अब बिहार की सत्ता संभालना चाहते हैं प्रशांत किशोर
Prashant Kishor: स्वास्थ्य जानकार के रूप में 8 वर्ष संयुक्त देश संघ में जॉब करने के बाद प्रशांत किशोर ने 2011 में राजनीति में एंट्री ली और उन्हें यह एंट्री गुजरात के तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी ने दिलाई। दरअसल, उन्होंने राष्ट्र के सबसे समृद्ध और उच्च विकास वाले राज्यों में कुपोषण पर एक रिसर्च पेपर लिखा जिसमें महाराष्ट्र, हरियाणा, कर्नाटक और गुजरात जैसे विकसित राज्यों में कुपोषण की क्या स्थिति है और इसे कैसे सुधारा जा सकता है इस बारे में पूरी जानकारी दी।

इस लिस्ट में सबसे नीचे गुजरात का नाम था। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब इसे पढ़ा तो उन्हें लगा कि यदि इसमें बताए गए तरीकों पर अमल किया जाए तो राज्य में कुपोषण की जो स्थिति है उसमें कमी लाई जा सकती है। इसके बाद उन्होंने प्रशांत किशोर को टेलीफोन किया और गुजरात में काम करने के लिए बुलाया।
शुरूआती जीवन कैसा रहा
प्रशांत किशोर के पिता श्रीकांत पांडे जॉब की वजह से बक्सर में रहते थे। इसलिए उनकी स्कूली पढ़ाई लिखाई बक्सर में ही हुई। इसके बाद पीके इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने हैदराबाद चले गए। पब्लिक हेल्थ में पीजी करने के बाद पीके ट्रेंड पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट के रूप में संयुक्त देश (United Nation) में काम करने लगे। काम करने के तेज तर्रार पीके को उनकी पहली पोस्टिंग आंध्र प्रदेश मिली और फिर कुछ समय बाद उन्हें पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम चलाने के लिए बिहार ट्रांसफर कर दिया गया। बिहार में उन्होंने दो वर्ष किया और उन्हें फिर संयुक्त देश में भारतीय कार्यालय बुला लिया गया। यहां अपने काम से उन्होंने प्रसिद्धि पाई और फिर दो वर्ष बाद उन्हें यूएन के संयुक्त देश मुख्यालय में बुलाया गया।
राजनितिक सफर
लोकसभा चुनाव 2014 के लिए भाजपा ने जो रणनीति बनाई थी उसमें प्रशांत किशोर की अहम किरदार रही। उन्होंने 2014 में कुछ नए तरह के प्रचार माध्यम को भी हिंदुस्तान में प्रारम्भ किया। जिसमें 3D रैली, सोशल मीडिया पर प्रचार, मंथन, चाय पर चर्चा जैसे काम शामिल थे। हालांकि 2014 के बाद कुछ नाराजगी से वह भाजपा से अलग हो गए और नीतीश कुमार के साथ चले गए। 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने ‘फिर एक बार नीतीशे कुमार’ का नारा तैयार किया और अपनी टीम से बिहार के सभी 4000 गांव का दौरा करा कर जनता की राय ली। इस चुनाव में लालू यादव और नीतीश कुमार ने मिलकर बहुत बढ़िया जीत हासिल की। इसके बाद प्रशांत किशोर जनता दल यूनाइटेड के सदस्य बन गए। लेकिन अधिक दिन वह नीतीश कुमार के साथ भी नहीं रहे और पार्टी छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने ममता बनर्जी, कैप्टन अमरिंदर सिंह, अरविंद केजरीवाल और एमके स्टालिन के साथ भी काम किया
एक स्थान क्यों नहीं टिकते हैं प्रशांत
प्रशांत किशोर ने समय-समय पर भिन्न-भिन्न सियासी दलों के लिए काम किया। उनकी जीत में हम किरदार निभाई। जब प्रश्न उठता है कि प्रशांत किशोर एक स्थान क्यों नहीं टिकते हैं तो उनका उत्तर होता है कि मैं अधिक दिन एक स्थान नहीं रह सकता। मैं समय-समय पर स्वयं को नया चैलेंज देता हूं और उसे पूरा करने के लिए अपना सब कुछ झोंक देता हूं। हालांकि उनके काम करने के इस ढंग पर विरोधी खूब धावा बोलते हैं और कहते हैं कि जो आदमी एक स्थान एक वर्ष नहीं टिक सकता वह बिहार का क्या भला करेगा।
