बिहार की बेटी ने कर दिया कमाल, बनी सेना में अधिकारी…
“बेटी बेटा से कम नहीं होती है, मेहनत सबसे ऊपर होती है”। इस कहावत को सच कर दिखाया बिहार के समस्तीपुर जिले की बेटी शिवानी झा ने। शिवानी ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा (CDS) में कामयाबी पाई है और अब उनका चयन इंडियन आर्मी में लेफ्टिनेंट पद के लिए हुआ है। ये समाचार न सिर्फ़ परिवार, बल्कि पूरे जिले के लिए गर्व का क्षण है। शिवानी की इस उपलब्धि की चर्चा अब हर तरफ हो रही है। सोशल मीडिया से लेकर जिले के कोने-कोने तक लोग उन्हें बधाइयां दे रहे हैं और उनकी मेहनत को सलाम कर रहे हैं। खास बात यह है कि शिवानी की यह सफलता न सिर्फ़ एक पर्सनल अचीवमेंट है, बल्कि यह हर उस लड़की के लिए प्रेरणा है जो अपने सपनों को सच करने की हौसला रखती है।

शिवानी झा समस्तीपुर जिला के पूसा प्रखंड स्थित मुजौना गांव की रहने वाली हैं। वे संजीव कुमार झा की बेटी और स्व। रामकृपाल झा की पौत्री हैं। प्रशिक्षण के बाद वे इंडियन आर्मी में बतौर लेफ्टिनेंट अपनी सेवाएं देंगी। उनकी इस कामयाबी ने पूरे मुजौना गांव और समस्तीपुर जिले को गर्व से भर दिया है। शिवानी की कहानी इसलिए भी खास बन जाती है क्योंकि उन्होंने एक छोटे से गांव से निकलकर एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में कामयाबी प्राप्त की है, जो बताता है कि सपनों की कोई सीमाएं नहीं होतीं।
शिवानी की पढ़ाई की आरंभ मध्यप्रदेश के तना से हुई थी। जहां उन्होंने 12वीं तक की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद वह ग्वालियर गईं, जहां से उन्होंने इंजीनियरिंग (B.Tech) की डिग्री हासिल की। उनकी शैक्षणिक योग्यता जितनी मजबूत है, उनका जज्बा उससे कहीं अधिक ऊंचा है। इंजीनियरिंग के बाद शिवानी ने इन्फोसिस और चेकमार्क्स जैसी प्रमुख मल्टीनेशनल कंपनियों में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर कार्य किया, लेकिन कॉर्पोरेट की चमक-धमक उन्हें रोक नहीं पाई, उनके दिल में बचपन से बसी थी एक ही चाहत इंडियन आर्मी में जाना। और उसी जुनून ने उन्हें आज इस मुकाम पर पहुंचाया है।
शिवानी का सपना बचपन से ही वर्दी पहनने का था। उन्होंने इस सपने को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत, लगातार आत्म-सुधार, और कड़ी तैयारी की। CDS जैसी मुश्किल परीक्षा को पास करना केवल पढ़ाई का नहीं, बल्कि मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक संतुलन का भी खेल है और शिवानी ने तीनों स्तरों पर स्वयं को साबित किया। उनकी इस जीत में उनका सपोर्ट सिस्टम भी उतना ही मजबूत रहा। परिवार, शिक्षक और दोस्त सभी ने उनका हौसला बढ़ाया, लेकिन सबसे अहम किरदार निभाई उनकी मां प्रतिभा झा ने।
शिवानी कहती हैं कि इस मुकाम तक पहुंचने में यदि किसी का सबसे अधिक सहयोग है, तो वह हैं उनकी मां प्रतिभा झा ने हर मुश्किल हालात में न केवल अपनी बेटी का साथ दिया, बल्कि ढाल बनकर हर चुनौती से लड़ने में सहायता की। शिवानी के मुताबिक उनकी मां ही मेरी वास्तविक ताकत हैं। उन्होंने मुझे कभी हार मानना नहीं सिखाया।” उनकी मां का संघर्ष, बेटी में विश्वास और हर मोड़ पर समर्थन यही वो नींव है, जिस पर शिवानी ने अपने सपनों का महल खड़ा किया और आज जब वो वर्दी पहनने जा रही हैं, तो मां की आंखों में गर्व और आंसू दोनों हैं।
शिवानी की यह कामयाबी न सिर्फ़ उनके लिए एक मील का पत्थर है। बल्कि समस्तीपुर और बिहार की हर उस बेटी के लिए एक प्रेरणास्त्रोत है, जो अपने सपनों को ऊंची उड़ान देना चाहती है। वह आज युवाओं के लिए रोल मॉडल बन चुकी हैं। खासकर उन लड़कियों के लिए जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा सपना देखती हैं। डिजिटल मीडिया, सोशल प्लेटफॉर्म्स, और क्षेत्रीय समाचारों में शिवानी की यह उपलब्धि खूब चर्चा में है। लोग उनके जज्बे को सलाम कर रहे हैं और आशा जता रहे हैं कि आने वाले समय में और भी बेटियां शिवानी की तरह नाम रौशन करेंगी

