बिहार

माउंटमेन दशरथ मांझी का पुत्र भागीरथ मांझी ने कांग्रेस का थामा दामन

पटना बिहार चुनाव से पहले कयासों की बारिश के बीच पाला बदलने का खेल प्रारम्भ हो गया है नेता इस खेमे से उस खेमे और इस पार्टी से उस पार्टी में पहुंचने लगे हैं ऐसे में बड़ा प्रश्न यह है कि क्या दलबदलुओं की वजह से सियासी पार्टियों का गणित बिगाड़ेगा? जेडीयू में कभी पसमांदा मुस्लिमों का चेहरा रहे पूर्व राज्यसभा सांसद अली अनवर अब कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए हैं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्षों पहले जिस दशरथ मांझी को जनता दरबार में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठाया था, उसी माउंटमेन दशरथ मांझी का पुत्र भागीरथ मांझी ने कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया है इसी तरह भभुआ सीट से विधायक भरत बिंद समेत अब तक पांच आरजेडी और दो कांग्रेस पार्टी के विधायक एनडीए यानी भाजपा और जेडीयू में में शामिल हो चुके हैं ऐसे में बड़ा प्रश्न यह है कि आने वाले दिनों में दलबदलुओं की पहली पसंद प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज होगी या फिर एनडीए और महागठबंधन?

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जातीय समीकरणों के चक्रव्यूह में फंसे नेता अब टिकट की आस में इधर-उधर भाग रहे हैं आइए, इस राजनीतिक ड्रामे की परतें खोलते हैं, जहां हर विधायक की नींद उड़ी हुई है और हर पार्टी के दरवाजे पर दस्तक हो रही है बिहार विधानसभा में 243 सीटें हैं, और 2020 के चुनाव में राजद ने 75, भाजपा ने 74, जेडीयू ने 43 और कांग्रेस पार्टी ने 19 सीटें जीती थीं लेकिन अब टिकट कटने का डर सता रहा है

किस पार्टी के कितने नेता छोड़ेंगे पार्टी?

चुनावी रणभूमि में आरजेडी फिलहाल दल-बदलुओं की ‘पहली पसंद’ बनकर उभरती नजर आ रही है इसके बाद पीके पीर्टी जन सुराज और फिर मुकेश सहनी की पार्टी वीआईपी है पाला बदलने वाले नेताओं और टिकट की चाह रखने वाले नेताओं की पहली पसंद है बिहार की राजनीति में फिर से ‘पलटू राम’ का दौर प्रारम्भ हो गया है! विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले ही पाला बदलने का खेल तेज हो चला है पुरानी कहावत है ‘जब चुनाव आएगा, तो विधायक भागेगा’ लेकिन प्रश्न यह है कि दलबदलुओं की पहली पसंद कौन सा खेमा बनेगा? एनडीए की भाजपा या इण्डिया गठबंधन की राजद? या फिर प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी जैसा नया ठिकाना?

सूत्रों के मुताबिक, जेडीयू के करीब 15-20 विधायक बेचैन हैं वजह? नीतीश कुमार की घटती लोकप्रियता और पार्टी का खराब प्रदर्शन 2020 में जेडीयू का वोट शेयर 15.39% तक गिर गया था और अब एंटी-इनकंबेंसी की लहर है एक वरिष्ठ जेडीयू विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, ‘नीतीश जी की उम्र हो गई, पार्टी में नयी लीडरशिप की कमी है टिकट कटेगा तो कहां जाएंगे?’ इसी तरह, भाजपा के 10-12 विधायक भी डरे हुए हैं पार्टी ऊपरी जातियों और ईबीसी पर मजबूत है, लेकिन चिराग पासवान की एलजेपी और जितन राम मांझी की हम जैसी छोटी पार्टियां सीटों की मांग कर रही हैं एलजेपी 30-35 सीटें मांग रही है, जिससे भाजपा विधायकों की कुर्सी डगमगा रही है

वहीं, इण्डिया गठबंधन में राजद के 12-15 विधायक टिकट कटने से परेशान की समाचार आ रही है तेजस्वी यादव युवाओं और एमवाई (मुस्लिम-यादव) वोट बैंक पर दांव लगा रहे हैं, लेकिन परिवारवाद के आरोपों से पार्टी में असंतोष है कांग्रेस पार्टी के 8-10 विधायक भी चिंतित हैं, क्योंकि गठबंधन में सीट शेयरिंग पर झगड़ा है सीपीआई(एमएल) और वीआईपी जैसी छोटी पार्टियां 105 सीटें मांग रही हैं, जबकि कांग्रेस पार्टी 70 चाहती है

दलबदलुओं की पहली पसंद?

यहां जातीय समीकरण खेलते हैं ऊपरी जाति (भूमिहार, राजपूत) के नेता भाजपा की ओर रुख करते हैं, क्योंकि मोदी फैक्टर और हिंदुत्व अपील मजबूत है ईबीसी और कुर्मी नेता जेडीयू या भाजपा चुनते हैं, लेकिन नीतीश की कमजोरी से कुछ राजद की ओर जा सकते हैं यादव और मुसलमान नेता राजद पसंद करते हैं, जहां तेजस्वी का युवा चेहरा आकर्षित करता है लेकिन प्राशांत किशोर की जन सुराज एक नया विकल्प बन रही हैकुल मिलाकर, यह चुनाव ‘पाला बदल’ का महाकुंभ है जातीय समीकरण तय करेंगे कि यादव राजद में रहेंगे या भाजपा की ओर झुकेंगे, दलित एलजेपी में या सीपीआई(एमएल) में लेकिन एक बात साफ है- वोटर थक चुके हैं यदि दलबदलू जीत गए, तो प्रश्न उठेगा कि क्या बिहार में सिद्धांतों की राजनीति बची है? चुनाव से पहले यह ड्रामा और तेज होगा, और शायद कुछ बड़े नाम पाला बदलकर सबको चौंका देंगे प्रतीक्षा कीजिए, बिहार की राजनीति कभी निराश नहीं करती

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