बिहार

किडनी ट्रांसप्लांट के बाद अब लालू के हार्ट का होगा ऑपरेशन

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की एंजियोप्लास्टी मुंबई के एशियन हार्ट हॉस्पिटल में हुई है. इससे पहले 2014 में उनकी ओपन हार्ट सर्जरी हुई थी. करीब 6 घंटे में एऑर्टिक वाल्व बदला गया था. इस दौरान दिल में उपस्थित 3 एमएम के छेद को भरा गया था.

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लालू यादव का किडनी ट्रांसप्लांट 5 दिसंबर 2022 को सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ हॉस्पिटल में हुआ था. बेटी रोहिणी आचार्य ने पिता को किडनी डोनेट की थी. कुछ दिन पहले लालू प्रसाद सिंगापुर से किडनी का चेकअप कराकर लौटे हैं. उसके बाद मुंबई जाकर एंजियोप्लास्टी करवाई.

आरजेडी सुप्रीमो को शुगर समेत कई बीमारियां हैं. सबसे बड़ी परेशानी यह कि वे स्वयं स्वीकार करते हैं कि जीभ पर नियंत्रण नहीं रख पाते और नॉनवेज खा लेते हैं. वे घर में बैठे भी नहीं रह सकते. पॉलिटिकल कार्यक्रमों में जाने की जिद भी करते हैं.

5 सितंबर को पार्टी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे थे. उसके बाद गणपति पूजन के आयोजन में भीड़भाड़ के बीच दानापुर चले गए थे. डॉक्टरों ने उन्हें मास्क लगाकर बाहर निकलने की राय दी है, लेकिन वो उनकी भी बात नहीं मानते.

 

लालू 5 सितंबर को वीरगति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में पार्टी कार्यालय पहुंचे थे.

7 सितंबर को दानापुर के पेठिया बाजार में गणपति उत्सव में पहुंचे थे. फीता काटकर उन्होंने गणेशोत्सव का उद्घाटन भी किया. यहां बहुत अधिक भीड़ थी. लालू प्रसाद को कठिन से कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाया गया. चिकित्सक की राय के बाद भी यहां बिना मास्क के दिखे.

 

7 सितंबर को दानापुर में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव गणपति उत्सव में शामिल हुए थे.

वाल्व क्यों बदला गया था? 2014 में जांच में डॉक्टरों ने पाया था कि लालू के दिल का एओर्टिक वाल्व स्टेनोसिस (एक प्रकार का रोग) के चलते सिकुड़ गया है. यह बीमारी संक्रमण, कैल्शियम जमने या पैदाइशी परेशानी के चलते होता है. इसमें तुरंत सर्जरी की आवश्यकता होती है. हार्ट से जुड़ी धमनियों में ब्लॉकेज होने पर स्टेंट लगाकर ब्लाॉकेज को ठीक कर दिया जाता है. स्टेंट लगाने के बाद खून का बहाव ठीक हो जाता है. यह सफल नहीं होता है तब बाइपास सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है. एंजियोप्लास्टी के बाद रोगी को एक-दो दिन में हॉस्पिटल से छुट्टी भी मिल जाती है.

डॉक्टरों की माने तो आने वाले समय में लालू प्रसाद ने लाइफ स्टाइल नहीं बदली तो कठिन में पड़ सकते हैं. एक आंकड़े के अनुसार, हिंदुस्तान में हर वर्ष तकरीबन 4.5 लाख हार्ट के रोगी एंजियोप्लास्टी कराते हैं. वहीं, राष्ट्र में 4 से 5 करोड़ लोग इस्चेमिक हार्ट डिजीज (IHD) से पीड़ित हैं. यह राष्ट्र में होने वाली 15 से 20% मौतों की वजह बनती है. इस मुद्दे में हार्ट की आर्टरीज संकरी होने लगती है, जो आगे चलकर हार्ट अटैक की वजह बनती है. लालू यादव के स्वास्थ्य को लेकर भास्कर ने पटना के दो बड़े चिकित्सक किडनी बीमारी जानकार डाक्टर अजय कुमार और कार्डियो सर्जन डाक्टर अजीत प्रधान से बात की.

सवाल- एंजियोप्लास्टी क्या है? जवाब- एंजियोप्लास्टी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें किसी भी नस और आर्टरी के ब्लॉकेज को खोला जाता है. जब हार्ट में एंजियोप्लास्टी करते हैं तो उसे कोरोनरी एंजियोप्लास्टी बोला जाता है.

हार्ट अटैक या स्ट्रोक के बाद उपचार के लिए चिकित्सक रोगी की जान बचाने के लिए एंजियोप्लास्टी का ही सहारा लेते हैं. यह हाथ से (radial artery) या पैर से(femoral route) से की जा सकती है.

