Bihar Chunav: हर मोर्चे पर धर्मेंद्र प्रधान का दबदबा, बिहार चुनाव प्रभारी के रूप में जीती बाज़ी…
बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे निकट आ रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी हलचल तेज होती जा रही है। इस बार बीजेपी ने एक बड़ा दांव खेला है। पार्टी ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बिहार चुनाव का प्रभारी बनाया है। भाजपा के इस निर्णय से विरोधी खेमे में हड़कंप मच गई है। दरअसल धर्मेंद्र प्रधान का मतलब है- जीत की गारंटी। ये हम नहीं आकड़े कहते हैं।

धर्मेंद्र प्रधान का चुनावी रिकॉर्ड बहुत बढ़िया रहा है। उन्हें बीजेपी का चुपचाप काम करने वाला रणनीतिकार बोला जाता है। वे मंच पर कम और बैकग्राउंड में अधिक दिखते हैं। यही वजह है कि हर राज्य में उन्हें जीत दिलाने का श्रेय दिया जाता है।
हर राज्य में कामयाबी का ट्रैक रिकॉर्ड
ओडिशा 2024: पहली बार बीजेपी ने बीजेडी को हराकर गवर्नमेंट बनाई। इसका श्रेय काफी हद तक धर्मेंद्र प्रधान की रणनीति और चुनावी अभियान को जाता है।
हरियाणा 2024: यहां बीजेपी को भारी एंटी-इंकम्बेंसी का सामना करना पड़ रहा था। जाट, किसान और अग्निवीर योजना से नाराज युवा…सब चुनौती बने हुए थे। लेकिन प्रधान ने सधी हुई रणनीति से पार्टी को तीसरी बार सत्ता दिलाई।
पश्चिम बंगाल 2021: प्रधान को केवल नंदीग्राम की जिम्मेदारी दी गई थी। यहीं से ममता बनर्जी चुनाव हार गईं। ये बीजेपी के लिए बड़ा आत्मशक्ति बढ़ाने वाला मौका था।
उत्तराखंड 2017 और यूपी 2022: दोनों राज्यों में बीजेपी की वापसी में उनकी किरदार अहम रही। इस पूरे यात्रा ने धर्मेंद्र प्रधान को बीजेपी का ‘इलेक्शन मैनेजमेंट स्पेशलिस्ट’ बना दिया है।
बिहार से पुराना नाता
धर्मेंद्र प्रधान और बिहार का रिश्ता नया नहीं है। 2012 में उन्हें बिहार से राज्यसभा भेजा गया था। तभी से वे यहां की राजनीति और संगठन से जुड़े रहे। बीजेपी के अंदरूनी कामकाज को संभालने में उनकी बड़ी किरदार रही है।
नीतीश के खास
प्रधान और सीएम नीतीश कुमार के बीच भी पर्सनल संबंध हैं। दोनों परिवारों का संबंध अटल बिहारी वाजपेयी गवर्नमेंट के समय से है। यही वजह है कि एनडीए के भीतर सामंजस्य साधने में प्रधान की किरदार और भी मजबूत मानी जा रही है।
जातीय समीकरण में बढ़त
धर्मेंद्र प्रधान ओबीसी कुर्मी समाज से आते हैं। यह वही वर्ग है जिसे नीतीश कुमार का कोर वोट बैंक माना जाता है। इससे बीजेपी और जदयू के बीच सामंजस्य को मजबूती मिल सकती है। बीजेपी को आशा है कि प्रधान की सामाजिक पृष्ठभूमि और रणनीतिक कौशल से एनडीए को सीधा लाभ मिलेगा।
क्यों माना जाता है जीत की गारंटी?
धर्मेंद्र प्रधान का सबसे बड़ा गुण है- धैर्य और रणनीतिक संतुलन। वे मीडिया में कम और जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ अधिक समय बिताते हैं। संगठन के भीतर उनकी पकड़ मजबूत है और वे क्षेत्रीय नेताओं के साथ बेहतर संवाद बनाकर चलते हैं। यही उनकी कामयाबी का राज है। बिहार की राजनीति में अब सबकी नजर इस बात पर होगी कि क्या धर्मेंद्र प्रधान यहां भी अपनी जीत का सिलसिला जारी रख पाएंगे।

