बिहार

SIR-वक्फ़ विवाद के बाद ये बड़ी चाल चल गए नीतीश, जानें क्या है पूरा प्लान…

बिहार में चुनावी वर्ष है और तमाम सियासी दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुटे हैं ऐसे में राज्य के 18 फीसदी मुसलमान वोटर अहम किरदार निभा सकते हैं, क्योंकि कई सीटों पर जीत-हार का निर्णय यही वोट बैंक करता है अब तक इस वोट बैंक पर आरजेडी और उसके सहयोगी दलों की पकड़ मजबूत मानी जाती रही है, लेकिन इस बार जेडीयू भी मुसलमान समाज तक पहुंच बनाने की बड़ी प्रयास कर रही है
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दरअसल, 21 अगस्त को बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड का स्थापना दिवस पटना के बापू बैठक भवन में मनाया जाएगा यह आयोजन केवल बोर्ड तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जेडीयू भी इसे पूरी ताकत के साथ इंकार रही है इस मौके पर सीएम नीतीश कुमार भी उपस्थित रहेंगे और बताया जा रहा है कि वे यहां हजारों मुसलमान समाज के लोगों से संवाद स्थापित करेंगे. चुनावी वर्ष में यह कदम बहुत अहम बताया जा रहा है

शताब्दी कार्यक्रम का भव्य आयोजन

बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष सलीम परवेज ने कहा कि मदरसा बोर्ड का यह शताब्दी कार्यक्रम ऐतिहासिक होगा इसका आयोजन बापू सभागार, ज्ञान भवन और श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में किया जाएगा उन्होंने बोला कि कार्यक्रम का मकसद मदरसा शिक्षा और मुसलमान समाज से जुड़े मुद्दों पर विमर्श करना है साथ ही, जेडीयू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के लोग भी इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किए गए हैं

नाराजगी दूर करने की कवायद

सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में SIR और वक़्फ़ संशोधन बिल को लेकर मुसलमान समाज में नाराजगी देखने को मिली है ऐसे में नीतीश कुमार का इस कार्यक्रम में शामिल होना और सीधे संवाद करना खास अर्थ रखता है बताया जा रहा है कि वे मुसलमान समाज को भरोसा दिलाने की प्रयास करेंगे कि उनकी गवर्नमेंट उनके विकास और हितों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है

“नीतीश ने किया सबसे अधिक काम”

जेडीयू एमएलसी और मदरसा बोर्ड के सदस्य खालिद अनवर ने बोला कि नीतीश कुमार के सत्ता संभालने के बाद मुसलमान समाज के लिए कई बड़े काम किए गए चाहे मदरसा बोर्ड को मजबूत करना हो या अल्पसंख्यकों के लिए योजनाएं चलाना, नीतीश कुमार ने हमेशा अहमियत दी है उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री के रहते मुसलमान समाज की अनदेखी कोई कर ही नहीं सकता उनके शताब्दी कार्यक्रम में शामिल होने से ही लोग उत्साहित हैं और उनके संबोधन का बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे हैं

चुनावी वर्ष का बड़ा संदेश

बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले जानकार मानते हैं कि यह कार्यक्रम सिर्फ़ शैक्षिक या धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि इसके जरिए नीतीश कुमार एक बड़ा सियासी संदेश देना चाहते हैं आरजेडी जहां मुसलमान वोट बैंक पर परंपरागत पकड़ बनाए हुए है, वहीं जेडीयू अब इस वर्ग को फिर से अपने साथ जोड़ने की प्रयास में है अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नीतीश कुमार अपने संबोधन में क्या कहते हैं और किस तरह से मुसलमान समाज को साधने की प्रयास करते हैं यह तो तय है कि चुनावी वर्ष में यह संवाद बिहार की राजनीति का अहम मोड़ साबित हो सकता है

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