एंजियोप्लास्टी में एक इंजेक्शन देने के बाद एक छोटी ट्यूब हाथ या पैर की किसी रक्त वाहिका से डाली जाती है. ट्यूब के रास्ते एक कैथेटर और तार को डाला जाता है. इस तार को ब्लॉकेज के रास्ते पर क्रॉस किया जाता है. एक बैलून से इस ब्लॉकेज को खोलकर एक रास्ता बनाया जाता है. उसके बाद वहां एक स्टेंट डाला जाता है. जिससे उस स्थान पर दोबारा शीघ्र ब्लॉकेज न हो.

इस स्टेंट को वहीं छोड़ दिया जाता है और कैथेटर और तार को बाहर निकाल लिया जाता है. एंजियोप्लास्टी 95% लोगों में सफल रहती है और इसे स्टैंडर्ड ऑफ केयर माना जाता है.

इस प्रक्रिया के बाद रोगी की ICU या CCU में कुछ समय तक नज़र की जाती है. रोगी को लगभग 24 से 48 घंटे हॉस्पिटल में रखा जाता है. आसान भाषा में कहें तो एंजियोप्लास्टी या स्टेंट डालना एक लाइफ सेविंग प्रॉसेस है. जिसे एक्सपर्ट कार्डियोलॉजिस्ट की नज़र में किया जाता है.

 

सवाल- एंजियोप्लास्टी कब करानी चाहिए? जवाब- आमतौर पर जब खून की नलिकाओं में 70% से अधिक ब्लॉकेज हो तब एंजियोप्लास्टी करानी चाहिए. सामान्यत: इसके ये लक्षण देखने को मिलते हैं-

  • मरीज की चलने-फिरने में सांस फूल रही हो
  • सीने में तीव्र दर्द महसूस हो रहा हो
  • सीढ़िया चढ़ने और वजन उठाने में ये दर्द अधिक हो जाए

ये लक्षण दवा से कंट्रोल ना हों तो एंजियोप्लास्टी करानी चाहिए.

अगर रोगी में किसी भी तरह के लक्षण ना हों तो 70% से कम ब्लॉकेज में एंजियोप्लास्टी करना ठीक नहीं है. गंभीर स्थिति में जब किसी का 80-90% ब्लॉकेज हो और लक्षण अधिक दिखें, तो उस स्थिति में हार्ट अटैक से बचाने के लिए भी एंजियोप्लास्टी की जा सकती है. इसके अतिरिक्त हार्ट अटैक आने पर 100% नली बंद हो जाए तो तुरंत एंजियोप्लास्टी करनी होती है. 70-80% ब्लॉकेज हो और रोगी को कोई लक्षण न दिखें तो इसे दवा से भी कुछ समय तक कंट्रोल किया जा सकता है.

सवाल-एंजियोप्लास्टी के बाद किस तरह की सावधानियां रखनी चाहिए? जवाब- एंजियोप्लास्टी यदि पैर से हुई है तो उस स्थान की साफ सफाई रखना बहुत महत्वपूर्ण है. अधिक चलने-फिरने या दौड़ने से उस स्थान पर सूजन या ब्लीडिंग हो सकती है. ऐसा होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए. रोगी को करीब एक सप्ताह तक बैड रेस्ट की राय दी जाती है. जिससे बाद धीरे-धीरे टहल सकते हैं या कोई हल्का व्यायाम भी कर सकते हैं.

कई बार स्किन के अंदर होने वाली ब्लीडिंग की वजह से आसपास नीले या लाल दाग हो जाते हैं, जिन्हें ठीक होने में करीब 2 सप्ताह लग जाते हैं. इसके लिए बर्फ से उस स्थान की सिंकाई कर सकते हैं.

एंजियोप्लास्टी यदि हाथ से हुई है तो हाथ को अधिक देर नीचे लटकाकर नहीं रखना चाहिए. इससे हाथ में अधिक दर्द होता है. हाथ में आर्टरी का पल्सेशन देखना बहुत महत्वपूर्ण है.

अगर हाथ या कोहनी के हिस्से में अधिक दर्द हो रहा है तो तुरंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए.

इसके अतिरिक्त नियमित रूप से चिकित्सक के द्वारा बताई गई दवाओं को लेना चाहिए. ऐसा न करने से फिर से ब्लॉकेज हो सकता है और दिल का दौरा पड़ने का खतरा रहता है.

