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क्यों खास है तबारक की रोटी, जानें इसे बनाने की आसान विधि

यूपी का रामपुर शहर अपनी समृद्ध नवाबी धरोहर और संस्कृति के लिए पूरे राष्ट्र में मशहूर है यहां की तबारक की रोटी एक ऐसी पारंपरिक व्यंजन है, जो सालों से लोगों के दिलों में एक खास स्थान बनाए हुए है नवाबी दौर से चली आ रही यह परंपरा आज भी जीवित है इसका स्वाद लोगों को आज भी लुभाता है तबारक की रोटी बनाने का काम रामपुर में गुहियां तालाब के पास स्थित बेकरी में किया जाता है

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काजू और बादाम डालकर बनती है रोटी

तबारक की रोटी बनाने में खास मिश्रण का प्रयोग होता है, जिसमें मैदा, दूध, सौफ, नारियल चूरा और मेवे जैसे काजू और बादाम डाले जाते हैं इन सामग्रियों को अच्छे से मिलाकर रोटियां तैयार की जाती हैं फिर इन्हें खास ढंग से सेंका जाता है और कागज पन्नी में लपेटकर घर लाया जाता है तबारक पर कुरान की सूरह तबारक पढ़ी जाती है फिर उस पर फातिहा दी जाती है इसे मुसलमान समाज में एक धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा के रूप में बांटा जाता है जहां इसे नाश्ते के तौर पर या अतिथियों के लिए विशेष रूप से पेश किया जाता है

तबारक की रोटी का एक विशेष पहलू यह है कि इसे खास तौर पर इस्लामी महीने रजब उल मुरज्जब के दौरान तैयार किया जाता है हर वर्ष इस दौरान जुमेरात को तबारक की रोटी बनाई जाती है शुक्रवार को उस पर फातिहा दी जाती है यह परंपरा आज भी रामपुर के हर घर में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाई जाती है

100 रुपए किलो बिकती है रोटी

अब तबारक की रोटी 100 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक रही है हालांकि पहले यह कारोबार अधिक फैला हुआ था, लेकिन अब भी यह अपने पारंपरिक रूप में लोगों के बीच लोकप्रिय है लोग इसे खास अवसरों पर खरीदते हैं और अपनों के बीच इसे बांटने का आनंद लेते हैं

रामपुर में तबारक की रोटी एक तरह से क्षेत्रीय सांस्कृतिक धरोहर के रूप में जीवित है यह न केवल स्वादिष्ट होती है बल्कि इसमें छुपी एक धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है

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