आखिर कैसे बनता है केवड़ा जल…
कन्नौज में बनने वाले इत्र की धूम हिंदुस्तान ही नहीं पूरे विश्व में होती है। गर्मियों के सीजन में केवड़े (Kewra) के इत्र के साथ-साथ केवड़े का जल (Kewra Water) भी बनाया जाता है। केवड़े का जल भिन्न-भिन्न कामों के लिए इस्तेमाल होता है। लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि केवड़े का जल बनता कैसा है? बता दें कि केवड़ा एक विशेष प्रकार का फूल होता है जो उड़ीसा में मिलता है। आइए जानते हैं केवड़े का जल बनने की पूरी विधि के बारे में।

केवड़ा जल बनाने की विधि
यह पानी पैंडनस के फूलों को भाप देकर तैयार किया जाता है। इसे एक मीठी गंध वाला जरूरी ऑयल प्राप्त करने के लिए और पतला किया जाता है। इस ऑयल के जूस का इस्तेमाल आगे चलकर भोजन में किया जाता है। इसका इस्तेमाल और भी कई तरह से किया जा सकता है।
केवड़ा जल का प्रयोग
केवड़े का जल हिंदुस्तान के पौरणिक पुष्पों में से एक केतकी से बनाया जाता है। इस पुष्प से खुशबू तो तैयार होती ही है। साथ ही भोजन में स्वाद भरने के लिए भी इस्तेमाल में लाया जाता है। अधिकांश मिष्ठान्न में इसका प्रयोग तो होता है। साथ ही मुगलई नॉन वेज डिशेज में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। स्किन से जुड़ी परेशानियों के निवारण के लिए भी लोग इस पानी का इस्तेमाल करते हैं।
केवड़ा जल की कीमत
केवड़े के इत्र की मूल्य जहां सबसे साधारण 6000 किलो से स्टार्ट होकर 2,00000 किलो तक पहुंचती है। तो वहीं केवड़ा जल की मूल्य 400 किलो से प्रारम्भ हो जाती है। यह केवड़ा जल खाद्य पदार्थ जैसे लड्डू, शरबत, लस्सी, बिरियानी इन सब चीजों में प्रयोग होता है। ।
क्या कहे व्यापारी?
इत्र व्यापारी शिवा बताते हैं कि कन्नौज में केवड़े इत्र और जल का बड़ा काम होता है। केवड़ा एक विशेष प्रकार का फूल होता है जो उड़ीसा में होता है। हम लोग वहां पर भी अपनी फैक्ट्री लगाकर केवड़ा इत्र और केवड़ा जल का काम करते हैं। केवड़ा गर्मियों में बहुत लाभ वाला रहता है।