 

सवाल- एंजियोप्लास्टी के बाद लाइफ कैसी होती है? जवाब- आमतौर पर एंजियोप्लास्टी के बाद आदमी की लाइफ नॉर्मल होती है. ज्यादातर यह आदमी के पंप फंक्शन पर निर्भर करता है. समय पर दवाएं और हेल्दी लाइफस्टाइल रखें तो कुछ दिनों बाद आराम से कहीं भी घूम-फिर सकते हैं. ठीक होने के बाद आदमी अपने काम पर लौट सकता है.

अगर किसी को हार्ट अटैक आया है तो यह जानना महत्वपूर्ण है कि हार्ट की पंपिग कैपेसिटी क्या है. इसके लिए अपने चिकित्सक से पूछ सकते हैं या 2D रिपोर्ट चेक कर सकते हैं. इसे EF (Ejection fraction) बोला जाता है. मतलब एक बार में आपका हार्ट कितने ब्लड को बाहर फेंक सकता है. जैसेकि-

50% के ऊपर होने पर यह नॉर्मल होता है.

40-50% मामूली शिथिलता है.

40-30% मध्यम शिथिलता है.

30% से कम गंभीर शिथिलता है.

20% से कम बहुत गंभीर शिथिलता इसमें मृत्यु होने का जोखिम बहुत अधिक होता है.

सवाल- क्या परिवर्तन करना पड़ेगा? जवाब- उन्हें अपना वजन घटाना चाहिए. इसके लिए रेगुलर एक्सरसाइज करें. दवा समय पर खाएंगे तो ठीक रहेंगे.

 

सवाल- खान-पान में क्या परहेज? जवाब- कम कैलोरी वाला खाना खाना पड़ेगा. मछली खा सकते हैं, लेकिन ऑयल की मात्रा नाम मात्र की होनी चाहिए. रेड मीट तो एकदम नहीं खाना चाहिए. किडनी ट्रांसप्लांट हुए तो काफी दिन हो गए, वह ठीक हैं. डायबिटीज अनकंट्रोल रहना बिल्कुल ठीक नहीं है. चालव-रोटी की स्थान मड़ुआ से बना हुआ खाना खाना चाहिए.

सवाल- खतरा क्या है? जवाब– इतनी तरह की रोंगों से घिरे रोगियों को खतरा रहता है. जिसको लेकर अलर्ट रहना चाहिए. समय से दवा लेने और परहेज में रहने पर परेशानी नहीं होती.

सवाल- हार्ट अटैक का खतरा रहता है? जवाब- कार्डियो सर्जन डाक्टर अजीत प्रधान कहते हैं कि एंजियोप्लास्टी नॉन सर्जिकल प्रक्रिया है, इसमें ऑपरेशन नहीं किया जाता. वाल्व की सर्जरी कांट-छांट कर की जाती है. हार्ट की धमनियों में ब्लॉकेज ठीक करने के लिए स्टेंट लगाई जाती है. यह नहीं लग पाता है तब बाइपास सर्जरी की जाती है. एंजियोप्लास्टी होने से लाइफ आसान हो जाती है. नहीं तो हार्ट अटैक का खतरा रहता है.

 

सवाल- साइड इफैक्ट क्या होगा? जवाब- हर दवा का भिन्न-भिन्न साइड इफैक्ट होता है. दवा नहीं खाने से अधिक प्रॉब्लम होती है. जिसका इफैक्ट होगा, उसका साइड इफैक्ट भी होगा.

सवाल- लाइफ स्टाइल में क्या चेंज करना होगा? जवाब- रिलेक्स लाइफ बिताना चाहिए. मैं बाइपास सर्जरी पर रोगियों को चिकनाहट वाली चीजें नहीं खाने की राय देता हूं. रेड मीट नहीं खाएं. किसी बात की टेंशन नहीं लें. लालू प्रसाद को डिसिप्लिन रूप से हरफनमौला जीवन जीना चाहिए.

सवाल- बैलून एंजियोप्लास्टी या स्टेंट एंजियोप्लास्टी में कौन सा बेहतर है ? जवाब- पहले जब स्टेंट की टेक्नोलॉजी नहीं थी तब बैलून की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता था. जिसमें बैलून से नसों या आर्टरी को फुला देते थे फिर बैलून को बाहर निकाल देते थे. ऐसे में ब्लॉकेज के दोबारा होने या नली के वापस से उसी स्थिति में आने का खतरा रहता था. स्टेंटिंग करने से नली का कचरा बीच में नहीं आता है, वह साइड से ही चिपका रहता है. नली में दोबारा से ब्लॉकेज की संभावना भी नहीं रहती है. एक्सपर्ट बताते हैं कि जहां तक पॉसिबल हो स्टैंटिंग ही करनी चाहिए, बैलून एंजियोप्लास्टी को तभी करना चाहिए, जब किसी वजह से स्टैंटिंग एंजियोप्लास्टी पॉसिबल ना हो.

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