गिरिराज सिंह ने आज बिहार के लखनपुर, बेगूसराय में एक महत्वपूर्ण कौशल विकास कार्यक्रम का किया उद्घाटन
केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने आज बिहार के लखनपुर, बेगूसराय में एक जरूरी कौशल विकास कार्यक्रम का उद्घाटन किया. यह कार्यक्रम विशेष रूप से जलकुंभी से विभिन्न प्रकार के हस्तशिल्प बनाने के लिए कारीगरों को प्रशिक्षित करने पर केंद्रित है.
इस अवसर पर बिहार गवर्नमेंट के खेल मंत्री सुरेन्द्र मेहता, बेगूसराय के विधायक कुंदन कुमार, मटिहानी के विधायक राज कुमार सिंह और कपड़ा मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) अमृत राज सहित कई गणमान्य आदमी मौजूद थे.
गिरिराज सिंह ने इस पहल के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बोला कि यह कार्यक्रम न सिर्फ़ कारीगरों को कौशल प्रदान कर उन्हें सशक्त करेगा, बल्कि शिल्प क्षेत्र में स्थिरता को भी बढ़ावा देगा. उन्होंने बोला कि इस सफल पहल को भविष्य में बिहार के अन्य हिस्सों और पूरे राष्ट्र में भी दोहराया जाएगा. उन्होंने इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) और वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त कार्यालय की सराहना की. इस पहल के अनुसार 200 से अधिक कारीगरों को जलकुंभी शिल्प का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे पर्यावरण के अनुकूल सामग्री का इस्तेमाल कर कारीगरों के लिए नए अवसर खुलेंगे.
अमृत राज ने बोला कि इस पहल का उद्देश्य हस्तशिल्प उत्पादन के लिए टिकाऊ कच्चे माल को बढ़ावा देना है. उन्होंने कहा कि इस कार्य के लिए मेसर्स क्रिएटिव बी तकनीकी भागीदार और ईपीसीएच कार्यान्वयन भागीदार के रूप में शामिल हैं. उन्होंने आशा जताई कि ईपीसीएच भविष्य में उद्यमिता, बिक्री और बाजारों के विस्तार के लिए ऐसे कोशिश जारी रखेगा. उन्होंने जलकुंभी को, जिसे पहले एक नुकसानदायक जलीय खरपतवार माना जाता था, इस कार्यक्रम के माध्यम से एक मूल्यवान संसाधन में बदलने की बात कही.
ईपीसीएच के चेयरमैन दिलीप बैद ने बोला कि इस कौशल कार्यक्रम से 200 से अधिक कारीगरों को जलकुंभी के साथ काम करने का कौशल मिलेगा, जिसमें हस्तशिल्प उद्योग के लिए अपार संभावनाएं हैं. उन्होंने बोला कि इस पहल से न सिर्फ़ पर्यावरणीय चुनौतियों का निवारण होगा, बल्कि कारीगरों के लिए आय सृजन के नए अवसर भी पैदा होंगे, जिससे ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलेगा.
ईपीसीएच के अतिरिक्त कार्यकारी निदेशक राजेश रावत ने इस कार्यक्रम के आयोजन में मिले समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया और बिहार में कौशल विकास और निर्यात संवर्धन की अन्य पहलों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई. ईपीसीएच हिंदुस्तान से हस्तशिल्पों के निर्यात को बढ़ावा देने वाली एक प्रमुख संस्था है

