बिहार

इतने दिनों से प्रेमिका के साथ जीवन बिता रहा था संजीव मुखिया, फिर से लीक करने वाला था NEET पेपर…

NEET समेत कई प्रतियोगिता परीक्षाओं के पेपर लीक का आरोपी, परीक्षा माफिया संजीव मुखिया पटना के दानापुर में गर्लफ्रेंड के साथ रह रहा था. वो 18 महीने से फरार था, जांच एजेंसियां काफी समय से उसकी तलाश में थी.

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संजीव पहले नेपाल में छुपा था. फिर पटना में रहकर नयी गैंग तैयार कर रहा था. सूत्रों की माने तो संजीव 9 दिन बाद यानी 4 मई 2025 को होने वाली नीट परीक्षा का पेपर फिर लीक कराने की फिराक में था.

संजीव मुखिया ने 3 महीने पहले सगुना मोड़ के पास आरएन हाइट्स में एक फ्लैट किराए पर लिया था. जिस मोबाइल नंबर को EOU ट्रेस कर रही थी वह मोबाइल मुखिया ने किसी और के नाम पर ले रखा था. लोकेशन ठीक नहीं मिल रहा था.

ह्यूमन इंटेलिजेंस से लोकेशन की पुष्टि हुई. इसीलिए ऑपरेशन में चार घंटे लगे. जब यह कंफर्म हो गया कि वह आरएन हाइट्स में छिपा हुआ है तब पुलिस ने अपार्टमेंट को घेर लिया. छापेमारी प्रारम्भ हुई और मुखिया प्रेमिका के साथ पकड़ा गया.

CBI ने की पूछताछ

सिपाही बहाली, बीपीएससी शिक्षक भर्ती और NEET UG जैसी कई परीक्षा के पेपर लीक में संजीव मुखिया शामिल रहा है. संजीव को देर शाम न्यायालय में पेश किया गया जहां से उसे कारावास भेजा गया.

CBI ने भी शुक्रवार को संजीव मुखिया से 3 घंटे पूछताछ की. EOU अब संजीव को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लेने की तैयारी में है.

मुखिया पर अक्टूबर 2023 में सिपाही बहाली पेपर लीक का मुकदमा दर्ज हुआ था. वह फरार चल रहा था.

फरारी के दौरान ही मार्च 2024 में बीपीएससी शिक्षक भर्ती का पेपर लीक किया. 11 अप्रैल को उसके ऊपर 3 लाख रुपए का पुरस्कार घोषित हुआ.

बेटा और कई करीबी पहले से कारावास में

NEET UG पेपर लीक मुकदमा में पहले ही राकेश रंजन उर्फ रॉकी और बलदेव उर्फ चिंटू कारावास में हैं. ये दोनों संजीव के करीबी सम्बन्धी हैं.

संजीव का बेटा डाक्टर शिव, सम्बन्धी प्रदीप, रॉकी, चिंटू और ग्रामीण कार्य विभाग का सस्पेंडेड अकाउंटेंट विशाल कारावास में हैं.

संजीव मुखिया‎ और उसका भाई राजीव सिन्हा 2012 में‎ बिहार महादलित विकास मिशन की भर्ती ‎परीक्षा में ब्लूटूथ से नकल कराने के‎आरोप में पहली बार कारावास गए थे.

नेपाल छोड़, पंजाब-चंडीगढ़ को बनाया नया ठिकाना

संजीव मुखिया के मोबाइल और बरामद डायरी को पुलिस खंगाल रही है. नेपाल छोड़ने के बाद मुखिया ने पंजाब और चंडीगढ़ को अपना ठिकाना बनाया था. यहीं कई परीक्षा माफियाओं से मिला. बीते 3 महीने से उसका पटना आना जाना हो रहा था.

पूछताछ में उसने कई पेपर लीककांड में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है. शनिवार को सीबीआई दिल्ली की टीम भी पटना आएगी. मुखिया से पूछताछ करेगी.

कॉलेज के तकनीकी सहायक से माफिया तक का सफर

संजीव नूरसराय हॉर्टिकल्चर कॉलेज में तकनीकी सहायक था. उसका नाम पहली बार 2012 में ब्लूटूथ डिवाइस से नकल कराने में आया था. बीपीएससी शिक्षक बहाली घोटाले में वह कारावास जा चुका है. उसका बेटा डाक्टर शिव कुमार भी कारावास में बंद है. पत्नी, ममता कुमारी लोजपा से विधानसभा चुनाव लड़ चुकी है.

