बीजेपी से जुड़कर कितने सफल हो पाएंगे नागमणि, किसी पार्टी ने नहीं दिया भाव…
बिहार में कोइरी-कुशवाहा जाति के बड़े नेता स्वर्गीय जगदेव प्रसाद के बेटे और पूर्व केंद्रीय मंत्री नागमणि ने भाजपा ज्वाइन कर लिया है। नागमणि का भाजपा में शामिल होना थोड़ा दंग करता है, वह भी तब जब छह महीने पहले ही उन्होंने ने सिर्फ़ मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को निशाने पर लिया था, बल्कि डिप्टी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उपेंद्र कुशवाहा को भी काफी खूब खरी-खोटी सुनाया था। छह महीने पहले नागमणि जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर को महान बता रहे थे और सम्राट चौधरी और उपेंद्र कुशवाहा जैसे कोइरी नेताओं को नीतीश कुमार का चमचा बोल रहे थे। क्या नागमणि बिहार चुनाव 2025 में भाजपा के लिए ‘लकी’ साबित होंगे या फिर नागमणि का ठिकाना फिर से बदल जाएगा? क्या भाजपा ने कोइरी वोट बैंक में बिखराव न हो इस वजह से नागमणि को पार्टी में शामिल कराया है?
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नागमणि को विरासत में ही राजनीति मिली है। उनके पिता जगदेव प्रसाद कुशवाहा जाति के बड़े नेता थे। उनकी मर्डर के बाद नागमणि उनके सियासी विरासत को संभाल नहीं पाए। कभी नीतीश कुमार का बखान करने वाले नागमणि बीते कुछ वर्षों में नीतीश कुमार पर जमकर बरसते रहे हैं। इसी वर्ष फरवरी में गांधी मैदान में आयोजित कोइरी समाज की रैली में उन्होंने न सिर्फ़ नीतीश कुमार को गद्दार कहा, बल्कि राज्य के डिप्टी मुख्यमंत्री स्रमाट चौधरी और उपेंद्र कुशवाहा को चमचा सहित कई इल्जाम लगाए। नागमणि बीते कुछ महीनों से जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशंत किशोर का खूब बखान कर रहे थे। ऐसे में उनका अचानक भाजपा में शामिल होना कोइरी समाज के कुछ लोगों को समझ में नहीं आ रहा है।
बीजेपी के ‘नाग’ या फिर ‘मणि’?
नागमणि की सियासी यात्रा घुमावदार रही है। वे कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों का हिस्सा रह चुके हैं। राष्ट्रीय जनता दल में भी कभी लालू प्रसाद यादव के करीबी रहे हैं। जेडीयू में भी नीतीश कुमार के साथ काम किया है। स्वयं और पत्नी सुचित्रा सिन्हा भी नीतीश मंत्रिमंडल में रह चुके हैं। लोक जनशक्ति पार्टी के संस्थापक रामविलास पासवान के साथ जुड़ाव रहा है और कुछ समय के लिए पार्टी में भी आए थे। राष्ट्रीय लोक समता पार्टी में उपेंद्र कुशवाहा के साथ भी नजर आए। कुछ समय तक कांग्रेस पार्टी में रह चुके हैं। स्वयं भी पार्टी बना चुके हैं। लेकिन, कभी किसी पार्टी में लंबे समय तक नहीं टिकत हैं।
नागमणि का कैसे मन डोला?
बिहार को करीब से जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार राजीव कुमार कहते हैं, ‘नागमणि का भाजपा में शामिल होना बिहार की राजनीति में कई नए समीकरण बना सकता है। पहला, यह कोइरी समाज को एनडीए के पक्ष में लामबंद हो सकती है, जो नीतीश कुमार के जेडीयू के लिए चुनौती पेश करेगा। क्योंकि नागमणि भाजपा से अधिक नीतीश कुमार पर अधिक हमलावर रहे हैं। दूसरा, नागमणि की वापसी भाजपा के भीतर भी नए राजनीतिक समीकरण बना सकती है, जहां सम्राट चौधरी और उपेंद्र कुशवाहा जैसे नेताओं के साथ उनकी पुरानी तल्खी सतह पर आ सकती है।’
नागमणि का कोइरी वोट बैंक में जनाधार
नागमणि हमेशा दावा करते रहे हैं कि वे कोइरी (कुशवाहा) समाज के सच्चे प्रतिनिधि हैं और अपने पिता की विरासत को सियासी रूप से जीवित रखना चाहते हैं। वह अक्सर बोलते हैं, ‘दोस्तों के लिए मणि और दुश्मनों के लिए नाग हूं। मेरा नाम नागमणि है।’ 2025 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच नागमणि की भाजपा में वापसी कई प्रश्न और संकेत लेकर आई है। सबसे बड़ा प्रश्न है कि क्या भाजपा कोइरी वोट बैंक को साधने के लिए यह कदम उठा रही है? बिहार में कुशवाहा या कोइरी समुदाय, जो ओबीसी में आता है एक बड़ा वोट बैंक है, जिसकी संख्या 7-8% मानी जाती है। भाजपा को 2024 के लोकसभा चुनावों में इस समुदाय ने कुछ हद तक निराश किया था। भाजपा उस गलती को सुधारने के लिए कोइरी समुदाय के एक-एक नेता को पार्टी में शामिल करा रही है। सम्राट चौधरी के बाद नागमणि को पार्टी में शामिल कर भाजपा इस जाति को साधने की पूरी प्रयास कर रही है।
बिहार चुनाव और राज्य की सियासी रूप से देखें तो भाजपा का यह दांव चुनावी तौर पर कारगर हो सकता है, लेकिन नागमणि की बार-बार पार्टी बदलने वाली छवि भाजपा के लिए ‘आस्तीन का सांप’ भी बन सकती है। चुनाव आयोग सितंबर के आखिर में बिहार चुनावा का घोषणा कर सकता है। ऐसे अक्टूबर में चुनाव प्रचार और नवंबर में पांच से सात फेज में बिहार चुनाव हो सकते हैं। ऐसे में देखना होगा कि क्या भाजपा वाकई कोइरी समाज को लामबंद कर पाएगी या नागमणि की वापसी सिर्फ़ एक प्रतीकात्मक कदम बनकर रह जाएगी?

