बिहार
जानें, बीते हुए सालों में कितना बदला बिहार, सामने आया ये दृश्य…
वर्ष 1893 आरा जिले का एक लड़का लंदन में बैरिस्टरी की पढ़ाई पूरी करके लौट रहा था. रास्ते में एक अंग्रेज वकील ने उनसे परिचय पूछा, तब उन्होंने अपना नाम बताते हुए स्वयं को बिहारी बताया. सहयात्री ने आश्चर्यचकित होते हुए पूछा- कौन सा बिहार, हिंदुस्तान में ऐसे किसी प्रांत के बारे में तो नहीं सुना है. यही प्रश्न डाक्टर सिन्हा को चुभ गया और उन्होंने पृथक बिहार गढ़ने का निश्चय किया. ये शख्स कोई और नहीं संविधान सभा के अस्थायी और अंतरिम अध्यक्ष सच्चिदानंद सिन्हा थे. बिहार जहां की फिजाओं में महावीर और बुद्ध की वाणी की गूंज है. जहां की मिट्टी ने आचार्य चाणक्य जैसे नीति विषारद को जना.

WhatsApp Group
Join Now
जहां बहती गंगा की रवानी है. गुरु गोविंद सिंह, जय प्रकाश नारायण की गौरवशाली कहानी है. जी हां, हम बात बिहार की कर रहे हैं. बिहार केवल एक राज्य नहीं बल्कि संस्कृति, ज्ञान और पराक्रम की भूमि है. जहां एक ओर नालंदा और विक्रमशिला ज्ञान की परंपरा से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक बिहार ने हिंदुस्तान के इतिहास में कई स्वर्णिम अध्याय लिखे. वहीं हम कह सकते हैं कि लोकगीतों के गूंजन, मिथिला की पेटिंग और छठ पूजा की आध्यात्मिक आभा ने बिहार की पहचान को अनमोल बनाया है. बिहार ने ज्ञान, राजनीति और इतिहास में अमिट छाप छोड़ी है. जहां से सम्राट अशोक का साम्राज्य फला फूला और जहां से गौतम बुद्ध से शांति और करुणा का संदेश दिया. आज अपने निवासियों के खराब सिविक सेंस के लिए बदनाम हो रहा है. एक समय में सबसे टैलेंट विद्यार्थियों को देने वाला बिहार आज मजदूर बनाने की फैक्ट्री बन गया है. बिहार वो स्टेट है जो उत्तर प्रदेश के बाद राष्ट्र को सबसे अधिक आईएएस देता है. दुनिया के दो बड़े धर्म जैन और बुद्ध इनके प्रमुख जगह बिहार से हैं. जिसने दुनिया को जीरो दिया या जो दुनिया का प्रथम राष्ट्रपति बना उन दोनों का जन्म बिहार में है. बिहार की चर्चा आज इसलिए भी कर रहा हूं क्योंकि कई ऐसे हैं जिन्हें लगता है कि बिहार पिछड़ेपन की पहचान है. बिहार को राष्ट्र से निकाल दिया जाए तो राष्ट्र विकसित कहलाएगा. आज बिहारी एक गाली की तरह इस्तेमाल होता है.
बिहारी भगाओ राष्ट्र बचाओ?
आपने ऐसे कई वीडियो देखे होंगे जिसमें बिहार और बिहारी लोगों के लिए सम्मानजनक शब्द इस्तेमाल नहीं किए जाते. बिहार जो कभी प्राचीन हिंदुस्तान की सांस्कृति और बौद्धिक राजधानी था. आज हिंदुस्तान के सबसे पिछड़े राज्यों में से एक माना जाता है. बिहार के केंद्रीय विद्यालय में पोस्टिंग दिए जाने के बाद धावा प्रवाह गालियों की बौधार करने वाली मॉर्डन शिक्षिका का वीडियो तो आपने खूब देखा होगा. यदि नहीं देखा तो हम आपको बता देते हैं कि इन मैडम के मन में बिहार के प्रति इतनी घृणा रही कि वो कहती हैं कि बिहार की वजह से राष्ट्र विकसित नहीं बन पाया. बिहारियों को तो सिविक सेंस हैं ही नहीं. जिस दिन बिहार को राष्ट्र से हटा दिया जाएगा. राष्ट्र डेवलप कंट्री बन जाएगा. आसान शब्दों में कहें तो मैडम बोलना चाहती थी कि बिहार राष्ट्र का सबसे घटिया और पीछिड़ा क्षेत्र है. अब इसे अज्ञानता कहे, पूर्वाग्रह या सोशल मीडिया पर वायरल होने की निंजा तकनीक लेकिन जब मैडम ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट किया तो ये बात बिहारियों को और बिहार से प्यार करने वाले देशवाशियों को रास नहीं आई.