पेपर लीक माफिया ने पांच राज्यों में फैला रखा था जाल

नीट पेपर लीक मुद्दे की जांच CBI कर रही है. मुखिया का गैंग बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में फैला हुआ है. संजीव का गैंग हरियाणा के वेटरनरी चिकित्सक और इंग्लिश टीचर भर्ती परीक्षा के साथ ही यूपी की कई भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक में भी शामिल रहा है.

डॉ शुभम मंडल, विक्की कुमार, सुमित‎कुमार, प्रदीप कुमार, रवि अत्री, अभिषेक‎केसरी, मनीष, अतुल वत्स, अश्विनी‎रंजन, विशाल चौरसिया, सुचिंद्र पासवान,‎ सोनू चेसी, अजीत चौहान, अजय चौहान,‎ अमित भारती, डाक्टर मनीष, संजय प्रभात,‎ साहिल सिंह, विकास कुमार, अमन,‎सुमन, डाक्टर पिंटू सिंह, अखिलेश सर, ‎बबलू भूमिहार, छोटू हिलसा, डुगुल, ‎नीरज, चंदन सर और डब्ल्यू मुखिया‎ रैकेट का मुख्य सदस्य हैं.

संजीव के पास आय से 144% अधिक संपत्ति

प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी कर संजीव ‎मुखिया ने अकूत संपत्ति अर्जित की है. EOU‎ ने इसके विरुद्ध 21 अक्टूबर 24 को आय‎ से अधिक संपत्ति का मुकदमा भी दर्ज किया था.‎ जांच में यह बात सामने आई है कि संजीव‎ मुखिया के पास आय से 144 फीसदी ‎अधिक यानी 1 करोड़ 75 लाख 97 हजार ‎की चल और अचल संपत्ति है.

संजीव ‎मुखिया नालंदा के नगरनौसा पुलिस स्टेशन के यारपुर‎ बलवा गांव का रहने वाला है. वह 16 नंवबर ‎2011 को सबौर कृषि विवि, भागलपुर में ‎तकनीकी सहायक पद पर बहाल हुआ था.‎ वो नालंदा उद्यान महाविद्यालय,‎ नगरनौसा में तकनीकी पद पर बहाल है.‎ फिलहाल निलंबित है.

संजीव मुखिया की पत्नी के विस चुनाव लड़ने की ‎चर्चा‎

परीक्षा माफिया संजीव मुखिया एक हफ्ते‎ पहले अपने गांव में था. वहां उसने समर्थकों‎ को भोज दिया था. चर्चा है कि उसकी पत्नी‎ ममता देवी इस बार भी विधानसभा का चुनाव‎ लड़ेगी. वह 2020 में भी नालंदा के हरनौत से‎ लोजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी है.‎ हालांकि उस चुनाव में उसकी हार हुई थी.

ममता देवी अपनी पंचायत की मुखिया भी रह‎ चुकी है. वहीं, संजीव मुखिया का बेटा डॉ‎शिव बेउर कारावास में बंद है. सिपाही और शिक्षक ‎बहाली पेपर लीक काण्ड में EOU ने इसे और ‎इसकी गर्लफ्रेंड को उज्जैन से अरैस्ट किया ‎था. शिव पीएमसीएच से 2015-2021 बैच ‎का मेडिकल ग्रेजुएट है.

साल 2017 में डॉ‎ शुभम मंडल के साथ नीट पेपर लीक कराने के‎ मुद्दे में पहली बार अरैस्ट हुआ था. वहीं ‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎संजीव मुखिया की पत्नी ने वर्ष 2020 में ‎हरनौत विधानसभा क्षेत्र से लोजपा के टिकट ‎पर चुनाव लड़ा था, पर हार गई थी. गिरफ्तारी ‎के बाद डाक्टर शिव ने बोला था विधानसभा‎ चुनाव में हमने करीब 5 करोड़ रुपए खर्च ‎किए थे. मेरा लक्ष्य मां को लोकसभा चुनाव‎ जिताकर मंत्री बनाना है. चुनाव में काफी पैसा ‎खर्च होता है और इतना पैसा पेपर लीक‎ कराकर ही कमाया जा सकता है. इसी कारण‎ हम पिता-पुत्र पेपर लीक कराकर पैसे जमा क‎र रहे हैं.

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