इस खपत में बनकर तैयार होगा बक्सर निकृष कैनाल पंप
बक्सर स्थित निकृष कैनाल पंप का काम आखिरी चरण में तेजी से किया जा रहा है. जिससे किसानों में नए वर्ष 2025 में हर खेत तक सिंचाई के लिए पानी पहुंचने की आशा जगी है. पम्प हाउस के निर्माण से चौसा और राजपुर प्रखंड क्षेत्र के लगभग 2700 हेक्टेयर भूमि सिंचित

दरअसल, जिले के आखिरी छोर पर बसा रामपुर, डेहरी समेत दर्जनों गांव में सिंचाई के पानी की जटिल परेशानी को दूर करने के लिए निकृष कैनाल पंप का निर्माण कार्य प्रारम्भ किया गया था. जिसे 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसके फेल होने के बाद दोबारा 2024 के अप्रैल महीने में किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया. लेकिन नहर विभाग के पदाधिकारियों की ढिलाई के कारण 2024 का लक्ष्य भी फेल हो गया. सिविल और मैकेनिक का काम पूरा नहीं होने के कारण किसानों के खेत तक पानी नहीं पहुंच पाया. जिसके बाद 2025 के मार्च से पहले काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
62 करोड़ की लागत से बन रहा पंप हाउस
हालांकि जिले के राजपुर और चौसा प्रखंड के कुछ भागों में सिंचाई के लिए किसान निजी पंप सेट पर निर्भर है. जिसके कारण खेती का लागत अनाज से अधिक हो जाता है. जिसको लेकर ग्रामीणों के आंदोलन पर वर्ष 2012 में कर्मशाला में निकृष पंप हाउस निर्माण की स्वीकृति मिली. वर्ष 2014 में नाबार्ड के अनुसार 62 करोड़ की लागत से निकृष में पंप हाउस का निर्माण शुरू किया गया. जिसमें 42 करोड़ रुपये सिविल कार्य पर बाकी 20 करोड़ रुपये यांत्रिक कार्य पर खर्च किए जाने थे.
फिलहाल पथ निर्माण विभाग से एनओसी मिलने के बाद निकृष गांव के पास स्टेट हाईवे को तोड़ डिलीवरी लोहे के बड़े-बड़े पाइप को सड़क के इस पार से उस पार चैनल तक पहुंचाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है. जिससे किसानों को इस बार नए वर्ष में धान की फसल के लिए हर खेत तक पानी पहुंचने की आशा जग गई है.
ससमय कार्य पूरा नही होने पर भड़के डीएम
बक्सर के डीएम अंशुल अग्रवाल ने कहा कि विस्तारित तिथि तक भी उक्त योजनाओं का कार्य पूर्ण नहीं किया जाना, अंत्यत खेदजनक है. जो कार्यपालक अभियंता, गंगा पम्प नहर कार्य प्रमंडल चौसा और कार्यपालक अभियंता और सिंचाई सह यांत्रिक प्रमंडल कार्यों में ढिलाई कर रहे है वो कार्य में उदासीनता को परिलक्षित करता है. साफ है कि उक्त दोनों पदाधिकारियों ने अपने कार्यों में रुचि नहीं ले रहे है.जिसके कारण इतनी महत्वाकांक्षी योजना का निर्माण कार्य ससमय पूर्ण नहीं हो सका.

