बिहार

IRCTC घोटाले में आज दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में होगी सुनवाई

IRCTC घोटाले में आज दिल्ली की राउज एवेन्यू न्यायालय में सुनवाई होगी. आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव और अन्य आरोपियों के वकील न्यायालय में अपना पक्ष रखेंगे. इससे पहले 1 मार्च को सुनवाई हुई थी.

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सीबीआई ने न्यायालय में अपना पक्ष रखते हुए बोला था, ‘IRCTC में अनियमितताएं हुई हैं. करप्शन के मुद्दे में पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद और आरोपियों के विरुद्ध केस चलाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं.

इस मुद्दे में उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बेटे और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव समेत अन्य आरोपी हैं. CBI ने लालू यादव और प्रेम चंद्र गुप्ता को मुख्य साजिशकर्ता कहा है. IRCTC मुद्दे में इल्जाम तय करने पर सीबीआई ने अपनी बहस पूरी कर ली है.

राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव समेत 11 आरोपी

IRCTC घोटाला 2004 में लालू के रेल मंत्री रहने के दौरान हुआ. रेलवे बोर्ड ने उस समय कैटरिंग और रेलवे होटलों की सेवा को पूरी तरह IRCTC को सौंप दिया था. इस दौरान रांची और पुरी के बीएनआर होटल के रखरखाव, संचालन और विकास को लेकर जारी टेंडर में अनियमितताएं किए जाने की बातें आई थीं.

आरोप है कि होटल्स के मालिकों ने इसके बदले लालू यादव परिवार को पटना में तीन एकड़ जमीन दी, जो बेनामी संपत्ति थी. इस मुद्दे में भी लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत 11 लोग आरोपी हैं. 7 जुलाई 2017 को CBI ने लालू के विरुद्ध इस मुद्दे में एफआईआर दर्ज की थी.

11 मार्च को लालू यादव, बेटा तेजप्रताप और बेटी हेमा को पेशी पर बुलाया

वहीं, लैंड फॉर नौकरी मुद्दे में दिल्ली की राउज एवेन्यू न्यायालय से लालू परिवार को झटका लगा है. इस मुद्दे में सीबीआई की ओर से दाखिल फाइनल चार्जशीट पर न्यायालय ने संज्ञान लेते हुए 25 फरवरी को लालू यादव और उनके बेटा-बेटी समेत सभी आरोपियों को समन भेजा है.

कोर्ट ने लालू, उनके बड़े बेटे तेजप्रताप और बेटी हेमा यादव को 11 मार्च को पेश होने का आदेश दिया गया है.इससे पहले न्यायालय ने निर्णय सुरक्षित रख लिया था. इस मुकदमा में CBI, लालू यादव सहित 78 अन्य के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की है. इसमें 30 लोक सेवक आरोपी हैं.

CBI ने कहा था कि, ‘हमने न्यायालय से रेलवे बोर्ड के अधिकारी आर के महाजन के विरुद्ध मुकदमा की अनुमति ले ली है. उनके विरुद्ध गवाहों की लिस्ट भी तैयार है. आगे न्यायालय इस मुद्दे में निर्णय लेगा.

इससे पहले 16 जनवरी को न्यायालय ने बोला था कि यदि 30 जनवरी तक महाजन के विरुद्ध स्वीकृति नहीं मिलती है तो सक्षम अधिकारी को इसका स्पष्टीकरण देना होगा.

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