बिहार में कांग्रेस ने उपमुख्यमंत्री पद की जताई चाह
पटनाः बिहार चुनाव को लेकर धीरे-धीरे सियासी सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। इधर, महागठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर पेंच सुलझने का नाम नहीं ले रहा है। हालांकि आज इसे लेकर पटना में एक अहम बैठक होनी है। जिसपर सभी की नजर टिकी है। इस बैठक से ऐन पहले कांग्रेस पार्टी की ओर से बड़ी समाचार आमने आ रही है। सुत्र के अनुसार, कांग्रेस पार्टी ने उपमुख्यमंत्री पद की चाह जताई है। यदी ऐसा होता है तो पार्टी सीटों की संख्या पर नरम हो सकती है। ऐसी स्थिति में 50 से 60 सीटों पर मान सकती है। अन्यथा 2020 की सभी 70 सीटों पर दावा बरकरार रहेगा।

भकपा माले को चाहिए 45 सीटें
वहीं, रविवार को भाकपा माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने 40 से 45 सीट पर अपनी दावेदारी कर दी है। दीपंकर भट्टाचार्य ने बोला है हमलोग साफ शब्दों में महागठबंधन के साथियों से बोला है की आपलोग 243 सीट में 200 सीट पर लड़िए और 43 सीट पर माले के लिए छोड़िए।
कुछ दिन पहले CPI ने 24 सीटों की मांग रखी थी। वीआईपी के मुकेश सहनी 60 सीटों का राग अलाप रहे हैं। उन्हें तो साथ में उपमुख्यमंत्री का भी पद चाहिए। इनके अतिरिक्त पशुपति पारस की एलजेपी और हेमंत सोरेन की जेएमएम के महागठबंधन में शामिल होने से उन्हें भी कुछ सीटें देनी पड़ेगी। पिछले चुनाव में CPI-ML को 19, CPI को 6 और CPI-M को 4 सीटें दी गई थी और आरजेडी अकेले 144 सीटों पर लड़ी थी।
‘243 सीटों पर तेजस्वी को देखकर करें वोट’
वहीं, तेजस्वी ने दो दिन पहले मतदाओं से अपील की है कि वे बिहार की सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। लिहाजा हर सीट पर तेजस्वी को देखकर ही वोट दें। नेता प्रतिपक्ष के इस बयान के कई अर्थ तलाशे जा रहे हैं। हालांकि आज पटना में होने वाली महागठबंधन की बैठक सीटों के बंटवारे के लिहाज से काफी जरूरी मानी जा रही है। आशा है इस में स्थिति साफ हो जाएगी।
तेजस्वी करेंगे ‘बिहार अधिकार यात्रा’
बता दें कि तेजस्वी 16 सितंबर से ‘बिहार अधिकार यात्रा’ पर भी निकलने जा रहे हैं। यह यात्रा जहानाबाद से प्रारम्भ होकर 20 सितंबर को वैशाली में खत्म होगी और 10 जिलों से होकर गुजरेगी, जिनमें नालंदा, पटना, बेगूसराय, खगड़िया, मधेपुरा, सहरसा, सुपौल और समस्तीपुर शामिल हैं। कुछ सियासी विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में हुे वोटर अधिकार यात्रा से बिहार में कांग्रेस पार्टी का ग्राफ बढ़ा है। उसी काट के तौर पर तेजस्वी की इस यात्रा को देखा जा रहा है। इसका असर सीटों के बंटवारे पर भी पड़ने वाला है।

