इस बाजार में घुमक्कड़ी काटने के फैन थे अंग्रेज, पूरे देश में नहीं मिलेगा इससे सस्ता और बेहतर सामान
एक समय ऐसा था जब पटना व्यापार का एक प्रमुख केंद्र हुआ करता था। राजा महाराजाओं के जमाने से लेकर अंग्रेजों तक, यहां के बाजारों की चर्चा पूरी दुनिया में होती थी। पटना जंक्शन के पास स्थित न्यू बाजार इसका गवाह रहा है। इस बाजार का इतिहास अंग्रेजी हुकूमत के जमाने का है। कहा जाता है कि इस बाजार को अंग्रेजों ने ही 1929 में बसाया था।

उस समय यह थोक बाजार हुआ करता था। बाजार में अनाज, फल, सब्जी, कपड़े और घरेलू समानों की दुकानें उपस्थित थी। अंग्रेज साप्ताहिक शॉपिंग करने के लिए इस बाजार का रुख करते थे। उस समय दानापुर छावनी के अधिकारी भी यहीं से शॉपिंग करते थे। बदलते समय के साथ इस बाजार का आकार भी बदलने लगा। यह महावीर मंदिर से लेकर जीपीओ गोलंबर तक फैल गया।
आजादी के बाद इस बाजार में कई खुदरा दुकानें भी खुलने लगीं। पटना में तेजी से व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने लगी। 1952 तक इस बाजार में दर्जनभर नयी दुकानें स्थापित हो गई। इसका नाम भी विजय मिनी बाजार रख दिया गया। बदलते समय के साथ अब फुटपाथी दुकानदारों ने इसको न्यू बाजार का नाम दे दिया।
आज की तारीख में इस न्यू बाजार में सुई से लेकर घरेलू इस्तेमाल की सारी समानों की बिक्री होती है। यहां कई दुकानें तो ऐसी हैं जहां घर की आवश्यकता की सारी सामग्री मिल जाती है। विदेशों से इंपोर्ट कराए गए ड्रायफ्रूट्स, बिस्किट्स, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू सामान सहित हर एक चीज इस बाजार में मिल जाती है। मूल्य भी दूसरे बाजारों से एकदम कम होती है।
यह बाजार थोक और खुदरा दोनों के लिए बिहार का चर्चित बाजार है। राज्य के कोने-कोने से लोग इस बाजार में शॉपिंग करने के लिए आते हैं। व्यापारियों की भी यह फेवरेट स्थान है। यहां हिन्दू और मुसलमान दोनों समुदाय के लोग बराबर भागीदारी के साथ व्यापार करते हैं।
त्योहारों में तो इस बाजार में पैर रखने की भी स्थान नहीं होती है। केवल खरीदारी ही नहीं यहां भोजन, लस्सी, मिठाई, फूल-फल, सब्जी सहित कई दुकानें हैं। पटना जंक्शन पर आने वाले लोग इस बाजार में आकर जलपान करना नहीं भूलते। यहां कई तरह के लजीज व्यंजन मिलते हैं, जो लोगों को आकर्षित करते हैं।

