सीएम शिवराज के खिलाफ कांग्रेस विक्रम मस्तल तुलनात्मक रूप से हो सकते है कमजोर उम्मीदवार
भोपाल। मध्य प्रदेश में बीजेपी के सबसे प्रभावशाली नेता और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के विरुद्ध कांग्रेस पार्टी उम्मीदवार विक्रम मस्तल तुलनात्मक रूप से कमजोर उम्मीदवार हो सकते हैं, लेकिन लगता है कि कमल नाथ ने इसे वैचारिक लड़ाई बनाकर एक रणनीतिक चाल चली है।
विक्रम मस्तल टीवी अभिनेता से राजनेता बने हैं, इन्होंने 2008 में टीवी पर प्रदर्शित होने वाले रामायण सीरियल में हनुमान की किरदार निभाई थी।
बुधनी विधानसभा सीट का अगुवाई सालों से चौहान कर रहे हैं। इस सीट से विक्रम मस्तल को ऑन-स्क्रीन हनुमान के रूप में मैदान में उतारकर कमलनाथ ने इसे ‘कलाकार बनाम कलाकार’ शो करार देकर लड़ाई को दिलचस्प बना दिया है।
कांग्रेस के अनुभवी नेता कमलनाथ मार्च 2020 की घटना के ‘विश्वासघात’ के विरुद्ध ‘प्रतिशोधी’ चुनावी लड़ाई के लिए राज्य में दूसरी बार पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं। कमलनाथ सीएम चौहान पर धावा करते रहे हैं, उनका बोलना है कि चौहान एक ‘कलाकार’ हैं ‘ जिसने राज्य के लोगों को विश्वासघात दिया है।’
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि ऑन-स्क्रीन हनुमान को मैदान में उतारना कमलनाथ की नरम-हिंदुत्व योजना का एक हिस्सा लगता है, जो 2020 में उनकी गवर्नमेंट के गिरने के तुरंत बाद कार्रवाई में आया था।
एक वरिष्ठ सियासी पर्यवेक्षक ने दावा किया कि बीजेपी ने अपने पारंपरिक हिंदुत्व एजेंडे पर कमलनाथ को घेरने की पूरी प्रयास की, लेकिन वह फंसने से बाहर रहे। इससे पहले कि भाजपा कमलनाथ को हिंदुत्व विरोधी लॉबी के साथ जोड़ न सके, वह वर्ष 2018 से स्वयं को ईश्वर हनुमान के भक्त के रूप में पेश कर रहे हैं।
विक्रम मस्तल भले ही शिवराज सिंह चौहान के विरुद्ध कोई बड़ा सियासी चेहरा नहीं हैं, लेकिन उनके रील लाइफ भूमिका का एक बड़ा कैनवास है जो पार्टी को पूरे राज्य में अपनी छाप छोड़ने में सहायता करेगा।
मस्तल के विरुद्ध किसी भी सियासी हमले को उनके रील-लाइफ चरित्र ईश्वर हनुमान पर हमले के रूप में पेश किया जाएगा और यह धारणा बीजेपी की हिंदुत्व विचारधारा को किनारे करने में सहायता कर सकती है।
मस्तल ने आईएएनएस को बताया, ”मुझ पर भरोसा दिखाने के लिए मैं कांग्रेस पार्टी का आभारी हूं। मैं क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर बुधनी की जनता के पास जाऊंगा। मैं लोगों से पूछूंगा कि लगभग दो दशकों तक सीएम चौहान का समर्थन करने के बाद उन्हें क्या हासिल हुआ। लोगों से पूछेंगे कि सीएम उनके जिले के होने के बावजूद सीहोर के युवाओं को जॉब क्यों नहीं मिली।”

