गुलाब यादव की पोल पट्टी खोलने की तैयारी में जुटी है ईडी
पटना। मनी लांड्रिंग एक्ट में अरैस्ट आइएएस अधिकारी संजीव हंस की रिमांड के बाद अब न्यायालय ने राजद के पूर्व विधायक गुलाब यादव को भी सात दिनों के लिए प्रवर्तन निदेशालय को रिमांड पर सौंप दिया है। शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय के विशेष न्यायालय में सुनवाई के बाद न्यायालय ने बेऊर कारावास अधीक्षक को निर्देश दिया कि गुलाब यादव को सात दिनों के रिमांड पर प्रवर्तन निदेशालय को सौंप दिया जाए। अब प्रवर्तन निदेशालय गुलाब यादव और संजीव हंस को एक साथ बैठाकर भी प्रश्न करेगी। इन प्रश्नों में दोनों की दोस्ती से लेकर दोनों की पत्नी के बिजनेस पार्टनर और संजीव हंस ने गुलाब यादव को किस तरह से सहायता की जैसे प्रश्न होंगे। आने वाले दिनों में गुलाब के साथ अन्य आरोपियों को भी आमने-सामने बिठाकर प्रवर्तन निदेशालय संजीव से पूछताछ हो सकती है।

इधर, दूसरे दिन भी प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने आइएएस संजीव हंस से पूछताछ की। प्रवर्तन निदेशालय के सूत्रों की मानें तो उनसे तोहफे में मिली महंगी घड़ियों के बारे में कई प्रश्न पूछा गया। लोगों ने इतनी महंगी घड़ियां आपको क्यों दी? इसके बदले में आपने उन्हें क्या क्या लाभ पहुंचाया? बिजली कंपनियों में ठेकेदारी करने वाले प्रवीण चौधरी के नौ करोड़ के फ्लैट की खरीदारी से पहले आप और आपकी पत्नी उसे देखने क्यों गये थे? इसके लिये प्रवीण को पैसा आप ने ही दिया था? संजीव हंस को इस तरह के प्रश्नों से दूसरे दिन सामना करना पड़ा।
ईडी के प्रश्नों में उलझ गए संजीव हंस
ईडी की टीम ने संजीव हंस से यह भी पूछा कि आपको मर्सिडीज किसने दी थी? संजीव ने बोला कि गिफ्ट में मिली थी। तब प्रवर्तन निदेशालय ने पूछा- किस एवज में इतने महंगे गिफ्ट दिए गए? गिफ्ट देने वालों को क्या फायदा पहुंचाया था? उस पर संजीव हंस ने कोई खास उत्तर नहीं दिया। संजीव हंस से प्रवर्तन निदेशालय ने यह भी पूछा कि काली कमाई को कैसे खपाते थे? हालांकि, दूसरे दिन भी संजीव हंस अधिकांश प्रश्नों का सीधा-सीधा उत्तर नहीं दे रहे थे। अधिकांश प्रश्नों के बारे में वे कहते रहे कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है।
अब आमने-सामने की होगी पूछताछ
संजीव हंस और गुलाब यादव की रिमांड मिलने के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय इनके तीन अन्य सहयोगियों शादाब अहमद, प्रवीण चौधरी और पुष्पराज को रिमांड पर लेने की तैयारी में है। इनकी रिमांड के लिए न्यायालय में आवेदन दिया है। आसार है कि शनिवार को न्यायालय अपना निर्णय देगा। दूसरी ओर इसी मुद्दे में कारावास में बंद शादाब खान, प्रवीण चौधरी और पुष्पराज बजाज से हिरासत में पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय के द्वारा दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई के बाद विशेष न्यायालय ने अपना आदेश 26 अक्टूबर 2024 तक के लिए सुरक्षित रख लिया।
ईडी की रेड में करोड़ों का ‘काला कैश’
बता दें कि बीते महीनों में आईएएस संजीव हंस और पूर्व विधायक गुलाब यादव के करीबियों के ठिकानों से प्रवर्तन निदेशालय ने 90 लाख कैश और 13 किलो चांदी की सिल्ली बरामद किया था। इनके ठिकानों से कई बेनामी संपत्ति के डॉक्यूमेंट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स साक्ष्य भी मिले थे। प्रवर्तन निदेशालय ने संजीव हंस और गुलाब यादव के करीबियों के दिल्ली, कोलकाता और मुंबई स्थित चार ठिकानों पर बुधवार को सर्च किया था। दो महीने पहले प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मुद्दे में संजीव और गुलाब के पटना, पुणे, पंजाब, दिल्ली, नोएडा समेत राष्ट्र के दर्जनभर ठिकानों पर छापेमारी की थी जिसमें प्रवर्तन निदेशालय के हाथ कई अहम डॉक्यूमेंट्स लगे थे।
गुलाब यादव की करोड़ों की बेनामी संपत्ति
ईडी के सूत्रों के मुताबिक पूर्व विधायक गुलाब यादव के पास करोड़ों रुपए की बेनामी संपत्ति का पता चला है। गुलाब यादव के बैंक एकाउंट में 4 करोड़ से अधिक रुपए की जानकारी भी लगी थी। इन रुपयों को संसदीय चुनाव में खर्च करने की बात सामने आ रही है। उसपर भी जांच चल रही है। हालांकि, पूर्व विधायक स्वयं को बेगुनाह बताते रहे हैं और फंसाये जाने का इल्जाम लगाते रहे हैं। लेकिन, प्रवर्तन निदेशालय के इस प्रश्न पर कि आपको किसने फंसाया है कुछ उत्तर नहीं देते हैं।
मनी लॉंड्रिंग के मुद्दे में दोनों के कनेक्शन
बता दें कि आईएएस संजीव की पत्नी मोना हंस के साथ ही गुलाब की पत्नी अंबिका गुलाब यादव, हंस के सम्बन्धी गुरू बालतेग, संजीव के पिता लक्ष्मण दास, आनंद ट्रेडिंग कॉरपोरेशन के देविंद्र सिंह आनंद, सिंगल कंस्ट्रक्शन से जुड़े सुरेश सिंगला, सुरेश सिंगला के सम्बन्धी कमलकांत गुप्ता, एक्स आर्मी मेंस प्रोटेक्शन सर्विस के सुनील सिन्हा, तरुण राघव के नाम प्रमुख हैं। ये सभी मुद्दे मनी लॉंड्रिंग से जुड़े हैं और आईएएस संजीव हंस के साथ गुलाब यादव इस मुद्दे में फंसे हैं।

