Nitish Kumar Yatra : सीएम नीतीश ने जनता दरबार से सुलझाई जनता की समस्याएं
Nitish Kumar Yatra: विकास यात्रा के दौरान सीएम के लिए अवसर और चुनौतियां एक साथ चल रही थी। अवसर यह कि उनके चार वर्ष के कामकाज का जमीनी असर साफ दिखाई दे रहा था। मुझे याद है, मुख्य सचिवालय में सीएम रात्रि के आठ से नौ बजे तक काम करते। सीएम के सचिवालय में बैठे देख हम भी ठहर गये।

थोड़ी देर में जब वह अपने कक्ष से सीएम आवास जाने के लिए निकले तो सामने देख कहा– “अरे आप अभी तक?” हमने बोला – “जब गवर्नमेंट का सीएम देर शाम तक काम कर सकते हैं तो पत्रकारों की भी डयूटी है कि वह इन कार्यों को समाचार के रूप में लोगों तक पहुंचाये।” खैर, उनकी दिन-रात की मेहनत का असर जमीन पर दिख रहा था। अपनी गवर्नमेंट की उपलब्धियों को वे अपनी आखों से देख रहे थे। शासन को लेकर लोगों की भावनाओं से रू-ब-रू हो रहे थे। विकलांगता को लेकर सीएम ने कई निर्देश दिये थे।
इस गांव में कभी बड़े अधिकारी भी नहीं पहुंचे थे
छपरा के जनता दरबार में बेलवा गांव से करीब 15 किलोमीटर की दूरी ट्राइसाइकिल से तय कर एक महिला आगे की पढ़ाई के लिए सहायता मांगने आयी थी। वहीं 70 वर्ष की शकीला को इंदिरा आवास की दरकार थी। यहां जाकर यह पता चला कि इन गांवों में आजादी के इतने वर्ष बाद भी कोई सीएम तो दूर बड़े नेता और अधिकारी नहीं पहुंचे थे। मुजफ्फरपुर-दरभंगा पथ पर स्थित एक पेट्रोल पंप के भीतर गुजारनी पड़ी रात। पांच फरवरी को विकास यात्रा के दौरान सीएम मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट के जारंग गांव पहुंचे। जारंग की सभा कवर करने के लिए हम पत्रकारों को मुजफ्फरपुर दरभंगा पथ पर स्थित एक पेट्रोल पंप के भीतर रात गुजारनी पड़ी थी। जारंग मुजफ्फरपुर-दरभंगा मुख्य सड़क के किनारे बसा गांव है। जारंग की सभा कवरेज में कोई कठिनाई नहीं हो, इसके लिए हमलोगों को निकट एक ठौर की आवश्यकता थी। देर शाम जब सीएम जारंग पहुंचे तो हम पत्रकारों की टोली भी साथ थी। जब सीएम रूटीन कार्यों से फ्री हुए तो हमलोगों ने अपने आराम की स्थान तलाशनी प्रारम्भ की। बहुत कठिन से एक स्थान मिली, जहां ठहरने के अतिरिक्त और कोई दूसरा विकल्प नहीं था। यह स्थान थी, जारंग।
पुआल का गठ्ठर पर सोकर बितायी रात
मुख्य सड़क पर एक कम चलने वाला पेट्रोल पंप दिखा। हमारे साथ चल रहे एक पत्रकार के साथ वहां के एक कर्मी का संपर्क था। उसने बात की। तय हुआ कि हमलोग, अंदर जहां एक कमरा था, वहां ठहर सकते हैं। पेट्रोल पंप पर कार्यरत एक कर्मी पड़ोस से कुछ पुआल का गठ्ठर ले आया और कमरे में बिछा दी। सर्दियों का समय था, वैसे भी खुले में नेशनल हाइवे पर कुछ अधिक ही ठंड का अहसास हो रहा था। खैर, पेट्रोल पंप के एक कमरे में रात गुजारने की प्रबंध तो हो गयी। अब संकट भोजन का था। नेशनल हाइवे पर ही थोड़ी दूर आगे बढ़ने पर भोजन का भी हल निकलता दिखा। ढ़ाबेनुमा एक होटल में रोटी और सब्जी-भुजिया का जुगाड़ हो चला। डिनर के बाद हम पहुंचे अपने ठिकाने। मच्छर और ठंड की वजह से रात किसी तरह बीत पायी। जेहन में सुबह की सैर के समय सीएम के साथ पहुंचने की प्लानिंग तैर रही थी। इधर, जारंग में सीएम देर रात तक आला ऑफिसरों के साथ बैठक में लीन रहे। सीएम ने साथ चल रहे अंजनी कुमार सिंह, सीके मिश्रा, अनूप मुखर्जी और राजेश भूषण जैसे सीनियर ऑफिसरों को अपने कैंप में तलब किया। सीएम ने बोला कि हम तीन-चार दिनों से गांव-गांव घूम रहे हैं। हमारी ख़्वाहिश लोगों के सुझाव को सरकारी योजना में शामिल करने की है। अच्छे सुझावों पर अमल होना चाहिए। सभी आला अधिकारी भी सहमत थे।
और कक्षा तीन का विद्यार्थी शुभम बन गया रिसोर्स पर्सन
सुबह की सैर के बाद जब सीएम का जनता दरबार आयोजित हुआ तो वहां कक्षा तीन के एक विद्यार्थी शुभम पर मुख्यमंत्री की नजर पड़ी। शुभम निकट के राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय भरतनगर के कक्षा तीन का विद्यार्थी था। उसने सीएम को बोला कि वह मंच पर आकर नारी सशक्तीकरण को लेकर अपनी बात रखना चाहता है। मुख्यमंत्री ने उसे मौका दिया। शुभम ने अपनी बात रखी तो सीएम बहुत खुश हुए। शुभम को पांच हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की। साथ ही तुरन्त बिहार शिक्षा परियोजना के निदेशक राजेश भूषण को बुला कर बोला कि इस लड़के को रिसोर्स पर्सन बनाइये।
जारंग में ही मुजफ्फरपुर रेड लाइट एरिया से आयी महिला नसीमा ने सीएम से मुलाकात की। नसीमा की मांग थी कि रेड लाइट एरिया में रह रहे बच्चों खास कर लड़कियों की पढ़ाई की प्रबंध हो। जारंग से निकल जब सीएम मुजफ्फरपुर की सभा में आये तो उन्होंने शहीद खुदी राम बोस मैदान में पोने तीन अरब की योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। यहां उन्होंने गंडक बांया नहर परियोजना को जमीन पर उतारने की घोषणा की।

