एमके स्टालिन के अलावा एक और तमिलियन पहुंचा पटना
Bihar Assembly Election & Two Tamilians: बीते कुछ दिनों से बिहार का राजनीतिक पारा कुछ ज्यादा ही गर्म चल रहा है। इस राजनीतिक गर्माहट की वजह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उनकी बिहार यात्रा है। स्टालिन की इस यात्रा को लेकर बिहार में अब भिन्न भिन्न राजनीतिक रंग देखने को मिल रहे हैं। पहला रंग कांग्रेस पार्टी और राजद का है, जो स्टालिन के बिहार आगमन को बड़ी कामयाबी और विपक्ष की एकजुटता के तौर पर दर्शा रहे हैं। दूसरा रंग भाजपा और जेडीयू का है, जो स्टालिन के उन शब्दों को याद दिला रहे हैं, जिन्हें बिहारवासियों के अपमान के लिए प्रयोग किया गया था। वहीं तीसरा रंग उस जनता का है, जो स्वयं को लगभग ठगा सा महसूस कर रही है।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की यह राजनीतिक बिहार यात्रा किसको लाभ कराती है और किसको नुकसान, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। वहीं, इस बीच एमके स्टालिन के अतिरिक्त एक और तमिलियन बिहार की राजधानी पटना पहुंचा है। एमके स्टालिन और इस तमिलियन के बीच अंतर केवल इतना है कि तमिल सूबे के सरपंच स्टालिन को समर्थन के साथ कड़ा विरोध भी मिला है, लेकिन इस तमिलियन की प्रशंसा में चाहे पक्ष-विपक्ष हो या फिर जनता, सभी प्रशंसा के कसीदे पढ़ रहे हैं। इनमें एक तमिलियन ऐसा है, जिसने सियासी रोटियां सेंकने के लिए हिंदी का विरोध किया, वहीं दूसरे ने अपनों को अपना बनाने क लिए हिंदी को अपना लिया।
इंडिगो एयरलाइंस के सीनियर पायलट है कृष्णनन
दरअसल, यहां पर एमके स्टालिन के इतर जिस दूसरे तमिलियन की बात हो रही है, उसका नाम कैप्टन प्रदीप कृष्णनन है। इंडिगो एयरलाइंस के सीनियर पायलट कैप्टन प्रदीप कृष्णनन बीते दिनों एक फ्लाइट लेकर पटना पहुंचे थे और उन्हें वहां से चेन्नई के लिए रवाना होना था। फ्लाइट के टेकऑफ से पहले कैप्टन प्रदीप कृष्णनन ने फ्लाइट में बैठे बिहार मूल के पैसेंजर्स से एक छोटा सा संवाद किया। इस संवाद का मकसद और तरीका कुछ ऐसा था, जो तमाम देशवासियों के दिल में एक अलग स्थान बना गया। दरअसल, इस संवाद में कैप्टन प्रदीप कृष्णनन ने पैसेंजर्स से केवल इतना बोलना था कि 33 हजार फीट की ऊंचाई पर टर्बुलेंस का सामाना करना पड़ सकता है, लिहाजा आप सभी अपनी सीट बेल्ट बांध कर रखें।
कैप्टन कृष्णनन के अंदाज ने जीता हिंदी भाषियों का दिल
तमिल भाषी कैप्टन प्रदीप कृष्णनन ने इस बात को पैसेंजर्स तक पहुंचाने के लिए अंग्रेजी की स्थान हिंदी भाषा को चुना। भले ही कैप्टन प्रदीप कृष्णनन को हिंदी कहना नहीं आता हो, लेकिन उनकी निष्ठावान प्रयास की प्रशंसा आज हर कोई कर रहा है। कॉकपिट और पैसेंजर केबिन के बीच खड़े होकर कैप्टन प्रदीप कृष्णनन ने पैसेंजर्स से कहा- सबको नमस्कार है। मेरा हिंदी बहुत सुंदर है, आप बस अरजेस्ट कर लेगा। हम आज पटना से चेन्नई जाता है। ऊपर 33000 फीट में टर्बुलेंस थोड़ा डगा-डगा-डगा (तमिल शब्द) करेगा। सीट बेल्ट डालेगा… नहीं तो आप आडेगा (तमिल शब्द)। कैप्टन प्रदीप कृष्णनन चाहते तो यह बात वह अंग्रेजी में भी कह सकते थे और इसके लिए कोई मनाही भी नहीं है।
सोशल मीडिया में वायरल हुआ कैप्टन कृष्णनन का वीडियो
लेकिन, उन्होंने अपनी इस एक छोटी सी प्रयास से उस खाई को पाटने की प्रयास की है, जो मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने हिंदी और बिहार का अपमान कर तैयार की थी। उन्होंने अपनी इस प्रयास से साफ कर दिया है कि तमिलनाडु में हिंदी का विरोध केवल नेताओं का अपना राजनीतिक मामला है। वहां का आम आदमी हिंदी को उतना ही प्यार करता है, जितना बिहार या हिंदी भाषी प्रांत में रहने वाला कोई शख्स। आपको बता दें कि कैप्टन प्रदीप कृष्णनन के इस संवाद का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल है। 19 अगस्त को पोस्ट हुए इस वीडियो को अब तक दो लाख से अधिक लोग पसंद कर चुके हैं और 50 हजार से अधिक लोग शेयर कर चुके हैं।

