बिहार

मक्का अनुसंधान केंद्र कहीं शिफ्ट नहीं होगा : गिरिराज

बेगूसराय स्थित मक्का अनुसंधान केंद्र के कर्नाटक शिफ्ट करने से संबंधित केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक पत्र जारी किया था. 31 दिसंबर को शिवराज सिंह चौहान का लिखा पत्र सोमवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ.

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मामला तूल पकड़ने के बाद बेगूसराय के सांसद और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने आज बोला कि मक्का अनुसंधान केंद्र कहीं शिफ्ट नहीं होगा, बेगूसराय में ही रहेगा. गिरिराज सिंह के कार्यालय की ओर से जारी विज्ञप्ति में बोला गया है कि पिछले 2 दिनों से सोशल मीडिया पर मक्का अनुसंधान केंद्र बेगूसराय को स्थानांतरित किए जाने को लेकर अफवाहें फैलाई जा रही है.

इस संबंध में 17 जनवरी को ही कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मेरी टेलिफोनिक बात हो चुकी है. जिसमें मक्का अनुसंधान केंद्र को बेगूसराय में ही बनाए रखने की बात हुई थी. उन्होंने इसपर आश्वस्त किया था, इसके अतिरिक्त उन्होंने कृषि सचिव से भी इस संबंध में चर्चा की थी.

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान जी ने साफ रूप से आश्वासन दिया है कि इस संबंध में जो भी पत्र पहले जारी हुए थे, उसे अगले हफ्ते के अंदर खारिज कर दिया जाएगा. गिरिराज सिंह ने बिहार और बेगूसराय की जनता से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह या गलत सूचना पर ध्यान नहीं दें. निश्चिंत रहें कि मक्का अनुसंधान केंद्र बेगूसराय में ही रहेगा. मेरे सांसद रहते भरोसा रखे कि यह कहीं नहीं जाएगा.

शिवमोगा में शिफ्ट करने की स्वीकृति दी गई थी

दरअसल, 2024 में संसद सत्र के दौरान सांसद डाक्टर प्रभा मल्लिकार्जुन ने कृषि मंत्रालय से मक्का रिसर्च सेंटर को लेकर एक जानकारी मांगी थी. उन्होंने गवर्नमेंट से पूछा था कि क्या कर्नाटक में मक्का रिसर्च का कोई रीजनल स्टेशन खोलने की योजना है? यदि ऐसी योजना है तो क्या यह सेंटर दवनागेरे लोकसभा क्षेत्र में खोला जाएगा. क्योंकि यह क्षेत्र मक्के की खेती के लिए प्रसिद्ध है. इस क्षेत्र में सिंचित और असिंचित क्षेत्र दोनों में मक्का उगाया जाता है. इस लोकसभा क्षेत्र में इन्फ्रास्ट्रक्चर का अच्छा विकास हुआ है.

रीजनल सेंटर खोलने के लिए सरकारी जमीन भी मौजूद है.

सांसद के इस प्रश्न का उत्तर कृषि और किसान कल्याण राज्यमंत्री भगीरथ चौधरी ने दिया था. उन्होंने 10 दिसंबर 2024 को संसद में बोला था कि शिवमोगा में मक्का रिसर्च सेंटर लगाने की योजना है. 15वें वित्त आयोग अवधि (वित्त साल 2021-22 से 2025-26) के दौरान आईआईएमआर लुधियाना के बेगूसराय स्थित रीजनल स्टेशन को शिवमोगा में शिफ्ट करने की स्वीकृति दी गई है.

31 दिसंबर को शिफ्ट करने की बात कही गई थी

पिछले वर्ष दिसंबर में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी जानकारी दी थी. शिवमोगा के सांसद बीवाई राघवेंद्र को 31 दिसंबर को लिखे एक पत्र में शिवराज सिंह चौहान ने बोला था कि बेगूसराय स्थित आईआईएमआर सेंटर को शिवमोगा में शिफ्ट किया जाएगा. यह सेंटर आईसीएआर का ब्रांच होगा.

कृषि मंत्री ने लिखा था कि इस सेंटर के बनने से कर्नाटक में मक्का उत्पादन की क्षमता बढ़ जाएगी. इस सेंटर की सहायता से कर्नाटक में भरपूर मात्रा में मक्के का उत्पादन होगा, जिससे किसानों के साथ-साथ इससे जुड़े पेशे में लगे लोगों को फायदा मिलेगा.

इसकी जानकारी जब गिरिराज सिंह को मिली तो उस समय विदेश में थे और तुरंत उन्होंने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से बात करके बोला था कि बेगूसराय का क्षेत्र मक्का उत्पादन के लिए चर्चित है. इसलिए केंद्र को यहीं रहने दिया जाए, लेकिन जब यह लेटर वायरल हुआ तो मुद्दे ने काफी तूल पकड़ लिया. सोमवार को तेजस्वी यादव ने ट्वीट करके बड़ा प्रश्न उठाया था.

बिहार के किसानों से क्या परेशानी मोदी जी- तेजस्वी

तेजस्वी ने ट्वीट कर बोला था कि ‘आखिर बिहार और बिहार के किसानों से क्या परेशानी है पीएम मोदी जी, NDA और बीजेपी को’. भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (आईआईएमआर) के बेगूसराय स्थित क्षेत्रीय मक्का अनुसंधान एवं बीज उत्पादन केंद्र को नरेंद्र मोदी गवर्नमेंट ने कर्नाटक के शिवमोगा में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है.

वह भी तब जब नीलगाय और बाढ़ की परेशानी का सामना करते हुए भी मक्का उत्पादन में बिहार के किसान पूरे राष्ट्र में अव्वल हैं. पूर्णिया, कटिहार, भागलपुर, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया और समस्तीपुर जिलों के किसानों की आय का मुख्य साधन मक्का की खेती ही है. नरेंद्र मोदी गवर्नमेंट का यह निर्णय किसान और बिहार विरोधी है. बिहार के अन्नदाता इसका हिसाब करेंगे.

1996 में लोकसभा में मांग की थी

इधर, पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने बोला है कि क्षेत्रीय मक्का अनुसंधान केंद्र की स्थापना के लिए 1996 में लोकसभा में प्रश्न के द्वारा मैंने मांग की कि बिहार सबसे अधिक मक्का उत्पादन बेगूसराय में होता है. बेगूसराय क्षेत्र के लिए एक अनुसंधान केंद्र की स्थापना की जाए. जिसमें पश्चिम बंगाल, उड़ीसा को भी शामिल किया जाए और इसके लिए बेगूसराय का कुसमहौत कृषि क्षेत्र सबसे उपयुक्त है.

तात्कालीन कृषि मंत्री चतुरानन मिश्रा ने इस मांग को स्वीकार करते हुए बिहार गवर्नमेंट के कृषि मंत्री रामजीवन सिंह के साथ पटना राजभवन में बैठक की थी. उनके साथ विचार-विमर्श के साथ बिहार गवर्नमेंट ने अपने मंत्रिमंडल की बैठक में कुसमहौत और विशनपुर कृषि फार्म को स्थानांतरित कर हिंदुस्तान गवर्नमेंट ने उसका अधिग्रहण कर लिया. कृषि मंत्री चतुरानन मिश्रा ने ही 1997 में इसका शिलान्यास किया.

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