प्रशांत किशोर के पोल खोल अभियान से बिहार में आया सियासी भूचाल
पटना। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर के पोल खोल अभियान से बिहार में राजनीतिक भूचाल आ गया है। बीते कुछ खुलासों के बाद बिहार गवर्नमेंट के कई एमएलए, मंत्री और सचिव स्तर के कुछ आईएएस ऑफिसरों की अब नींद गायब हो गई है। दरअसल, रविवार को पीके ने हरनौत में बोला है कि अभी तक फुलझड़ी छूट रहा था अब ‘बम’ गिराएंगे। सूत्रों की मानें तो बिहार गवर्नमेंट के कई विभागों में तैनात करप्ट ऑफिसरों की फाइलें पीके को बैकडोर से पहुंच गई है। इसमें कई मौजूदा और पूर्व मंत्री के साथ-साथ कई आईएएस अधिकारी की दोस्ती और बीते 10 वर्षों में उनके कारनामों की पूरी लिस्ट है। प्रशांत किशोर ने इन खुलासों पर कहा, ‘अभी तक केवल फुलझड़ी छूट रही थी, अब ‘बम’ फूटेगा? पीके ने घोषणा किया, ‘जिन लोगों ने बिहार का लूटा उसको छोड़ेंगे नहीं, आज नहीं तो छह महीने के बाद वे करप्ट अधिकारी और नेता जाएंगे जेल।’

बता दें कि बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सियासी हलकों में एक बार फिर से प्रशांत किशोर की चर्चा जोरशोर से हो रही है। पिछले कई सालों से चुनावी रणनीति के धुरंधर माने जाने वाले पीके ने अब करप्शन के विरुद्ध एक कठोर मुहिम प्रारम्भ किया है, जो न सिर्फ़ बिहार की राजनीति में भूचाल ला रही बल्कि कई बड़े नेताओं और अफसरों के लिए मुश्किलें भी खड़ी कर रही है। पीके ने बोला है कि अगले कुछ दिनों के अंदर हम ऐसे बड़े-बड़े खुलासे करेंगे जो बिहार के सियासी और प्रशासनिक तंत्र को हिला कर रख देंगे। करप्शन के बड़े-बड़े गुनहगारों को जनता के सामने लाया जाएगा और कारावास जाना उनके लिए तय है।’
भ्रष्टाचार के विरुद्ध पीके का नया एजेंडा
प्रशांत किशोर ने अपनी नयी मुहिम को ‘न्याय और पारदर्शिता’ का नाम दिया है। उनका बोलना है कि बिहार की जनता लंबे समय से भ्रष्टाचार, गड़बड़ी और सत्ताधारियों की लूट से त्रस्त है। पीके ने साफ किया, ‘हमारा उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि बिहार में सच्चे परिवर्तन लाना है,’ पीके का दावा है कि पिछले कुछ महीनों में उन्होंने करप्शन की गहरी तहकीकात की है और करप्ट नेताओं और अफसरों के कई ठोस सबूत जुटा लिए हैं। इन सबूतों के आधार पर वे अगले कुछ दिनों में करप्शन के बड़े खेल को उजागर करेंगे, जिसमें गवर्नमेंट और प्रशासन दोनों के कुछ नामी नेता और अधिकारी शामिल होंगे।
कौन हो सकते हैं निशाने पर?
सूत्र बताते हैं कि पीके की जांच में जिन नेताओं और अफसरों के नाम सबसे अधिक सामने आए हैं, वे बिहार की प्रमुख सियासी पार्टियों से हैं। इनमें कुछ मौजूदा विधायक, पूर्व मंत्री और बड़े अधिकारी शामिल हैं, जिनके विरुद्ध करप्शन के मुद्दे लंबित या दबाए गए रहे हैं। सियासी जानकारों का मानना है कि पीके की यह मुहिम बिहार के सियासी समीकरणों को बदल सकती है। कुछ नेताओं को अपने पद और प्रतिष्ठा की चिंता सताने लगी है, तो कुछ अधिकारी भी इस अभियान को लेकर सावधान हो गए हैं।
जनता का स्वागत, नेताओं में खलबली
बिहार के आम लोगों ने पीके के इस कदम का स्वागत किया है। कई लोग मानते हैं कि करप्शन के विरुद्ध कठोर कार्रवाई ही राज्य के विकास की वास्तविक कुंजी है। वहीं, सियासी गलियारों में इस कदम को लेकर हड़कंप मची हुई है। कई दलों के नेताओं ने इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा कहा तो कुछ इसे सत्ता में वापसी की कवायद। लेकिन सभी मानते हैं कि पीके के पास इस बार कुछ ठोस सबूत हैं, जो बिहार की राजनीति को हिला सकते हैं।
प्रशांत किशोर की रणनीति साफ है कि वह करप्शन को उजागर करने के साथ-साथ इस मामले पर व्यापक जन जागरूकता फैलाना भी चाहते हैं। इसके लिए वे सोशल मीडिया, लोकसभा मंचों और जनसभाओं का सहारा ले रहे हैं। उनका लक्ष्य है कि करप्शन को चुनावी मामला बनाकर जनता को सशक्त करना। इसके अलावा, पीके ने कुछ गैर-सरकारी संगठनों और न्यायिक ऑफिसरों से भी संपर्क किया है ताकि करप्शन के मामलों की निष्पक्ष जांच हो सके और दोषियों को कानून के कटघरे में लाया जा सके। ऐसे में बड़ा प्रश्न यह है कि आने वाले छह महीने के अंदर कौन-कौन नेता और अधिकारी कारावास जाएंगे? लेकिन इतना तय है कि बिहार की राजनीति में इस मुहिम से भूचाल जरूर आने वाला है।

