बक्सर में ‘जंगल बुक’ थीम पर आधारित दुर्गा पंडाल बना चर्चा का विषय
बक्सर में दुर्गा पूजा को लेकर उत्साह का माहौल है. इस बार नयी बाजार वार्ड नंबर-4 का आदर्श युवा क्लब अपने ‘जंगल बुक’ थीम पर आधारित अनोखे पंडाल के कारण चर्चा का विषय बना हुआ है. इसे देखने के बाद श्रद्धालु और कारीगर भी इसकी भव्यता से प्रभावित हो रहे हैं.
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आदर्श युवा क्लब के सदस्य यस कुमार ने कहा कि समिति 1990 से लगातार दुर्गा पूजा का आयोजन कर रही है. इस वर्ष, समिति के लगभग 50 सदस्यों ने डेढ़ महीने तक दिन-रात मेहनत कर यह पंडाल तैयार किया है. पंडाल के निर्माण में किसी बाहरी कारीगर की सहायता नहीं ली गई, सिर्फ़ मिट्टी की प्रतिमाएं बंगाल के कारीगरों से मंगवाई गई हैं.
मुख्य द्वार पर ‘जंगल बुक’
पंडाल की थीम लोकप्रिय टीवी सीरियल ‘जंगल बुक’ पर आधारित है. मुख्य द्वार पर ‘जंगल बुक’ लिखा है. अंदर प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं को घने हरे-भरे जंगल का अनुभव होता है, जहां पेड़-पौधे, हरियाली और झरनों की गूंज असली जंगल का आभास कराती है.
पंडाल के भीतर दो मंदिर बनाए गए हैं. एक महाराष्ट्र के अमरेश्वर महादेव मंदिर की प्रतिकृति और दूसरा मां दुर्गा का मुख्य मंदिर. इन दोनों के बीच 20 फीट ऊंचा एक कृत्रिम पहाड़ है, जिससे बहता पानी एक सुन्दर झरने का रूप लेता है.
पंडाल में 30 जानवरों की प्रतिमाएं स्थापित
‘जंगल बुक’ के माहौल को जीवंत बनाने के लिए पंडाल में मुगली, बघीरा, बल्लू, शेर खान, मगरमच्छ, हाथी, बंदर, भालू सहित लगभग 30 जानवरों की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं. पेड़ों पर बैठा मुगली श्रद्धालुओं को सीधे टीवी सीरियल के उस दौर में ले जाता है. यह पंडाल जल, जंगल और पहाड़ के संरक्षण का संदेश भी देता है.
पंडाल सजाने में समिति ने लगभग एक ट्रक भरकर पेड़-पौधे लगाए हैं. वहीं, 500 से अधिक बांस, थर्मोकोल, कपड़ा और अन्य सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है. सदस्यों ने दिन-रात एक कर अपनी कल्पना को हकीकत का रूप दिया.
यही कारण है कि क्षेत्रीय कारीगर भी इस पंडाल को देखकर दंग हैं और कह रहे हैं कि इतनी परफेक्ट और जीवंत कलाकारी समिति के सदस्यों ने कर दिखाया, जो किसी प्रोफेशनल कारीगर से कम नहीं है. समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए तकनीकी पहल भी की है.
पंडाल में लगाए गए स्कैनर
पंडाल में जगह-जगह स्कैनर लगाए गए हैं. इन्हें स्कैन करते ही श्रद्धालु पिछले सालों के पंडालों और उनकी झलकियों को अपने मोबाइल पर देख सकते हैं. यह पहल खासकर युवाओं को आकर्षित कर रही है.लेकिन यह पंडाल सिर्फ़ सजावट का नमूना नहीं है.
इसके पीछे एक गहरा संदेश भी छिपा है. यस कुमार और समिति के अन्य सदस्यों का बोलना है कि जंगल बुक थीम का चुनाव इसलिए किया गया है ताकि लोगों को याद दिलाया जा सके कि धरती पर जीवन, जल, जंगल और पहाड़ के बिना संभव नहीं है.
प्रकृति को बचाने का दिया संदेश
अगर हम इनका संरक्षण नहीं करेंगे तो प्रकृति का प्रकोप झेलना पड़ेगा. हाल ही में राष्ट्र के कई हिस्सों में बादल फटने की घटनाएं इसी ढिलाई का रिज़ल्ट हैं. शाम ढलते ही रोशनी से नहाया यह पंडाल और भी भव्य लगने लगता है. झरने की कल-कल ध्वनि और चारों ओर फैली हरियाली श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर देती है.
लोग न केवल मां दुर्गा के दर्शन करने आते हैं बल्कि पंडाल को देख इसकी कलात्मकता की प्रशंसा भी करते नहीं थकते. लगातार 35 सालों से जिले में पहचान बना चुका आदर्श युवा क्लब इस बार भी अपनी मेहनत और अलग सोच से साबित कर रहा है कि जब जुनून और टीम वर्क साथ हो, तो किसी भी कारीगरी को मात दी जा सकती है.
यही कारण है कि आज पूरा बक्सर इस पंडाल को लेकर गर्व महसूस कर रहा है और कारीगर भी समिति के सदस्यों की कला और सोच को देखकर दंग हैं.

