बिहार

बिहार की राजनीति में पूर्व IPS शिवदीप लांडे की हुई एंट्री

बिहार की राजनीति में पूर्व आईपीएस शिवदीप लांडे की एंट्री हो गई है. विधानसभा चुनाव से 7 महीने पहले उन्होंने पॉलिटिकल पार्टी बनाई है. पार्टी का नाम हिंद सेना रखा है. पार्टी सिंबल में खाकी बैकग्राउंड में बना त्रिपुंड है.

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पूर्व आईपीएस शिवदीप लांडे आईजी पद से त्याग-पत्र देने के बाद आज मंगलवार को पटना में मीडिया से बात की. उन्होंने कहा, ‘बिहार का युवा परिवर्तन चाहता है. कई सियासी पार्टियों की ओर से मुझे राज्यसभा भेजने, मंत्री और सीएम फेस बनाने का ऑफर दिया गया है.

शिवदीप लांडे ने 19 सितंबर 2024 को अपना त्याग-पत्र दिया था. त्याग-पत्र देने के पहले शिवदीप पूर्णिया में बतौर IG के पद पर तैनात थे. पूर्णिया में 6 सितंबर को पूर्णिया रेंज के IG पद का चार्ज लिया था. इस्तीफे के तुरंत बाद इनका त्याग-पत्र मंजूर नहीं किया गया था.

इसके बाद ऐसी अटकलें लगाई जा रही थी कि शिवदीप अपना त्याग-पत्र वापस ले लेंगे, लेकिन अब शिवदीप का त्याग-पत्र मंजूर कर लिया गया है. इस्तीफे की पेशकश के बाद विभाग ने शिवदीप को ट्रांसफर कर तुरन्त मुख्यालय बुला लिया था. मुख्यालय में उन्हें IG प्रशिक्षण की जिम्मेदारी दी गई. उनकी स्थान राकेश राठी को पूर्णिया का IG बनाया गया. महाराष्ट्र के रहने वाले शिवदीप लांडे का पूरा नाम शिवदीप वामनराव लांडे है. वह 2006 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं.

13 जनवरी को राष्ट्रपति ने मंजूर किया था इस्तीफा

IPS शिवदीप लांडे का त्याग-पत्र 117 दिनों के बाद मंजूर किया गया था. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 13 जनवरी 2025 को शिवदीप लांडे का त्याग-पत्र मंजूर किया. 14 जनवरी को देर शाम गृह विभाग ने अधिसूचना जारी कर दिया था.

जनवरी 2015 में शिवदीप पटना के डाक बंगला चौराहे पर घूस मांग रहे इंस्पेक्टर सर्वचंद को फिल्मी अंदाज में दुपट्टा ओढ़कर पकड़ने के मुद्दे में चर्चा में आए थे. उत्तर प्रदेश पुलिस के इंस्पेक्टर सर्वचंद पर इल्जाम था कि वह पटना के दो व्यापारी भाइयों से एक पुराने मुकदमा को समाप्त करने के लिए पैसे मांग रहे थे. इन दोनों भाइयों ने इसकी जानकारी तत्कालीन एसपी शिवदीप लांडे को दी.

इसके बाद लांडे भेष बदलकर टी-शर्ट पहने और सिर पर दुपट्टा लपेटे इंस्पेक्टर सर्वचंद का डाक बंगला चौराहे पर प्रतीक्षा करने लगे. सर्वचंद जैसे ही घूस का पैसा लेने के लिए वहां पहुंचे, शिवदीप ने उन्हें अरेस्ट कर लिया. हालांकि, सबूतों के अभाव में थोड़ी ही देर में सर्वचंद्र को छोड़ भी दिया गया.

 

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