कैसे बना बिहार
22 मार्च 1912 को बिहार को बंगाल प्रेसीडेंसी से अलग कर एक स्वतंत्र राज्य का दर्जा दिया गया था. तब से हर वर्ष 22 मार्च को बिहार दिवस के रूप में मनाया जाता है. बेमिसाल बिहार अपना 113 वां दिवस इंकार रहा. बिहार दिवस उत्सव केवल बिहार के जन्म दिवस का ही नहीं बल्कि हर बिहारी में बसे बिहारिपन का भी उत्सव है. ये समय हमारी प्राचीन और समृद्ध विरासत के गान पर झूमने का है, जिसक रंग में पूरा प्रदेश झूमेगा. लेकिन इसके साथ एक प्रश्न भी उठता है, जो सीने में चुभता है. कितना बदला बिहार? कितने बदले बिहारी?
एक बिहारी को दहेज में मिला था पाक अफगानिस्तान
ये कहानी सिकंदर के आक्रमण के समय की है. सिकंदर यूनान से आया था. उसने 326 ईसा पूर्व में हिंदुस्तान पर धावा किया लेकिन वो व्यास नदी को पार नहीं कर पाया. सिकंदर का सेनापति सेल्युकस निकेटर था. वो बाद में हिंदुस्तान आया और व्यास नदी को पार कर गया. उस समय मगध पर चंद्रगुप्त मौर्य का शासन था. चंद्रगुप्त के पीएम चाणक्य थे. चाणक्य ने अपनी नीतियों से सिकंदर को लौटने के लिए विवश कर दिया. चंद्रगुप्त मौर्य के पास हाथियों की एक बड़ी सेना थी. सेल्युकस को जब ये पता चला, तो वो भी हाथियों के साथ लड़ने आया. चाणक्य ने चंद्रगुप्त को राय दी कि वो हाथियों के सामने घोड़ों की सेना उतार दें. उन्होंने बारिश के मौसम का प्रतीक्षा किया और उस स्थान पर युद्ध प्रारम्भ किया जहां पानी भर जाता था. पानी भरने से हाथियों को चलने में कठिनाई होने लगी. घोड़े हाथियों पर भारी पड़ने लगे. सेल्युकस रथ लेकर लड़ने आया था. चंद्रगुप्त की सेना में खुले घोड़े थे. सेल्युकस युद्ध में फंस गया. ऐसा बोला जाता है कि यदि लड़ाई एक-दो दिन और चलती तो वह मारा जाता. इसलिए, सेल्युकस ने चंद्रगुप्त मौर्य से अपनी बेटी हेलन की विवाह करने का निर्णय किया. उसने दहेज में एरिया (हेरात), अराकोसिया (कंधार), जेड्रोसिया (मकरान/बलूचिस्तान) और पेरोपेनिसडाई (काबुल) का क्षेत्र दे दिया. इस तरह, पूरा पाक और अफगानिस्तान चंद्रगुप्त मौर्य को दहेज में मिला था.
कितना विकास किसका विकास?
बिहार में पुरानी कहावत है जब ले ऊंच होइए, तब ले नीच देखिए यानी जब ऊंचाई पर पहुंचो तभी नीचे की गहराई समझ आती है. बिहार की ऊंचाई उसके अतीत में थी. लेकिन आज वो नीचे की गहराई में खड़ा है. बिहार का विकास एक पहेली की तरह है. एक ओर, पिछले दो दशकों में सड़कों का जाल बिछा है. बिजली गांव-गांव तक पहुंचीी है. साक्षरता रेट में गौरतलब सुधार हुआ है. 2001 में जहां ये 47% थी. वहीं 2021 lk /s 79.7% तक पहुंच गई है. बिहार की अर्थव्यवस्था भी तेजी से बढ़ रही है. 2022-23 में इसकी विकास रेट 10.43 रहही. जो राष्ट्रीय औसत 7.2% से कहीं अधिक है. लेकिन बिहार की जरबरत अब रोटी, कपड़ा और मकान से आगे की है.