प्रवासी बिहारियों के लिए पार्टियों की तरफ से बड़ा तोहफा, जानें डिटेल में…
बिहार चुनाव की प्रक्रिया 22 नवंबर से पहले हर हाल में पूरी की जानी है, क्योंकि इस तारीख तक नयी गवर्नमेंट का गठन हो जाना है। जाहिर है इसको लेकर चुनाव आयोग ने बड़ी तैयारी की है। लेकिन, सबसे बड़ी बात सियासी दलों की है जिन्होंने अपने समर्थक मतदाताओं के लिए खास तैयारियां की हैं जो ध्यान देने वाली बात है। दरअसल, इस बार का बिहार चुनाव त्योहारों के मौसम में है और दशहरा बीत चुका है। अब सबका ध्यान आगामी दिवाली और छठ पर्व पर है।

ऐसे में बिहार के बाहर रहने वाले प्रवासी बिहारियों का आगमन बड़ी संख्या में होने वाला है। इसको देखते हुए सियासी दलों ने प्रवासी बिहारियों को ध्यान में रखकर अपने-अपन पिटारे में कई वादे कर रखे हैं। एनडीए खेमे के भारतीय जनता पार्टी, जनता दल यूनाइटेड और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने भिन्न-भिन्न घोषणाएं कर रखीं हैं। वहीं, महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस पार्टी और वाम दलों ने भी अपनी ओर से कई वादे किए हैं। जबकि, प्रशांत किशोर की जनसुराज और असदुद्दीन ओवैसी के एआईएमआईएम ने भी प्रवासी बिहारियों को ध्यान में रखकर योजनाओं के वादे किए हैं।
दरअसल, सभी दलों का माना है कि बिहार विधानसभा चुनाव त्योहारों के बीच होने से प्रवासी बिहारियों का घर वापसी एक बड़ा फैक्टर बनेगी। दिवाली (23 अक्टूबर) और छठ (28 अक्टूबर) के दौरान लाखों प्रवासी लौटेंगे जो सियासी दलों के लिए सुनहरा अवसर है। एनडीए, महागठबंधन, जन सुराज और एआईएमआईएम सब प्रवासियों को निशाना बना रहे हैं। रोजगार, पलायन रोकना और विकास के वादे कर दलों ने अपनी रणनीति तैयार की है। खास बात यह है कि सियासी दल इसे वोट बैंक के रूप में देख रहे हैं। बेरोजगारी और पलायन मुख्य मामले हैं जिसपर सियासी दल रोजगार सृजन के बड़े-बड़े वादे कर रहे हैं। एनडीए ने विशेष अभियान प्रारम्भ किया है, जबकि विपक्ष पलायन रोकने पर बल दे रहा है।
एनडीए की रणनीति और वादे
एनडीए में शामिल भाजपा, जेडीयू और एलजेपी ने 3 करोड़ प्रवासियों को टारगेट किया है। बीजेपी का ‘एक हिंदुस्तान श्रेष्ठ भारत’ अभियान चल रहा है जिसमें प्रवासियों से डेटा इकट्ठा कर मतदान के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जेडीयू के नीतीश कुमार ने 1 करोड़ नौकरियां देने का वादा किया है, जबकि बीजेपी बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन पर फोकस कर रही है। एलजेपी के चिराग पासवान ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ नारा दे रहे हैं।
एनडीए का अभियान -‘लौटना है वोट देना है’
इसके अतिरिक्त बीजेपी और उसके सहयोगी जदयू, लोक जनशक्ति पार्टी ने कई राज्यों में बसे बिहारियों तक पहुंचने की रणनीति बनाई है। इन दलों ने 150 जिलों में प्रवासी बिहारियों का डेटा एकत्र करने के लिए अगेंट नियुक्त किए हैं। वे उन्हें निमंत्रण भेजेंगे कि वे अपने चुनावी अधिकार का प्रयोग करने लौटें। इसके अतिरिक्त विशेष बस सेवा, आवास सुविधा और यात्रा सब्सिडी जैसी घोषणाएं भी शामिल हैं।
