बेतिया में डीजल घोटाले को लेकर सियासी टकराव हुआ तेज
बेतिया नगर निगम में कथित डीजल घोटाले को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. बीजेपी सांसद डाक्टर संजय जायसवाल ने मेयर गरिमा देवी सिकारिया और उनके पार्षद पति पर गंभीर इल्जाम लगाए हैं. उनका बोलना है कि निगम में डीजल चोरी की पूरी पटकथा इन्हीं के संरक्षण में लिखी ग
।
इधर, महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने सांसद के आरोपों को निराधार बताते हुए उन्हें स्तरहीन और अनर्गल करार दिया है. उन्होंने साफ बोला है कि यदि सांसद महोदय अपने इल्जाम वापस नहीं लेते तो वे मानहानि का केस दर्ज कराएंगी.
बैठक में नहीं रखे गए कागजात
दरअसल सांसद डाक्टर संजय जायसवाल ने प्रश्न उठाते हुए बोला कि 19 सितंबर को उन्होंने लिखित दिया था कि डीजल करप्शन के सारे कागज नगर निगम की विशेष बैठक में रखे जाएं. बावजूद इसके 20 सितंबर को हुई बैठक के एजेंडा में इस मामले को शामिल ही नहीं किया गया.
उनका दावा है कि निगम के वाहन डीजल भरवाने के बाद बियाडा स्थित पार्षद रोहित सिकारिया के गोदाम पर जाते थे,जहां ऑयल निकालकर बेचा जाता था और गाड़ियां वापस पार्किंग में लौटा दी जाती थीं. सांसद ने यह भी इल्जाम लगाया कि निगम के दो कर्मचारी लंबे समय से डीजल कूपन के जरिए काला कारोबार चला रहे हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि पूरे मुद्दे की एसआईटी जांच करवाई जाएगी और इसमें वीडियोग्राफी भी होगी.
महापौर ने आरोपों को कहा बेबुनियाद
वहीं, महापौर गरिमा देवी सिकारिया ने सांसद के आरोपों को राजनीति से प्रेरित और आधारहीन बताया. उन्होंने बोला कि इल्जाम लगाकर उनका और उनके पति का चरित्र हनन किया जा रहा है. मेयर ने बोला कि यदि उन्हें इस कथित घोटाले से कोई फायदा होता तो वे लगातार नगर निगम बोर्ड की बैठकों में पेट्रोल पंप बदलने का प्रस्ताव क्यों लातीं.
उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में उन्होंने कई बार तत्कालीन नगर आयुक्त,जिलाधिकारी और विभाग के प्रधान सचिव को पत्र लिखकर घोटाले को रोकने की मांग की थी. महापौर ने एसआईटी जांच का स्वागत किया, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि सांसद स्वयं डर के कारण शायद इस जांच को पूरा नहीं होने देंगे.

