बिहार

बक्सर के 35वें स्थापना दिवस पर प्रशासन ने दिखाई चुस्ती, आयोजित किए कई बड़े कार्यक्रम

बक्सर के 35वें स्थापना दिवस पर प्रशासन ने कई कार्यक्रम आयोजित किए है. ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व के लिए विख्यात यह जिला हर वर्ष 17 मार्च को अपने स्थापना दिवस को धूमधाम से मनाता है. 11 वर्ष के लंबे संघर्ष के बाद 1991 में बक्सर को भोजपुर से अल

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इस ऐतिहासिक दिन को खास बनाने के लिए जिला प्रशासन ने सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है, जबकि अन्य स्थानों पर केक काटकर जिले का जन्मदिन मनाया जाएगा.

आयोजित कार्यक्रम के मुताबिक सुबह 6:30 बजे सभी नगर निकायों और पंचायतों में स्वच्छता अभियान चला. 6:45 बजे जिलेभर में प्रभात फेरी निकाली गई. 7:00 बजे प्रमुख स्थलों पर माल्यार्पण कार्यक्रम हुआ. इसके बाद 7:30 से 9:00 बजे तक किला मैदान से कारावास घाट तक मैराथन दौड़ हुआ. विजेताओं को नकद पुरस्कार दिए जाएंगे.

12 बजे से लगेगा रक्तदान शिविर

वहीं, 11:30 बजे समाहरणालय में दीप प्रज्वलन, केक कटिंग और बैलून उड़ाने का कार्यक्रम आयोजित है. इसके अतिरिक्त 12:00 से 4:00 बजे तक रक्तदान शिविर आयोजित किया गया है. दोपहर 1:00 बजे आंगनवाड़ी और जीविका दीदी के बीच रंगोली प्रतियोगिता होगी.

स्थापना दिवस पर घाट सजाया गया है.

दरअसल, जिला स्थापना दिवस केवल इतिहास और संस्कृति का उत्सव नहीं है, बल्कि यह भविष्य की संभावनाओं को भी संजोने का अवसर है. यह दिन हर नागरिक के लिए गर्व का प्रतीक है, जो बक्सर की गौरवशाली परंपरा और उज्ज्वल भविष्य को दर्शाता है.

बक्सर का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है. प्राचीन काल में इसे व्याघ्रसर बोला जाता था. यहीं भगवान राम ने महर्षि विश्वामित्र से शिक्षा ली और ताड़का-सुबाहु का वध किया. 1539 में चौसा का युद्ध हुमायूं और शेरशाह सूरी के बीच यहीं हुआ. 1764 में बक्सर की लड़ाई ने हिंदुस्तान के इतिहास को नयी दिशा दी, जब ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी ने यहां निर्णायक जीत हासिल की.

2011 की जनगणना के मुताबिक जिले की कुल जनसंख्या 17,06,352 है. यहां 1000 मर्दों पर 922 महिलाएं हैं. जिले की साक्षरता रेट 70.14 फीसदी है. बक्सर लोकसभा क्षेत्र में 9,53,853 पुरुष और 8,52,125 स्त्री मतदाता हैं.

धार्मिक पर्यटन का है प्रमुख केंद्र

इतना ही नहीं, बक्सर धार्मिक पर्यटन का भी प्रमुख केंद्र है. रामरेखा घाट, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए आते हैं. बरमेश्वर नाथ मंदिर, नाथ बाबा मंदिर ,नौलखा मंदिर ,राम के हाथों स्थापित रामेश्वर नाथ मंदिर और रानी घाट जैसे धार्मिक स्थल इसकी विशेष पहचान देते हैं. पंचकोशी यात्रा भी भगवान राम से जुड़ी एक जरूरी परंपरा है, जिसमें पांच अस्त्रों पर श्रद्धालु यात्रा कर दर्शन पूजन करते है.

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