बिहार

बड़ी मिसाल! ग्रामीण महिला उद्यमिता की एक सशक्त मिसाल बन चुकी हैं आभा कुमारी

समस्तीपुर: कभी आर्थिक तंगी और बेरोजगारी से जूझ रहीं समस्तीपुर जिले के उजियारपुर प्रखंड की आभा कुमारी आज ग्रामीण स्त्री उद्यमिता की एक सशक्त मिसाल बन चुकी हैं उन्होंने बिहार गवर्नमेंट की जीविका योजना से जुड़कर न केवल आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया, बल्कि तीन सफल घरेलू उद्योगों की आरंभ कर स्वयं के साथ-साथ आसपास की स्त्रियों को भी प्रेरित किया

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शुरुआत एक छोटे से लोन से हुई मात्र ₹20,000 और आज उनके लेंन-देंन लाखों में पहुंच चुके हैं सरसों ऑयल निर्माण, आटा तैयार कर पैकिंग, मसाला निर्माण कर पैकिंग और हैंडवॉश प्रोडक्शन जैसे विविध क्षेत्रों में उन्होंने अपने कारोबार को फैलाया है आभा देवी आज अपने उत्पादों की थोक बिक्री कर रही हैं और सालाना ₹3 से ₹साढ़े तीन लाख तक की आमदनी कर रही हैं

चार उद्योगों की कामयाबी की कहानी
आभा देवी बताती हैं कि जब वह जीविका से जुड़ीं, तब उनके पास कोई आय का साधन नहीं था लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने समय पर कर्ज चुकाया, वैसे-वैसे योगदान की राशि भी बढ़ती गई ₹20,000 के पहले लोन के बाद उन्हें ₹50,000, फिर ₹1 लाख तक का योगदान मिला इसी योगदान से उन्होंने एक-एक करके चार घरेलू उद्योग खड़े किए सरसों ऑयल का उत्पादन कर वह उसकी पैकिंग कर बाजार में भेजती हैं आटा चक्की का भी संचालन स्वयं करती हैं, और हैंडवॉश और मसाला निर्माण का कार्य भी प्रारम्भ कर चुकी हैं उनके बनाए उत्पाद क्षेत्रीय बाजार में अच्छे दामों पर बिकते हैं और लोग उनके ब्रांड पर भरोसा करने लगे हैं उन्होंने अपने आसपास के दुकानदारों से मजबूत सामंजस्य बनाकर वितरण की प्रबंध भी खड़ी कर ली है

आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल
आज आभा देवी केवल स्वयं तक सीमित नहीं हैं उनके इस यात्रा ने यह साबित कर दिया है कि यदि किसी स्त्री को ठीक समय पर ठीक दिशा और थोड़ी आर्थिक सहायता मिल जाए, तो वह समाज की सोच और तस्वीर दोनों बदल सकती है आभा जैसी महिलाएं आज जीविका योजना के वास्तविक रिज़ल्ट हैं, जो स्त्री सशक्तिकरण को नारे से हकीकत में बदल रही हैं उनकी कामयाबीकेवल ग्रामीण बिहार की आर्थिक आत्मनिर्भरता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि छोटे-छोटे कदम यदि लगातार और लगन से उठाए जाएं, तो वह बड़ी उड़ान में परिवर्तित हो सकते हैं

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