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अमृतसर में SGPC ने की बड़ी घोषणा, चार गेट टूटने पर मुआवजा देने की मांग

पंजाब में आई बाढ़ ने बॉर्डर एरिया से लेकर पठानकोट और सुल्तानपुर लोदी तक भारी तबाही मचाई है. खेत पानी में डूब चुके हैं और फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के प्रधान एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने प्रभावित इलाक

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उन्होंने बोला कि अब गवर्नमेंट का यही काम है कि कम से कम 50 हजार रुपए एक एकड़ का मुआवजा दिया जाए, क्योंकि लोगों को राशन पानी और अन्य चीजें तो पंजाबी स्वयं ही पहुंचा रहे हैं. उन्होंने बोला कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मुलाजिमों ने राहत कार्यों के लिए 1 करोड़ इकट्ठा किए हैं और एक करोड़ अन्य भी जल्द ही दिए जाएंगे.

दो करोड़ रुपए का राहत कोष एसजीपीसी ने अब तक राहत कार्यों के लिए दो करोड़ रुपए इकट्ठे किए हैं. एक करोड़ का चेक आज और दूसरा एक दो दिन तक जमा कराया जाएगा. इसके अतिरिक्त एसजीपीसी मेंबर और परिवारों ने भी पर्सनल रूप से सहयोग दिया. कई मेंबरों ने एक-एक लाख रुपए की राशि फंड में से दी है.

धामी ने बोला कि चावल की फसल पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और ऐसे हालात में गेहूं की बुवाई भी संभव नहीं दिखती. उन्होंने इल्जाम लगाया कि गवर्नमेंट ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई. माधोपुर हैडवर्क के चार गेट टूट चुके हैं, जिससे कई गांव डूब गए. कुछ इलाकों में लोगों तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ा. कई जगहों पर पानी की गहराई 10 फुट तक पहुंच गई है.

राहत कार्यों में जुटी एसजीपीसी एसजीपीसी ने जलालाबाद के जामनी साहिब गुरुद्वारे से बड़े स्तर पर राहत कार्य प्रारम्भ किए हैं. बॉर्डर एरिया के गुरुद्वारों को हिदायत दी गई है कि लोगों तक हर महत्वपूर्ण सहायता पहुंचाई जाए. प्रभावित परिवारों के लिए लंगर, सूखा दूध, खाने का सामान, दवाइयां और डीजल की प्रबंध की जा रही है.

धामी ने बोला कि एसजीपीसी लोगों को यह महसूस कराना चाहती है कि वे अकेले नहीं हैं. उन्होंने शिरोमणि अकाली दल और एसजीपीसी स्टाफ का धन्यवाद किया जिन्होंने मौके पर जाकर सेवा निभाई. राहत कार्यों में श्री गुरु रामदास मेडिकल यूनिवर्सिटी ने डेरा बाबा नानक और रमदास इलाकों में एम्बुलेंस भेजी है, जो दवाइयों और मेडिकल सहायता के साथ-साथ जरूरतमंदों तक पांच-दस हजार रुपए की पर्सनल सहायता भी पहुंचा रही हैं.

धामी ने बोला कि अब तक 1100 गांव प्रभावित हुए हैं. पानी उतरने के बाद वास्तविक आवश्यकता किसानों और आम लोगों को जीवन पटरी पर लाने की होगी. उन्होंने गवर्नमेंट से मांग की कि किसानों को प्रति एकड़ 50 हजार रुपए का मुआवजा दिया जाए क्योंकि लोगों को राशन पानी तो वह पहुंचा रहे हैं लेकिन अब आगे की जीवन आसान बनाने के लिए मुआवजा जरुरी है.

राहत कोष के लिए बैंक खाते जारी देश-विदेश की संगत से योगदान की अपील करते हुए एसजीपीसी ने भारतीय स्टेट बैंक बैंक दिल्ली ब्रांच और HDFC बैंक अमृतसर के खाते राहत कोष के लिए जारी किए हैं. इन खातों में भेजा गया योगदान प्रभावित परिवारों और गुरुद्वारों को दोबारा खड़ा करने में इस्तेमाल किया जाएगा.

धामी ने बोला कि अक्सर इल्जाम लगाया जाता है कि एसजीपीसी आपदा के समय योगदान नहीं करती, लेकिन इस बार सेवादारों और मुलाजिमों ने साबित कर दिया है कि दुख की घड़ी में वे लोगों के साथ खड़े हैं. इस बीच भाखड़ा डैम के फ्लड गेट खुलने से प्रदेश में चिंता और बढ़ गई है. लोग आशंकित हैं कि पानी का स्तर और ऊपर जा सकता है, जिससे पहले से तबाह गांवों में और हानि हो सकता है.

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