दुनिया के लिए दहशत का सबब बन गया है लेबनान में हुआ पेजर ब्लास्ट
हाल ही में लेबनान में हुए पेजर ब्लास्ट ने दुनिया को हिला कर रख दिया है. बेरूत में हजारों पेजरों में हुए धमाकों में 8 लोगों की जान चली गई और 2750 लोग घायल हो गए. यह घटना पहली बार हुई जब किसी विस्फोट के लिए पेजर का इस्तेमाल किया गया. इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक नयी चुनौती खड़ी कर दी है और यह प्रश्न उठाया है कि क्या भविष्य में मोबाइल टेलीफोन जैसे उपकरणों का भी इस तरह से दुरुपयोग किया जा सकता है?

लेबनान पेजर ब्लास्ट की घटना ने तकनीक के दुरुपयोग पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं. इस हमले में पेजर का इस्तेमाल किया गया, जिसमें 8 लोगों की मृत्यु हो गई और 2750 से अधिक लोग घायल हुए. ये एक अभूतपूर्व घटना थी, क्योंकि पहली बार किसी विस्फोट के लिए पेजर जैसी डिवाइस का इस्तेमाल किया गया. यह प्रश्न उठता है कि क्या भविष्य में मोबाइल, लैपटॉप या स्मार्टवॉच भी इसी प्रकार के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किए जा सकते हैं?
लेबनान में पेजर ब्लास्ट की घटना ने यह दिखाया कि किस प्रकार छोटी तकनीकी डिवाइसों को भी खतरनाक हथियारों में परिवर्तित किया जा सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक पेजरों में 3 ग्राम विस्फोटक छिपाया गया था और एक मैसेज के जरिए सभी पेजरों में धमाका किया गया. ऐसा बोला जा रहा है कि पेजरों में लगे लिथियम बैटरी में ही विस्फोट की वजह हो सकती है. लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल अब स्मार्टफोन, लैपटॉप, स्मार्टवॉच, और इलेक्ट्रिक वाहनों में भी बड़े पैमाने पर हो रहा है.
हालांकि, इन बैटरियों का इस्तेमाल काफी सामान्य हो गया है, लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि यह बैटरियां ठीक स्थिति न मिलने पर विस्फोट कर सकती हैं. यह संभवतः लिथियम बैटरी की खराबी या जानबूझकर किए गए विस्फोट के कारण हुआ. यह घटना यह सिद्ध करती है कि बैटरी का इस्तेमाल न सिर्फ़ ऊर्जा साधन के रूप में किया जा सकता है, बल्कि ठीक हालात में इसे विस्फोटक के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है.
लिथियम-आयन बैटरी का खतरा : वैज्ञानिक दृष्टिकोण से लिथियम-आयन बैटरी में ऊर्जा घनत्व (energy density) बहुत अधिक होती है. इस वजह से ये बैटरियां छोटे आकार में भी अधिक ऊर्जा स्टोर कर सकती हैं, जो उन्हें पोर्टेबल डिवाइस के लिए उपयुक्त बनाता है. लेकिन, ये बैटरियां अत्यधिक तापमान, शॉर्ट सर्किट या क्षतिग्रस्त होने पर अत्यधिक गर्मी पैदा कर सकती हैं. इस स्थिति को “थर्मल रनअवे” कहते हैं, जिसमें बैटरी में लगी केमिकल प्रतिक्रियाएं खुद-ब-खुद बढ़ती जाती हैं और अंततः विस्फोट हो सकता है.
अध्ययनों से पता चला है कि गलत ढंग से चार्जिंग, अधिक गर्मी, या बैटरी की पुरानी स्थिति में विस्फोट का खतरा और भी बढ़ जाता है. एक अध्ययन में यह पाया गया कि खराब बैटरी सेल या चार्जर का इस्तेमाल करने से बैटरियों के अंदर का तापमान 150°C से ऊपर जा सकता है, जिससे बैटरी फटने का खतरा रहता है.
आजकल अधिकांश स्मार्ट डिवाइसों में लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल होता है. यह बैटरी हल्की, पुनःचार्ज करने योग्य और अधिक ऊर्जा घनत्व वाली होती है, जिसकी वजह से इसे मोबाइल फोन, लैपटॉप, और अन्य उपकरणों में इस्तेमाल किया जाता है.
1. ओवरहीटिंग और शॉर्ट-सर्किट: लिथियम-आयन बैटरियों का सबसे बड़ा खतरा इनका अत्यधिक गर्म हो जाना है, जिससे यह शॉर्ट सर्किट कर सकती हैं. इस स्थिति में, बैटरी में आग लग सकती है या यह फट सकती है.
2. विस्फोटक क्षमता: यदि बैटरी में आंतरिक शॉर्ट सर्किट होता है या बाहरी दबाव से बैटरी क्षतिग्रस्त होती है, तो इसमें विस्फोट होने की आसार होती है.
3. बैटरियों का दुरुपयोग: पेजर ब्लास्ट की घटना ने दिखाया कि बैटरी के साथ विस्फोटक सामग्री को मिलाकर उसे हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.