महागठबंधन का पलायन रोकने का प्लान
महागठबंधन में आरजेडी, कांग्रेस पार्टी और वाम दल प्रवासियों को आकर्षित करने के लिए ‘पलायन रोक, जॉब दो’ यात्रा चलाई है। तेजस्वी यादव ने वादा किया है कि उनकी गवर्नमेंट में कोई बिहारी को जॉब के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। कांग्रेस पार्टी ने पांच लाख रिक्त पद भरने और समान वेतन की मांग उठाई है। वाम दलों ने भी सामाजिक इन्साफ और रोजगार पर बल दिया है।
महागठबंधन- कैश और कल्याण के वादे
राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस पार्टी और वाम दलों ने प्रवासी बिहारियों को सीधे फायदा देने की प्रतिबद्धताएं की हैं। इनमें संभावित नकद योजनाएं, रोजगार गारंटी एवं क्षेत्रीय विकास प्रोत्साहन शामिल हैं। ये पार्टियां यह तर्क देती हैं कि जो लोग दूर रहते हुए भी राज्य से जुड़े हैं, उनकी आस्था और संरक्षण उनकी जीत का हिस्सा बनना चाहिए।
जन सुराज की नयी पहल, सहायता का वादा
प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी सभी 243 सीटों पर लड़ रही है। जनसुराज पार्टी ने प्रवासियों को ‘सेवा पैकेज’ देने की बात की है। इसके अनुसार स्वास्थ्य, शिक्षा और संचार सेवा को अग्रिम पहुंच देना पार्टी की अहमियत है। प्रवासियों के लिए स्व-रोजगार कर्ज 4% ब्याज पर, भूमि सुधार और युवा सशक्तिकरण के वादे किए हैं। प्रशांत किशोर ने बोला है कि बिहार में कोई बड़ी फैक्ट्री न खुलने से पलायन हो रहा है और उनकी गवर्नमेंट पहले 100 दिनों में परिवर्तन लाएगी। पार्टी मुसलमानों, स्त्रियों और ईबीसी को टिकट देने पर फोकस कर रही है।
एआईएमआईएम का सीमांचल फोकस
असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने महागठबंधन से गठबंधन की प्रयास की, लेकिन असफल रही। अब स्वतंत्र रूप से उसकी सीमांचल क्षेत्र पर नजर है जहां प्रवासी मुसलमान समुदाय कारगर संख्या में हैं। ओवैसी ने सीमांचल विकास बोर्ड की मांग की है और बोला कि निवेश गुजरात जा रहा है, जबकि बिहारी मजदूर वहां काम करते हैं। पार्टी पिछड़े क्षेत्रों के विकास पर बल दे रही है। एआईएमआईएम ने विशेष रूप से अल्पसंख्यक समुदाय के प्रवासियों के लिए सामाजिक कल्याण योजनाओं का प्रस्ताव रखा है।
बिहार चुनाव पर त्योहारों का चुनावी प्रभाव
चुनाव छठ के बाद नवंबर में है जिससे प्रवासियों की वापसी आसान होगी। ऐसे में सभी दल वादे कर रहे हैं। बता दें कि अभी पार्टियों ने घोषणा पत्र जारी नहीं की है, लेकिन वादों का पिटारा खुल चुका है। पलायन रोकना सभी का मुख्य एजेंडा है।ऐसे में ये नेता मानते हैं कि यदि चुनाव के पहले उन्हें ही लुभाया जाए, तो उनका वोट बैंक मजबूत होगा। प्रवासी वोटरों का रुझान विकास और रोजगार पर निर्भर करेगा। सभी जानते हैं कि प्रवासी बिहारियों के वोट से चुनावी समीकरण बदल सकते हैं।

