बीएयू ने गेंहू के दो किस्म को किया इजात
भागलपुर: हिंदुस्तान को कृषि प्रधान राष्ट्र बोला जाता है। क्योंकि यहां की आजीविका कृषि पर निर्भर रहती है। खासकर बिहार की बात करें तो अधिकांश लोग कृषि पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में कार्तिक मास आते ही खेती की तैयारी में किसान लग जाते हैं। अब बात करें किसान की, तो उन्हें अच्छे प्रजाति के बीज की तलाश रहती है, जिसमें उत्पादन क्षमता अधिक हो। किसानों के लिए बीएयू हर हमेशा कार्य करती रहती है। ताकि किसानों को अच्छी खासी कमाई हो सके। ऐसे में यहां गेंहू की बुआई अधिक होती है। बीएयू ने गेंहू के दो ऐसे प्रजाति को इजात किया है, जो किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

किसानों की आमदनी होगी अधिक
आपको बता दें कि बिहार कृषि यूनिवर्सिटी सबौर हमेशा नए-नए तरह के अध्ययन को करते रहते हैं। ऐसे में ही गेंहू पर भी अध्ययन किया गया है। कुलपति डाक्टर डी आर सिंह से जब टेलीफोन पर बात चीत की गई, तो उन्होंने कहा कि देखिए ये गेंहू के दो प्रजाति बिहार के लिए वरदान साबित होंगे। जिसका नाम बिआरडब्ल्यू 3954 और डीबिडब्ल्यू 303 है। दोनों की अपनी भिन्न-भिन्न विशेषता है।
आपको बता दें कि बिहार में गेंहू की उत्पादन की बात करें, तो 30 से 35 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज होती है, लेकिन सबौर द्वारा विकसित गेंहू के बीज बिआरडब्ल्यू 3954 यह किसानों के खास है। वैसे जगहों के लिए जहां पानी जमने की परेशानी होती है। यदि आपके खेत में पानी जमा हुआ है, तो आप इसकी बुआई दिसंबर तक कर सकते हैं। फिर भी इसकी उपज क्षमता 37 किविंटल प्रति हेक्टेयर से अधिक रहने वाली है।
वहीं, डीबिडब्ल्यू 303 की बात करें, तो यह 45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देती है। जो आम औसतन क्षमता से 15% अधिक है। इसमें बीमारी प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। यह खासतौर पर किसानों को मालामाल करने में सहायता करेगा।
यह दोनों प्रजाति बिहार के लिए है खास
आपको बता दें कि यह दोनो प्रजाति बिहार के लिए खास है। यहां आम तौर पर 35 किविंटल प्रति हेक्टेयर सबसे अधिक उपज क्षमता होती है, लेकिन यह नयी प्रजाति इससे अधिक उपज देने वाली गेंहू की प्रजाति है। जो काफी मुनाफे वाली साबित हो सकती है।

