सीएम फेस पर अब तक राजद को कांग्रेस का नहीं मिला साथ
Bihar Chunav: बिहार चुनाव को लेकर सरगर्मी बढ़ गई है। एनडीए हो या महागठबंधन सीट शेयरिंग पर माथापच्ची जारी है। महागठबंधन में तो दो-दो मोर्चों पर खटपट है। मुख्यमंत्री फेस पर अब तक राजद को कांग्रेस पार्टी का साथ नहीं मिला है। अब कांग्रेस पार्टी उससे एक कदम आगे बढ़ गई है। कांग्रेस पार्टी की चाल से तेजस्वी यादव और लालू यादव टेंशन में आ जाएंगे। जी हां, महागठबंधन में सीट बंटवारे पर घमासान मचा हुआ है। इधर तेजस्वी यादव स्वयं को मुख्यमंत्री फेस बताने में लगे हैं, उधर राहुल गांधी की कांग्रेस पार्टी ने बड़ा धक्का दे दिया। कांग्रेस पार्टी ने 76 सीटों पर ताल ठोक कर राजद की टेंशन बढ़ा दी है।

महागठबंधन में अभी सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। चाहे वो सीट शेयरिंग हो या मुख्यमंत्री फेस… राजद और कांग्रेस पार्टी का मन नहीं मिल पा रहा। एक बार भी कांग्रेस पार्टी ने अब तक तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री फेस के रूप में स्वीकार नहीं किया है। जबकि तेजस्वी राहुल के सामने भी स्वयं को मुख्यमंत्री फेस घोषित कर चुके हैं। अब कांग्रेस पार्टी ने 76 सीटों की डिमांड कर आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव की टेंशन बढ़ा दी है। अब प्रश्न है कि कांग्रेस पार्टी ने कैसे तेजस्वी यादव को छक्का वाला धक्का दिया है?
क्या है कांग्रेस पार्टी का छक्का वाला धक्का
दरअसल, पिछली बार 2020 चुनाव में कांग्रेस पार्टी को 70 सीटें मिली थीं। अब कांग्रेस पार्टी ने सीधे 6 सीट बढ़ा दी है। कांग्रेस पार्टी की 70 के बदले 76 सीटों की डिमांड से महागठबंधन में महाभारत के संकेत हैं। सूत्रों का बोलना है कि कांग्रेस पार्टी बिहार की 76 सीटों पर चुनाव लड़ने का प्लान बना चुकी है। कांग्रेस पार्टी ने राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा के बाद 76 सीटों को सेलेक्ट कर लिया है। बताया जा रहा है कि 24 सितंबर को कांग्रेस पार्टी वर्किंग कमेटी की बैठक में इस पर मुहर लग सकती है। 38 सीटों का घोषणा करने के लिए भी कांग्रेस पार्टी तैयार है।
कांग्रेस की चाल से टेंशन में राजद
कांग्रेस की इस चाल से राजद में हड़कंप है। इससे पहले तेजस्वी यादव ने बोला था कि वे सभी 243 सीटों पर लड़ सकते हैं। मगर अब कांग्रेस पार्टी ने अधिक सीटें मांगकर मुद्दे को और उलझा दिया है। इधर तेजस्वी मुख्यमंत्री फेस पर अड़े हुए हैं। इधर राजद खेमे का बोलना है कि कांग्रेस पार्टी को 70 सीटों पर ही संतोष करना होगा। राजद पिछली बार से अधिक सीटें देने के पक्ष में नहीं है। इसकी वजह है कि 2020 में कांग्रेस पार्टी ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा तो था मगर सीटें सिर्फ़ 19 ही जीत पाई थी।
क्यों प्रेशर पॉलिटिक्स कर रही कांग्रेस
कांग्रेस राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा से उत्साहित है। राहुल गांधी की यात्रा में जिस तरह से भीड़ उमड़ी, उससे कांग्रेस पार्टी को लग रहा है कि उसकी पकड़ मजबूत हुई है। यही वजह है कि वह महागठबंधन में प्रेशर पॉलिटिक्स खेल रही है। कांग्रेस पार्टी अभी अपनी ताकत दिखा रही है। वह यह बताना चाहती है कि वह राजद की पिछलग्गू पार्टी नहीं है। हालांकि, दोनों खेमों का बोलना है कि अभी सीट शेयरिंग पर वार्ता जारी है। अब देखना होगा कि कांग्रेस पार्टी की इस डिमांड पर तेजस्वी क्या करते हैं।