जन सुराज की शुरुआत
तारीख 2 अक्टूबर 2022 से पहले प्रशांत किशोर की पहचान राजनितिक सलाहकार और चुनावी रणनीतिकार की थी। हालांकि पीके ने कभी इस विवरण को पसंद नहीं किया। राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले लोग आज भी पीके को एक ऐसे आदमी के रूप में देखते हैं जो चुनाव जिताने और वोटरों की राय को एक खास पॉलिटिकल पार्टी के पक्ष में करने में माहिर हैं। फिर आती है तारीख 2 अक्टूबर 2022, इस दिन पीके ने बिहार के पश्चिम चंपारण से पद यात्रा प्रारम्भ किया। इस दौरान वो रोज लगभग 20 किलोमीटर पैदल चले और लोगों से सीधा संवाद करना प्रारम्भ किया। हर गांव और चौक पर छोटी-छोटी सभाओं के माध्यम से उन्होंने लोगों को अपने विजन के बारे में बताना प्रारम्भ किया। लगातार दो वर्ष बिहार की मिट्टी की खाक छानने के बाद उन्होंने 2 अक्टूबर 2024 को पार्टी लांच किया और नाम रखा ‘जन सुराज’।
प्रशांत किशोर को करना पड़ रहा है सियासी चुनौतियों और आलोचनाओं का सामना
प्रशांत किशोर की कामयाबी के बावजूद, उन्हें सभी विपक्षी दलों से कई चुनौतियों और आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ रहा है। राजनितिक विश्लेषकों का भी मानना है कि उनकी रणनीतियां सिर्फ़ चुनाव जीतने तक सीमित हैं। पीके की रणनीतियों में किसी पार्टी को सत्ता में बनाए रखने के लॉन्ग टाइम अप्रोच की कमी है। प्रशांत किशोर को कोई भाजपा की भी टीम तो कोई वोट कटवा पार्टी का नेता बताता है। पप्पू यादव उन्हें बीजेपी का एजेंट तो तेजस्वी यादव उनको नेता मानने से भी मना कर रहे हैं। इन तमाम आलोचनाओं के बावजूद प्रशांत किशोर अपने काम में लगे हुए हैं।
क्या है प्रशांत किशोर की भविष्य की योजनाएं?
प्रशांत किशोर में घोषणा किया है कि 2025 के विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी जन सुराज राज्य के सभी 243 सीटों पर अपना उम्मीदवार उतारेगी। उनसे जब प्रश्न किया गया कि आप भाजपा का वोट काटेंगे या महागठबंधन का? इसके उत्तर में उन्होंने बोला कि मैं 2025 में भाजपा और महागठबंधन दोनों को ही बिहार के रास्ते से साफ कर दूंगा।
फिलहाल इस वजह से चर्चा में
प्रशांत किशोर को सोमवार की सुबह पटना पुलिस ने अरैस्ट किया। दरअसल, पीके ने बीपीएससी की 70वीं प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करने की मांग को लेकर पटना के गांधी मैदान में 2 जनवरी से आमरण अनशन प्रारम्भ किया था। वह इस कंपकपाती ठंड में महात्मा गांधी की प्रतिमा के नीचे बैठे हुए थे। उनकी मांग थी कि बिहार के सीएम धरना स्थल पर आएं और बिहार लोक सेवा आयोग के परीक्षार्थियों को सुने और उनकी मांगों पर फैसला करें। यह तो नहीं हो पाया लेकिन आज उन्हें सुबह 4:00 बजे पटना पुलिस ने अरैस्ट कर लिया और धरना स्थल को भी खाली करा दिया गया। आने वाले दिनों में इस गिरफ्तारी से उनको क्या सियासी एज मिलता है यह देखना दिलचस्प होगा। क्योंकि राजद और भाजपा का इल्जाम है कि पीके राजनितिक फायदा लेने के चक्कर में इस आंदोलन को हाईजैक कर रहे हैं।

