजीम में वित्त मंत्री 10 लाख रुपए तक की सालाना इनकम टैक्स-फ्री कर सकती हैं।
योजनाओं में परिवर्तन : बताया जा रहा है कि वित्त मंत्री पीएम किसान सम्मान निधि की धनराशि को 6 हजार से बढ़कर 12 हजार कर सकती है। वहीं मोदी गवर्नमेंट की पॉपुलर स्कीम आयुष्मान हिंदुस्तान योजना का दायरा बढ़ाया जा सकता है। इसके अतिरिक्त गवर्नमेंट अटल पेंशन योजना (APY) के अनुसार पेंशन राशि दोगुनी कर सकती है।
लोकसभा में ही क्यों पेश होता है बजट
जिस तरह से आप अपने घर में इनकम के अवलग-अलग सोर्स को एक एकाउंट में जमा करते हैं , उसी तरह से गवर्नमेंट भी टैक्स, राजस्व, ऋण समेत भिन्न-भिन्न कमाई के सोर्स को एक साझा कोष यानी ‘कंसोलिडेटेड फंड्स’ में रखती है। जैसे ज्वाइंट एकाउंट से खर्च के लिए एक रुपया भी निकालने के लिए एकाउंट से सभी मालिकों की इजाजत लगती है, उसी तरह से राष्ट्र के संचित निधि या ‘कंसोलिडेटेड फंड्स’ के लिए पैसा निकालने के लिए लोकसभा की स्वीकृति महत्वपूर्ण होती है। वैसे वो पैसा जनता का है और लोकसभा में जनता के चुने प्रतिनिधि होते हैं इसलिए संसद को लोकसभा में ही पेश किया जाता है।
कैसे बनता है राष्ट्र का बजट
बजट बनने में 6 महीने का समय लगता है। सितंबर में मंत्रालयों, विभागों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सर्कुलर जारी कर उन्हें अगले एक वर्ष के लिए महत्वपूर्ण फंड का डेटा देने को बोला जाता है। बता दें कि इसी डेटा के आधार पर मंत्रालयों, राज्यों और विभागों को बजट का आवंटन किया जाता है। वित्त मंत्रालय दूसरे मंत्रालयों-विभागों के साथ मिलकर तय करते हैं कि किस मंत्रालय या विभाग को कितना फंड दिया जाए। बजट बनाने वाली टीम को प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और नीति आयोग के इनपुट लगातार मिलते रहते हैं। इसे बनाने के लिए इंडस्ट्री, ऑर्गनाइजेशन और इंडस्ट्री के जानकारों से वित्त मंत्री कई दौर की चर्चा करती हैं।
किसे, कितनी रकम, कैसे तय होता है
हर विभाग की प्रयास होती है कि उन्हें अधित से अधिक फंड मिले, ताकि वो अधिक खर्च कर पाएं, लेकिन वित्त मंत्रालय और बजट टीम तय करती है कि किस विभाग को कितनी धनराशि का आवंटन होगा।

