जिंदा नहीं हुआ मुर्दा! पोस्टमार्टम रूम के बाहर असफल हुआ झारफूंक करने वाले का ढोंग

लोग हतप्रभ होकर उसके तमाशे को देखते रहे। झाड़फूंक के दौरान कभी भगत खड़ा होकर हेलमेट लगाए हुए मंत्र का जाप करता, फिर उसके बाद जाकर मुर्दे के नब्ज को चेक करता कि उसमें जान आई कि नहीं। मुर्दे को जिंदा करने का यह खेल इतने पर ही नहीं रुका। भगत अखिलेश ने अपने कंधे पर रखे गमछे को कोड़ा का स्वरूप दिया और फिर भगत ने सांप के जहर उतारने के लिए एक के बाद एक कोड़ा मुर्दे के ऊपर चलाया। वह मृत बालक के मृतशरीर पर लगातार कोड़ा का बरसाता रहा। भगत ने बिना रुके करीब 20 कोड़े लगाया। लेकिन इन सब के बावजूद मृत बालक में प्राण नहीं लौटा तो भगत वहां से मुंह छुपा कर निकालने लगा। लेकिन, न्यूज 18 ने उसे मौके पर रोक लिया और प्रश्न पूछा।
मीडिया टीम ने भगत से बात करने की प्रयास की तो वह अपने चेहरे को देखता रहा। जब टीम ने कैमरा और माइक उनके सामने से नहीं हटाया तो उसने अपनी बात रखी। उन्होंने मेडिकल साइंस को ही चुनौती दे दी। उन्होंने बोला कि बच्चे का उपचार के दौरान पानी चढ़ाया गया। यह प्रक्रिया गलत है और इसी के कारण वह बच्चे को जिंदा नहीं कर पाए। उन्होंने दावा किया कि इससे पहले वह कई बच्चे को ठीक भी किया, लेकिन उनके तमाम दावे आज समस्तीपुर सदर हॉस्पिटल के पोस्टमार्टम हाउस के बाहर टांय-टांय फिस्स हो गया। परिवार के लोगों से भी न्यूज 18 ने बात की कि आधुनिक दौर में अंधविश्वास पर वह कैसे विश्वास कर लिया। तब परिजनों ने बोला कि उनका भी विश्वास इन सब पर नहीं है, लेकिन वह जाकर कहने लगे तो एक बार उन्हें मौका दिया।

