GNSU के प्रोफेसर डॉ. राजेश और छात्रों ने एक अनोखा मल्टीपर्पस ड्रोन किया तैयार
रोहतास। बिहार के में अध्ययन और नवाचार को बढ़ावा देते हुए प्रोफेसर डाक्टर राजेश और उनके विद्यार्थियों ने एक अनोखा मल्टीपर्पस ड्रोन तैयार किया है। यह ड्रोन पूरी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित है और इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे एक साथ कई कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। अब तक बाजार में मौजूद ड्रोन एक विशेष कार्य के लिए डिजाइन किए जाते थे, वहीं डाक्टर राजेश का यह ड्रोन एक से अधिक क्षेत्रों में उपयोगी साबित होगा।
AI-बेस्ड पावर ऑप्टिमाइजेशन तकनीक से है निर्मित
डॉ। राजेश ने कहा कि यह ड्रोन पूरी तरह से मॉड्यूलर डिजाइन पर आधारित है। यदि इसे खेती में उर्वरक या कीटनाशक का छिड़काव करने के लिए इस्तेमाल करना हो, तो इसमें बस फर्टिलाइज़र स्प्रे मशीन को जोड़ना होगा और यह उसी रूप में काम करेगा। इसी तरह यदि इसे निगरानी, मेडिकल सप्लाई, वीडियो शूटिंग या अन्य तकनीकी कामों में लगाना हो, तो आवश्यकता के मुताबिक भिन्न-भिन्न उपकरण जोड़कर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। यही इस ड्रोन की सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर ड्रोन की सबसे बड़ी चुनौती उसकी बैटरी क्षमता होती है, लेकिन इस ड्रोन में AI-बेस्ड पावर ऑप्टिमाइजेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे इसकी बैटरी अधिक समय तक काम करती है। इसके अतिरिक्त इसमें एक सेकेंडरी बैटरी भी शामिल की गई है, जिससे उड़ान की अवधि और भी बढ़ जाती है।
मेक इन इण्डिया का रखा गया है ख्याल
डॉ। राजेश ने कहा कि यह ड्रोन ‘मेक इन इंडिया’ सोच को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसमें 50 फीसदी से अधिक पुर्जे हिंदुस्तान में ही निर्मित हैं। खास बात यह है कि इसकी बैटरी पैक भी उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर स्वयं तैयार की है। इस ड्रोन को यूनिवर्सिटी के इनक्यूबेशन सेंटर में बनाया गया है। डाक्टर राजेश ने कहा कि इस सेंटर का भारतीय इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) मंडी के साथ एमओयू साइन है। इसके अनुसार कोई भी विद्यार्थी या युवा अपना स्टार्टअप आइडिया लेकर आता है, तो सेंटर उसकी हर स्तर पर सहायता करता है और IIT मंडी के योगदान से उस आइडिया को साकार करने में योगदान प्रदान करता है।
इस मल्टीपर्पस ड्रोन का प्रोटोटाइप तैयार करने में लगभग 30 हजार की लागत आई है। अब टीम इसके और उन्नत संस्करण पर काम कर रही है, ताकि इसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए तैयार किया जा सके। आने वाले समय में यह ड्रोन कृषि, सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और स्वास्थ्य जैसे कई क्षेत्रों में क्रांतिकारी किरदार निभा सकता है।

