राष्ट्रीय

MP में 4 से 6% बारिश ज्यादा होने का अनुमान

मध्यप्रदेश में मानसून का प्रतीक्षा समाप्त हुआ. 6 दिन की देरी से 21 जून, शुक्रवार को मानसून मध्यप्रदेश में एंटर हो गया है. दक्षिण-पश्चिम मानसून मध्य प्रदेश के पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडोरी और अनूपपुर जिलों में प्रवेश कर चुका है.

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मौसम विभाग के अनुसार- इस बार मानसून 6 दिन देरी से आया है, लेकिन वह खूब बरसेगा. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने जून से सितंबर यानी चार महीने तक प्रदेश में 104 से 106% तक बारिश होने का अनुमान जताया है.

IMD, भोपाल के वैज्ञानिकों की माने तो अगले एक हफ्ते में मानसून पूरे प्रदेश में छा जाएगा. भोपाल, जबलपुर और सतना में अगले 48 घंटों में मानसून दस्तक दे सकता है. इंदौर, सागर पहुंचने में तीन दिन लग सकते हैं. इसके बाद उज्जैन संभाग में पहुंचेगा. ग्वालियर-चंबल में सबसे अंतिम में एंटर होगा. पिछले वर्ष 24 जून को मानसून एंटर हुआ था और 28 जून तक पूरे प्रदेश में छा गया था.

इधर भोपाल में शुकवार तड़के करीब 3 बजे से बारिश प्रारम्भ हो गई. यहां बैरागढ़ क्षेत्र में सुबह 8 बजे तक 4.8 इंच बारिश हुई. सीहोर में दो घंटे में ही 4 इंच से अधिक पानी बरसा. यहां सीवन नदी में बहाव तेज हो गया. गुरुवार तक ये नदी सूखी थी. उज्जैन, रतलाम, शाजापुर और रायसेन में देर रात से रुक-रुककर बारिश हो रही है.

4 से 6% बारिश अधिक होने का अनुमान
प्रदेश में इस बार मानसून जमकर बरसेगा. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने जून से सितंबर यानी चार महीने तक प्रदेश में सामान्य से 4 से 6 प्रतिशत अधिक बारिश होने का अनुमान जताया है. प्रदेश की औसत बारिश एवरेज 37.3 इंच है. वर्ष 2023 में प्रदेश में 100% बारिश हुई थी. इंदौर, उज्जैन समेत आधे एमपी में सामान्य से अधिक पानी गिरा था. इस बार भी इससे अधिक आंकड़ा रहने की आशा है.

क्या होता है मानसून?
मानसून दक्षिण-पश्चिमी हवाओं को बोला जाता है, जो हिंदुस्तान सहित बांग्लादेश और पाक में बारिश कराती हैं. हिंद महासागर और अरब सागर से यह हवाएं उठती हैं. यह हवाएं जून से सितंबर महीने तक एक्टिव रहती हैं और दक्षिण-पश्चिम से चलकर हिंदुस्तान और अन्य राष्ट्रों में बारिश लाती हैं. मानसून शब्द का पहली बार प्रयोग ब्रिटिश काल में हुआ था. हाइड्रोलॉजी में मानसून को उन हवाओं के रूप में जाना जाता है, जो किसी क्षेत्र में एक विशेष मौसम में खूब बारिश कराती है.

कब-कहां एंट्री, जानिए…

  • प्रदेश के पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडोरी और अनूपपुर जिलों में आज मानसून पहुंच गया.
  • बैतूल, नर्मदापुरम, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा में भी आज रात तक मानसून पहुंच सकता है.
  • 22-23 जून तक भोपाल, 24 जून तक इंदौर और 25-26 जून तक उज्जैन संभाग में पहुंच सकता है.
  • ग्वालियर-चंबल में सबसे अंतिम में एंटर होगा.
  • इसके बाद ग्वालियर-चंबल संभाग में एंट्री की आसार है. यह प्रदेश का उत्तरी हिस्सा है.

इन जिलों में इतनी बारिश का अनुमान
आईएमडी की रिपोर्ट के मुताबिक पूर्वी मध्यप्रदेश के 4 संभाग- सागर, रीवा, जबलपुर और शहडोल में सामान्य से कम 98 से 99% बारिश होने का अनुमान है. वहीं, पश्चिमी मध्यप्रदेश के 6 संभाग- भोपाल, नर्मदापुरम, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और चंबल में 101 से 102% या इससे अधिक बारिश होने का पूर्वानुमान है. डाक्टर सिंह ने कहा कि मानसून को लेकर मौजूदा परिस्थितियां काफी बेहतर है.

इसलिए अच्छी बारिश के संकेत
मौसम विभाग के अनुसार, भू-मध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र पर अल नीनो की मध्यम (moderate) स्थिति है. मानसून के दूसरे भाग में ला नीना स्थितियां डेवलप होने की आसार है.

…तो लगातार छठे वर्ष सामान्य से अधिक बारिश
इस बार भी मानसून यदि अनुमान के अनुसार रहा, तो लगातार छठे वर्ष ऐसा होगा, जब सामान्य या इससे अधिक बारिश होगी. 10 वर्ष के आंकड़ों पर नजर डालें, तो 2019 में सबसे अधिक 53 इंच बारिश हुई थी. इसके बाद से ही प्रदेश में सामान्य या इससे अधिक बारिश हो रही है.

प्रदेश में 949 एमएम एवरेज बारिश
मध्यप्रदेश की सामान्य बारिश 949mm यानी, 37.3 इंच है. मानसूनी सीजन के दौरान (जून से सितंबर के बीच) इतनी बारिश होती है. पिछले वर्ष की बात करें, तो प्रदेश में एवरेज 37.22 इंच बारिश हुई थी, जो सामान्य के बराबर ही थी. भोपाल समेत कई जिलों में तो सामान्य से अधिक बारिश हुई थी. इस कारण बाढ़ के हालात भी बन गए थे.

पिछले वर्ष यहां हुई थी अधिक बारिश
इंदौर, झाबुआ, खंडवा, खरगोन, उज्जैन, आलीराजपुर, बड़वानी, बैतूल, भिंड, बुरहानपुर, देवास, धार, हरदा, अनूपपुर, छिंदवाड़ा, डिंडोरी, कटनी, नरसिंहपुर, निवाड़ी, सिवनी और टीकमगढ़.

इन जिलों में कम बारिश
भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, बालाघाट, छतरपुर, दमोह, मंडला, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, आगर-मालवा, अशोकनगर, दतिया, गुना, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, राजगढ़, सीहोर, शाजापुर, शिवपुरी.

एमपी में सूखे के हालात नहीं
मौसम वैज्ञानिकों का बोलना है कि प्रदेश में कहीं भी सूखे जैसे हालात नहीं बनेंगे. प्रदेश के सभी हिस्सों में अच्छी बारिश होगी. वर्ष 2022 में भोपाल में करीब 75 इंच बारिश हुई थी. प्रदेश में भोपाल सबसे अधिक बारिश वाला जिला था. इसके अलावा, कई जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई थी. 2023 में भी ऐसी ही स्थिति बनी थी.

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