बिहार: भूलकर भी न करें इन पुलों पर यात्रा, किसी वक्त भी हो सकता है बड़ा हादसा
बिहार में पुल गिरने की घटनाओं की चर्चा अब पूरे राष्ट्र में होने लगी है।राज्य में जर्जर पुलों के वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।बिहार के लखीसराय जिले के मलिया-तेतरहाट पुल भी जर्जर स्थिति में है।

बिहार में इन दिनों पुल गिरने का सिलसिला लगातार जारी है। राज्य में पुल गिरने की घटनाओं की चर्चा अब पूरे राष्ट्र में होने लगी है। ऐसे में सीएम नीतीश कुमार ने बिहार में पुल गिरने के मुद्दे में बैठक कर जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं इसी बीच बिहार के कुछ ऐसे पुल हैं, जिनकी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इन पुलों की स्थिति जर्जर है और कहा जा रहा है कि ये कभी भी गिर सकते हैं। ऐसा ही एक पुल है मलिया-तेतरहाट ब्रिज जो बिहार के लखीसराय जिले में स्थित है। यह पुल काफी जर्जर स्थिति में है और यह कभी भी गिर सकता है।
दरअसल लखीसराय के चानन प्रंखड और लखीसराय जिला मुख्यालय का संपर्क कभी भी भंग हो सकता है। किऊल नदी पर स्थित मलिया -तेतरहाट पूल काफी जर्जर हो चुका है। हालांकि इसकी भनक ना तो विभागीय अधिकारी को है और ना ही जिला प्रशासन का इस ओर ध्यान है। जबकि यह पुल चानन प्रंखड की लाइफलाइन मानी जाती है। गौरतलब है कि चानन प्रखंड के लोगों को जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए लगभग दस वर्ष पहले मलिया-तेतरहाट पुल का निर्माण करवाया गया था, जिसके बाद से पुल को सुरक्षित रखने के लिए कोई पहल नहीं की गई है, अब यह पुल कभी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है।
अवैध बालू खनन भी एक बड़ी वजह
यहां पुल के तेतरहट की ओर से दूसरे पिलर की मिट्टी और पत्थर बहने की घटना दूसरी बार हो चुकी है। इससे पूर्व पुल निर्माण के एक वर्ष बाद ही नदी में आए तेज पानी के बहाव से पिलर की मिट्टी और पत्थर बहा ले गया था, जिसके बाद पुल निर्माण विभाग ने पुल के सभी 18 पिलरों के चारों ओर सुरक्षा दीवार बनाकर उसके पत्थर डालकर उपर से बिल्डर पिचिंग का कार्य किया था, जिससे पिलर सुरक्षित रह सकें। लेकिन, किऊल नदी के बालू घाट में हुई गैरकानूनी बालू खनन के बाद नदी के पानी का धार ही बदल दी है।
किऊल नदी के जलस्तर में हो रही वृद्धि
नदी के गहरे होने से पानी की तेज धार ने पिलर के नीचे से मिट्टी और पत्थर ही बहा दिया, जिससे पुल पर खतरा उत्पन्न हो गया है। हालांकि मीडिया में समाचार आने के बाद तत्कालीन डीएम अमरेन्द्र कुमार ने मलिया-तेतरहाट पुल पहुंचकर पीलर का जायजा लिया था और संबंधित विभाग को मरम्मती का आदेश दिया था। लेकिन, अब तक इस पर कोई पहल नहीं की गई है। जबकि लगातार बारिश के बाद किऊल नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रहा है।
सारण का पट्टी पुल भी जर्जर
वहीं पटना मुख्य मार्ग पर दिघवारा-सितलपुर के बीच माही नदी पर बने पट्टी पुल भी जर्जर स्थिति में है। पुल की दयनीय स्थिति को देखते हुए लंबे समय से इस पर बड़े वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी गयी है। लेकिन, अभी भी छोटे वाहन यहां से गुजरते हैं। दरअसल यह पुल कमजोर था। इसलिए इसके समानांतर एक दूसरा पुल बनाया गया था। लेकिन, अभी भी पट्टी पुल पर आवागमन जारी है क्योंकि यह पुल एक बड़े क्षेत्र को जोड़ता है।
चितकोहरा रेलवे ओवरब्रिज दयनीय स्थिति में
वहीं बिहार की राजधानी पटना का चितकोहरा रेलवे ओवरब्रिज भी दयनीय स्थिति में है। इस पुल पर बने गड्ढे में बारिश का पानी प्रवेश कर गया है। वहीं पुल की रेलिंग भी टूटने के कगार पर है जबकि इस पुल पर हद दिन हजारों वाहनों का आवागमन होता है। फिर भी इस पुल की मरम्मती के लिए अभी तक कोई कारगर कदम नहीं उठाए गए हैं। इस ब्रिज का निर्माण 1989 में कराया गया था। पुल में गाड्ढे की वजह यह कमजोर होता जा रहा है। ऐसे में तुरन्त इस पुल को रिपेयर करना चाहिए।
बता दें, बिहार गवर्नमेंट ने भी माना कि हाल के दिनों में जो पुल पुलिया ध्वस्त हुए हैं उसकी मुख्य वजह उनका मेंटेनेंस नहीं होना है। दरअसल बिहार के अधिकतर जिलों में पुल के निर्माण के बाद उसका ठीक ढंग से मेंटेनेंस नहीं किया जाता है। हालांकि, पुलों और सड़कों के मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों रुपये की राशि तो निर्गत की जाती है लेकिन, इसको ठीक ढंग से पुलों के मेंटेनेंस पर खर्च नहीं की जाती है। बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अक्सर पुल, सड़कों और भवनों के मेंटेनेंस की बात करते हैं लेकिन उनके अधिकारी और मंत्री इस ओर कुछ विशेष ध्यान नहीं देते है