क्या मोबाइल टेलीफोन भी बन सकते हैं खतरा? आज के SmartPhone में भी लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल होता है. इस घटना के बाद यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या इन्हें भी पेजरों की तरह विस्फोटक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है? तकनीकी रूप से SmartPhone को भी मॉडिफाई कर विस्फोटक बनाया जा सकता है, क्योंकि ये उपकरण भी बैटरी पर निर्भर होते हैं.
ऐसे में प्रश्न उठ रहा है कि हिजबुल्लाह के पेजर में धमाके करवाए जा सकते हैं तो फिर, मोबाइल, स्मार्टफोन, लैपटॉप, स्मार्टवॉच में भी हो सकता है. हिंदुस्तानियों में यह डर और भी अधिक है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में लोग चीनी कंपनियों द्वारा बनाए गए मोबाइल टेलीफोन इस्तेमाल करते हैं. पड़ोसी चीन के साथ हिंदुस्तान के संबंध अच्छे नहीं है और लंबे समय दोनों राष्ट्रों के बीच सीमा टकराव चल रहा है. चीनी मोबाइल टेलीफोन के बारे में हिंदुस्तानियों में विशेष चिंता है, क्योंकि हिंदुस्तान और चीन के बीच तनावपूर्ण संबंधों का इतिहास है.
हालांकि, यह चिंता केवल चीन तक सीमित नहीं है. पूरे विश्व में साइबर हमलों, डिवाइस हैकिंग और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के दुरुपयोग का खतरा बढ़ता जा रहा है. SmartPhone को ट्रैक करना आसान हो गया है और इसमें छिपी जानकारी को भी चुराया जा सकता है. लेकिन, पेजर और अन्य कम-टेक डिवाइसों का इस्तेमाल अब नया खतरा पैदा कर रहा है क्योंकि इन्हें ट्रैक करना कठिन होता है.
स्मार्टफोन में भी लिथियम-आयन बैटरियां होती हैं और यह खतरा किसी भी बैटरी से संबंधित हो सकता है. हाल ही में मोबाइल टेलीफोन विस्फोट की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें बैटरी की खराबी के कारण दुर्घटनाएं हुई हैं. हालांकि, पेजर जैसी लो-टेक डिवाइस की तुलना में SmartPhone को और अधिक परिष्कृत ढंग से मॉडिफाई किया जा सकता है, जिससे इनका दुरुपयोग करना और भी आसान हो सकता है.
जानिए बैटरी से जुड़े सुरक्षा उपाय : मोबाइल और अन्य उपकरणों की बैटरियों से जुड़े खतरे कम करने के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी जानकार कई सुझाव देते हैं:
1. अत्यधिक चार्जिंग से बचें: बैटरियों को ओवरचार्ज करने से वे अत्यधिक गर्म हो सकती हैं, जिससे उनके शॉर्ट सर्किट का खतरा बढ़ जाता है.
2. बैकअप पावर का ठीक उपयोग: बैटरियों को बार-बार बैकअप पावर से चार्ज करने से भी हानि हो सकता है, इसलिए इन्हें ठीक ढंग से इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है.
3. गवर्नमेंट और सुरक्षा एजेंसियों का सावधान रहना: सुरक्षा एजेंसियों को इस प्रकार की घटनाओं से सीख लेकर सभी डिवाइसों पर नजर रखनी होगी, ताकि किसी भी संभावित हमले से बचा जा सके.
4. वास्तविक चार्जर का उपयोग: नकली या लोकल चार्जर का इस्तेमाल न करें. ये बैटरी को ओवरहीट कर सकते हैं और विस्फोट का कारण बन सकते हैं.
5. उच्च तापमान से बचाव: बैटरी को अत्यधिक गर्म स्थान पर रखने से बचें.
6. सावधानीपूर्वक निपटान: खराब बैटरियों को ठीक ढंग से निपटाएं, क्योंकि ये न केवल पर्यावरण के लिए नुकसानदायक हैं, बल्कि विस्फोट का कारण भी बन सकती हैं.
पेजर ब्लास्ट ने यह सिद्ध कर दिया है कि हम जिस तकनीक पर प्रत्येक दिन निर्भर होते हैं, वह एक दोधारी तलवार की तरह हो सकती है. बैटरियों और डिवाइसों के खतरे को समझना और उनका ठीक इस्तेमाल करना अत्यंत जरूरी है. पेजर ब्लास्ट की घटना यह दिखाती है कि छोटी और साधारण तकनीकी डिवाइसों का भी गलत इस्तेमाल किया जा सकता है. वैज्ञानिकों और तकनीकी जानकारों का मानना है कि भविष्य में मोबाइल फोन, स्मार्टवॉच, और अन्य डिवाइसों को भी इसी प्रकार के हमलों में इस्तेमाल किया जा सकता है. इन डिवाइसों को सरलता से ट्रैक किया जा सकता है, इसलिए ऐसे जोखिमों को कम करने के लिए लगातार अनुसंधान और तकनीकी विकास जरूरी हैं.

