ज्ञानेश कुमार के CEC बनने पर राहुल गांधी ने उठाए ये सवाल
CEC Gyanesh Kumar: देश के अगले मुख्य चुनाव आयुक्त ( Chief Election Comissioner) को लेकर ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति हुई है। वह राजीव कुमार की स्थान पद संभालेंगे। यह निर्णय पीएम मोदी, अमित शाह और राहुल गांधी की तीन सदस्यीय कमेटी की ओर से लिया गया है, हालांकि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त का 2:1 के बहुमत से चयन हुआ है। राहुल गांधी ने नियुक्ति पर असहमति जताई है। उनका बोलना है कि जब तक उच्चतम न्यायालय की ओर से नयी नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर निर्णय नहीं किया जाता तब तक CEC की नियुक्ति को स्थगित करना चाहिए।

राहुल गांधी ने जताई आपत्ति
दरअसल नए कानून के अनुसार अब मुख्य चुनाव आयुक्त ( CEC) की नियुक्ति वाले पैनल में चीफ जस्टिस ऑफ इण्डिया ( CJI) नहीं होंगे। पहले इसमें CJI भी शामिल होते थे। पिछले ,साल ही केंद्र गवर्नमेंट की ओर से इस कानून में परिवर्तन किया गया था। कांग्रेस पार्टी समेत विपक्ष की कई पार्टियों ने इसपर विरोध जताई थी और उच्चतम न्यायालय का द्वार खटखटाया था। मुद्दा अबतक उच्चतम न्यायालय में लंबित है। ऐसे में राहुल गांधी इसी निर्णय का प्रतीक्षा करने के लिए कह रहे थे।
क्यों प्रश्न खड़े कर रही कांग्रेस?
कांग्रेस की ओर से इस निर्णय को गैरकानूनी और उच्चतम न्यायालय के विरुद्ध कहा है। कांग्रेस पार्टी का बोलना है कि गवर्नमेंट को 19 फरवरी 2025 तक का प्रतीक्षा करना चाहिए था। 19 फरवरी 2025 को उच्चतम न्यायालय में इस मुद्दे की सुनवाई होनी है। इसको लेकर कांग्रेस पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा,’ गवर्नमेंट ने जल्दबाजी में आधी रात को नए मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की है। यह हमारे संविधान के विरुद्ध है।‘ उन्होंने कहा,’ सुप्रीन न्यायालय ने भी कई मामलों में दोहराया है कि चुनाव की प्रक्रिया की पवित्रता के लिए मुख्य चुनाव आयुक्त को एक निष्पक्ष हितधारक होना चाहिए।‘
कौन हैं ज्ञानेश कुमार?
केसी वेणुगोपाल का बोलना है कि गवर्नमेंट जल्दबाजी में चुनाव आयुक्त की बैठक करके उच्चतम न्यायालय की जांच से बचना चाहती है। राहुल गांधी ने इस निर्णय को टालने के लिए कहा, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। बता दें कि ज्ञानेश कुमार केरल कैंडर के वर्ष 1988 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं। वह 3 सदसस्यीय पैनल के 2 आयुक्तों में से वरिष्ठ हैं। इसका नेतृत्व राजीव कुमार की ओर से किया गया था। वह इससे पहले संसदीय कार्य मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय में सचिव के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

