बिहार

जानें, किस बड़े पचड़े में बाहर आया विभा देवी और प्रकाशवीर का नाम…

पटना बिहार की राजनीति में इन दिनों चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गए हैं आरजेडी के दो विधायक- नवादा से विभा देवी और राजौली (SC) से प्रकाश वीर पीएम मोदी के कार्यक्रम में दोनों नेताओं के मंच पर उपस्थित रहने ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है चुनावी वर्ष में एनडीए के मंच पर आरजेडी के विधायकों की मौजूदगी को पार्टी के लिए बड़ा झटका बताया जा रहा है प्रश्न यह है कि आखिर ये दोनों विधायक कौन हैं और इन्होंने 2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को कितने अंतर से हराया था?

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नवादा से विधायक विभा देवी

विभा देवी, राजद के टिकट पर 2020 के विधानसभा चुनाव में नवादा सीट से विजयी हुईं इस चुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार श्रवण कुमार को शिकस्त दी और 26,310 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की विभा देवी का सियासी यात्रा काफी दिलचस्प रहा है वह राजवल्लभ यादव की पत्नी हैं पति के कारावास जाने के बाद वह राजनीति में सक्रिय हो गयीं नवादा जैसे अहम क्षेत्र से मजबूत जीत दर्ज करने के बाद वे लालू-तेजस्वी कैंप की अहम विधायक मानी जाती हैं

राजौली से विधायक प्रकाश वीर

दूसरी ओर, राजौली विधानसभा क्षेत्र (SC सीट) से आरजेडी विधायक प्रकाश वीर भी 2020 में पार्टी को जीत दिलाने में सफल रहे उन्होंने बीजेपी के उम्मीदवार कन्हैया कुमार को मात दी और 12,593 वोटों के अंतर से यह सीट अपने नाम की प्रकाश वीर लंबे समय से आरजेडी से जुड़े रहे हैं और क्षेत्रीय स्तर पर उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है

पीएम मोदी के मंच पर दिखे दोनों विधायक

बीते दिनों प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी के गया कार्यक्रम में विभा देवी और प्रकाश वीर मंच पर नजर आए प्रोटोकॉल के अनुसार क्षेत्रीय विधायकों को आमंत्रण दिया जाता है, लेकिन सियासी रूप से यह तस्वीर आरजेडी के लिए असहज मानी जा रही है मंच पर जहां बीजेपी नेताओं ने आरजेडी और इण्डिया गठबंधन पर धावा बोला, वहीं आरजेडी के दोनों विधायक उसी मंच पर उपस्थित रहे

क्या है सियासी संदेश?

चुनावी वर्ष में आरजेडी के दो विधायकों का एनडीए के मंच पर नजर आना बड़ा संकेत बताया जा रहा है यह साफ है कि दोनों विधायक पहले से पार्टी से नाराज़ बताए जाते रहे हैं ऐसे में यह प्रश्न उठना लाज़मी है कि क्या आने वाले समय में वे सियासी पाला बदलेंगे या फिर इसे केवल एक ‘औपचारिक उपस्थिति’ के तौर पर देखा जाए 2020 में भाजपा को पराजित करने वाले ये दोनों विधायक अब सत्तारूढ़ गठबंधन के मंच पर नजर आए हैं यही वजह है कि उनके इस कदम को केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में बड़े परिवर्तन के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है

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