मुजफ्फरपुर के 48 वर्षीय मुकेश ठाकुर एक ऐसे शिक्षक है जो अंधे होते हुए भी हजारों छात्रों को पढ़ाये
प्रतिवर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाता है। हिंदुस्तान के पूर्व राष्ट्रपति डाक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म-दिवस के अवसर पर शिक्षकों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए भारतभर में शिक्षक दिवस 5 सितंबर को मनाया जाता है। ‘गुरु’ का हर किसी के जीवन में बहुत महत्व होता है। समाज में भी उनका अपना एक विशिष्ट जगह होता है।
सर्वपल्ली राधाकृष्णन शिक्षा में बहुत विश्वास रखते थे। वे एक महान दार्शनिक और शिक्षक थे। उन्हें अध्यापन से गहरा प्रेम था। एक आदर्श शिक्षक के सभी गुण उनमें विद्यमान थे। इस दिन समस्त राष्ट्र में हिंदुस्तान गवर्नमेंट द्वारा श्रेष्ठ शिक्षकों को पुरस्कार भी प्रदान किया जाता है।
मुजफ्फरपुर ज़िला के सकरा थाना क्षेत्र के सुंदरपुर गांव निवासी राम प्रसाद ठाकुर के 48 वर्षीय पुत्र मुकेश ठाकुर एक ऐसे शिक्षक है, जो अंधे है। फिर भी हजारों विद्यार्थियों को पढ़ा चुके है। साल 1996 से वो बच्चों को पढ़ा रहे है।
जहां, 1995 में उनका आंख लाल हो गया। उनको लगा कि आंख आया हुआ है। जिस कारण वो नजर अंदाज कर दिए। कुछ दिनों के बाद उनकी कठिनाई बढ़ने लगी। जिसके बाद वो चिकित्सक से संपर्क किए। तब चिकित्सक ने कहा कि उनके आंख का नस सुख रहा है। इसका हिंदुस्तान में उपचार नहीं है। फिर भी मुकेश ने हौसला नहीं हारे। वो अपना जमीन बेच कर दिल्ली, उत्तरप्रदेश समेत कई जगहों पर अपना उपचार करवाए लेकिन उनकी आंख की रोशनी नहीं बच पाई।
1996 से बच्चों को पढ़ा रहे है
वर्ष 1996 में गांव के ज्यादातर बच्चे दसवीं के परीक्षा में गणित में फेल हो गए। जिसके बाद इन्होंने बच्चो को पढ़ने का मुहिम प्रारम्भ किया। 1997 में इनके पास कुछ बच्चे पढ़ने आए। जब परीक्षा हुआ तो सभी बच्चे गणित में पास हो गए। इसके बाद इनका इर्द-गिर्द के क्षेत्रों में इनका नाम हो गया। इर्द-गिर्द के कई गांवों से बच्चे इनके पास गणित पढ़ने आने लगे। आज तक करीब दस हजार से अधिक बच्चों को पढ़ा चुके है। इनसे पढ़े हुए बच्चे आज कई सरकारी पद पर कार्यरत है। मुकेश 1993 में दसवीं पास किए और 1995 में बारहवीं पास किए।
बच्चे अपने मन से देते है फीस
शिक्षक मुकेश ठाकुर का बोलना है कि वो नॉर्मली 150 रुपया प्रति बच्चा फीस के रूप में लेते है। लेकिन कई बच्चों ऐसे भी आते है, जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहती है। मुकेश ठाकुर ऐसे बच्चों से कोई फीस नहीं लेते है।
तीन भाइयों में सबसे बड़े है मुकेश
मुकेश ठाकुर के पिता राम प्रसाद ठाकुर पेशे से किसान है। मुकेश तीन भाई है। तीनों भाइयों में मुकेश सबसे बड़े है। दोनों छोटे भाई सूरत में एक निजी कंपनी में काम करते है। मुकेश आजतक विवाह नहीं किए है। घर के खर्चो में भी वो काफी सहायता करते है।

