ठेला चालक का पुत्र बीपीएससी पास कर बना शिक्षक, बोले…
यदि कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तो जीवन में आने वाला हर कठिन काम सरल हो जाता हैं। छपरा के विकास यादव ने इस कहावत को सच करके दिखाया है। विकास की काहानी कुछ ऐसी है कि सुनकर आप भी भावुक हो जाएंगे। विकास की पढ़ाई से लेकर सरकारी जॉब पाने का यात्रा सरल नहीं रहा। इसके लिए संघर्ष के दौर से भी गुजरना पड़ा। विकास के पिता ददन राय एक मजदूर हैं और परिवार का भरण-पोषण और बच्चों की पढ़ाई के लिए दिन-रात मेहनत करते रहे। ददन राय कभी ठेला खींचते हैं तो कभी घर के सदस्यों के पेट भरने के लिए मजदूरी करते हैं। बारिश में छठ टपकता है तो कभी इधर तो कभी उधर छिपकर रात गुजारने को विवश होना पड़ता है। इन परेशानियों के बावजूद हार नहीं मानी। यही वजह कि पिता के सपने को साकार करते हुए विकास ने बीपीएससी की परीक्षा में सफल होकर शिक्षक बन गए।

ददन राय ने कहा कि प्रारम्भ से ही अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए कड़ी मेहनत करता रहा। जिसका रिज़ल्ट अब मुझे मिला है और पुत्र विकास यादव ने अपने पिता के मेहनत को जाया नहीं होने दिया और अब सरकारी शिक्षक बन गए हैं। उन्होंने कहा कि जब इस बात की सूचना मिली तो बहुत खुश हुआ और परिवार में उत्सव जैसा माहौल था। उन्होंने कहा कि जब दूसरे राज्य में काम करने के लिए गया तो लोगों के बच्चे को पढ़ते देख मन में आइडिया आया कि अपने बच्चों को भी पढ़ाऊंगा। उसके बाद से और मेहनत करने लगा और बच्चों की हर आवश्यकता पूरा करने की प्रयास करते रहा। पिता का संघर्ष और पुत्र का मेहनत रंग लाई। अब बेटा बीपीएससी पास कर सरकारी शिक्षक बन गया है।
पिता के संघर्ष का फल
विकास यादव ने कहा कि इससे पहले नियोजित शिक्षक के रूप में सेवा दे रहा था। हालांकि, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता रहा। बीपीएससी में इस बार कामयाबी मिल गई और 10+2 विद्यालय में सरकारी शिक्षक के पद पर जॉब मिल गई। उन्होंने कहा कि कोचिंग के बजाय घर पर ही यूट्यूब पर पढ़ाई करता था। पढ़ाने के लिए पिता को काफी संघर्ष करना पड़ा। पिता का संघर्ष और मेहनत देखकर आंख में आंसू भी आ जाते थे। पिता के संघर्ष को देखकर ठान लिया था कि उनके मेहनत और बलिदान को विफल नहीं होने देंगे। पिता के आशीर्वाद से हीं शिक्षक बन पाया हूं। उन्होंने कहा कि अब घर चलाने में भी पिता का योगदान कर पाएंगे।

