JDU ने जारी की पहली लिस्ट, जानें किस-किस को मिला मौका…
JDU ने कैंडिडेट्स की पहली लिस्ट जारी कर दी है. पहली लिस्ट में 57 कैंडिडेट्स के नाम की घोषणा की गई है. इस लिस्ट में बाहुबली अनंत सिंह का भी नाम है. उन्हें मोकामा से टिकट मिला है.
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2025 के विधानसभा चुनाव में JDU 101 सीटों पर चुनाव लड़ रही है. 2020 के चुनाव में JDU 115 सीटों पर चुनाव लड़ी थी. इसमें से 43 सीटों पर जीत हासिल की थी.
नीतीश का मैसेज- बीजेपी से आगे निकलना है
JDU के पास टिकट के दावेदारों के करीब 500 बायोडाटा आए. उन्होंने नेताओं को मैसेज दिया कि इस बार सबसे बड़ी पार्टी बननी है.
2020 के चुनाव में JDU 43 सीटें जीतकर RJD और बीजेपी के बाद तीसरे नंबर पर रही थी.
JDU के गढ़ नालंदा पर फोकस
नीतीश कुमार का गृह जिला नालंदा JDU का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता है. यहां विधानसभा की 7 सीटें हैं, जिनमें से 5 पर JDU के विधायक हैं. बिहार शरीफ सीट बीजेपी के पास है. सीट शेयरिंग से पहले हुई मीटिंग में भी नालंदा पर फोकस रहा. नीतीश कुमार वहां से आए नेताओं से खासतौर से मिले. हर ब्लॉक अध्यक्ष से उन्होंने अलग कमरे में मुलाकात की थी.
नालंदा की इस्लामपुर और हिलसा सीट से आए नेताओं को अधिक समय दिया. 2020 के चुनाव में इस्लामपुर सीट पर JDU को 3,698 वोट से हार मिली थी. यहां से RJD के राकेश रौशन जीते थे. वहीं हिलसा सीट जीत पर JDU कैंडिडेट हारते-हारते बचे थे. पार्टी यहां केवल 12 वोट से जीती थी.
नीतीश के नेतृत्व में NDA लड़ेगा चुनाव
2025 के चुनाव में NDA का साफ बोलना है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व और चेहरे पर ही विधानसभा का चुनाव लड़ा जाएगा. आरंभ में NDA में नीतीश को लेकर थोड़ी असमंजस की स्थिति थी, लेकिन अब फिर भाजपा के बड़े नेताओं ने नीतीश के चेहरे पर मुहर लगा दी.
जेडीयू भी नीतीश को ही सीएम चेहरा मान रही है और उनका नारा है- ‘2025 से 2030, फिर से नीतीश.’ इसके अतिरिक्त चिराग पासवान की पार्टी LJP(R) और HAM पार्टी के सुप्रीमो जीतन राम मांझी ने भी नीतीश के चेहरे पर चुनाव लड़ने की सहमति जताई है.
1)। मोदी गवर्नमेंट में पहली बार JDU-BJP साथ चुनाव लड़ी: मोदी गवर्नमेंट बनने के बाद पहली बार 2020 में JDU-BJP एकसाथ चुनाव लड़ी. इससे पहले 2015 के चुनाव में JDU महागठबंधन का हिस्सा थी, लेकिन 2017 में JDU ने महागठबंधन का साथ छोड़ दिया और NDA गठबंधन में शामिल हुई.
2)। पहली बार माले को 29 सीटें मिलीं: 2020 के महागठबंधन में RJD, कांग्रेस, और वाम दल (CPI, CPM, CPI(ML)) शामिल थे. ये पहली बार था जब वाम दलों को महागठबंधन में इतनी बड़ी हिस्सेदारी (29 सीटें) मिली.
3)। तेजस्वी का नेतृत्व: RJD के तेजस्वी यादव महागठबंधन के सीएम पद के दावेदार थे. तेजस्वी ने 10 लाख सरकारी नौकरियों का वादा किया, जो अभियान का मुख्य मामला बना. चुनाव में RJD 2000 विधानसभा चुनाव के बाद 2020 में सबसे बड़ी पार्टी बनी.
4)। महागठबंधन में सीट शेयरिंग और विवाद: RJD को 144, कांग्रेस पार्टी को 70, और वाम दलों को 29 सीटें मिलीं. हालांकि, विकासशील आदमी पार्टी (VIP) और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) ने सीट बंटवारे से नाराज होकर गठबंधन छोड़ दिया.
तेजस्वी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान VIP नेता मुकेश सहनी उठ गए और कहा- मेरी पीठ में छुरा मारा गया. मुझे डिप्टी सीएम का लालच देकर महागठबंधन में शामिल किया गया, लेकिन हमें उचित सम्मान नहीं मिला, इसलिए हम NDA के साथ जाएंगे.“
इसके उत्तर में तेजस्वी ने कहा, “महागठबंधन में सिर्फ़ वही रहेंगे जो बिहार के भलाई में काम करेंगे. जो लोग अवसरवादी हैं, उनके लिए कोई स्थान नहीं.“
5)। लेफ्ट की पार्टियों का बेहतर प्रदर्शन: CPI(ML) ने 19 में से 12 सीटें जीतकर बेहतर प्रदर्शन किया. यह वाम दलों का बिहार में दशकों बाद सबसे अच्छा प्रदर्शन था. वाम दलों ने भूमिहार और दलित मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत की.
कोविड के दौरान चुनावः 2020 का चुनाव Covid-19 महामारी के दौरान हुआ. महागठबंधन ने प्रवासी श्रमिकों की समस्याओं को जोर-शोर से उठाया, जो लॉकडाउन में बिहार लौटे थे. इस मामले ने ग्रामीण क्षेत्रों में गहरी छाप छोड़ी.

