अजीबोगरीब मामला! शहीद की स्मारक से नकली बंदूक उड़ा ले गए शातिर चोर
सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले से एक अजीबोगरीब मुद्दा सामने आया है, जिसने न सिर्फ़ लोगों को चौंका दिया बल्कि देशभक्ति और मानवीय संवेदनाओं को भी झकझोर कर रख दिया है। नागौद ब्लॉक के ग्राम सेमरी में बने शहीद मनमोहन सिंह परिहार के स्मारक से 4 अगस्त की रात कुछ असामाजिक तत्वों ने प्रतीकात्मक बंदूक चोरी कर ली। यह बंदूक स्मारक का मुख्य हिस्सा थी और शहीद के बलिदान की निशानी के रूप में स्थापित की गई थी। शहीद की पत्नी श्यामा सिंह परिहार ने लोकल 18 से बात करते हुए बोला कि यह घटना उनके लिए किसी सदमे से कम नहीं है। उनकी आंखों में आंसू थे और शब्दों में एक मजबूर आक्रोश। उन्होंने कहा, ‘मेरे पति का बार-बार सिर मत काटो, आपके लिए वो बंदूक है लेकिन हमारे लिए वो सिर है।’ इससे पहले भी स्मारक के साथ तोड़फोड़ हो चुकी है लेकिन तब उन्होंने स्वयं पैसे लगाकर स्मारक की मरम्मत करवाई थी लेकिन इस बार उन्होंने साफ चेतावनी दी है की यदि स्मारक में वापस बंदूक नहीं लगी और दोषियों को सजा नहीं मिली, तो वह प्राण त्याग देंगी।

मनमोहन सिंह परिहार केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में पदस्थ थे। वह 11 मार्च 2014 को छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में हुए उग्रवादी हमले में शहीद हो गए थे। उनकी याद में उनके पैतृक गांव सेमरी में यह स्मारक बनाया गया था, जहां हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और शहीद दिवस पर श्रद्धांजलि दी जाती है। इस मुद्दे में शहीद की पत्नी ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के पुलिस महानिरीक्षक नयी दिल्ली को आवेदन भेजा है और मांग की है कि दोषियों के विरुद्ध मुद्दा दर्ज कर उन्हें कड़ी सजा दी जाए। उन्होंने बोला कि यह सिर्फ़ चोरी नहीं बल्कि राष्ट्र के लिए बलिदान देने वाले सपूत का अपमान है।
लाल कपड़े से ढका स्मारक
फिलहाल श्यामा सिंह ने स्मारक को लाल कपड़े से ढक दिया है। उनका बोलना है कि वह उन पत्नियों में से नहीं, जो खाना-पीना, सोना करके जीवन बिताएं। वह अपने पति के सहारे आई थीं और उन्हीं की याद में वह जी रही हैं। अब यदि इन्साफ नहीं मिला तो उनकी लड़ाई यहीं समाप्त होगी। उल्लेखनीय है कि इस घटना ने क्षेत्रीय प्रशासन और समाज की किरदार पर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। प्रश्न यह है कि जब एक शहीद का स्मारक सुरक्षित नहीं है, तो हम किस समाज और सुरक्षा प्रबंध की बात कर रहे हैं। श्यामा सिंह की अपील है कि समाज और प्रशासन शहीद स्मारकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए ताकि भविष्य में किसी भी वीर सपूत की वीरगति का मजाक न बने।

