बिहार

नीतीश के दामन पर दाग लगाने से पीछे नहीं हट रहे हैं तेजस्वी, बिहार में धराशायी न हो जाए NDA…

बिहार में इस वर्ष के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और इसे लेकर सियासी सरगर्मी अभी से चरम पर पहुंच गई है राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव लगातार ही सीएम नीतीश कुमार की मानसिक स्थिति और उनकी खामोशी पर प्रश्न उठा रहे हैं पटना सहित बिहार के विभिन्न जिलों में हुई मर्डर की हालिया घटनाओं को लेकर तेजस्वी यादव ने राज्य में कानून प्रबंध पर बड़ा प्रहार किया है उन्होंने नीतीश को ‘अचेत मुख्यमंत्री’ करार देते हुए उनकी खामोशी पर प्रश्न उठाए हैं

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यह धावा तेजस्वी यादव का महज एक बयान नहीं, बल्कि आरजेडी की सावधानीपूर्वक तैयार की गई रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है आरजेडी को आशा है कि आनें वाले बिहार विधानसभा चुनाव में इसके जरिये एनडीए को हानि पहुंचाने में सफल हो जाएगी आइए तेजस्वी यादव के इस प्रहार के पीछे की प्लानिंग और चुनाव पर इसके असर को विस्तार से समझते हैं…

तेजस्वी के प्रहार के पीछे का प्लान

तेजस्वी यादव ने हाल के दिनों में सीएम नीतीश कुमार के विरुद्ध अपनी आक्रामकता बढ़ा दी है उन्होंने आज भी पटना में व्यवसायी विक्रम झा की गोली मारकर मर्डर की घटना का जिक्र करते हुए लिखा, ‘पटना में एक और व्यवसायी विक्रम झा की गोली मारकर हत्या! DK टैक्स स्थानांतरण उद्योग प्रदेश की अराजक स्थिति का मुख्य कारण अचेत सीएम क्यों हैं मौन? रोजाना हो रही सैकड़ों हत्याओं का गुनेहगार कौन? करप्ट भूंजा पार्टी उत्तर दे

 

तेजस्वी ने इससे पहले 9 जुलाई को एक अन्य पोस्ट में लिखा, ‘बिहार में कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है सीएम अचेत हालत में हैं गृह मंत्रालय सीएम के अधीन है क्रिमिनल बेलगाम हो रहे हैं गवर्नमेंट में बैठे लोग अपराधियों को बाहर निकाल रहे हैं और भ्रष्टाचारियों को बढ़ावा दे रहे हैं बिहार में क्राइम और करप्शन बेलगाम है प्रदेश में प्रशासनिक तानाशाही फैल चुकी है DK टैक्स फॉर्मूला के अनुसार करप्ट ऑफिसरों की ट्रान्सफ़र-पोस्टिंग होती है

इन बयानों से साफ है कि तेजस्वी का लक्ष्य नीतीश की छवि को कमजोर करना और एनडीए गवर्नमेंट की नाकामी को उजागर करना है इस रणनीति का आधार बिहार की मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति को केंद्र में रखना है पिछले कुछ महीनों में पटना, मुजफ्फरपुर, और गया जैसे शहरों में हुई हत्याओं और अपराधों ने जनता में असुरक्षा की भावना पैदा की है तेजस्वी इन घटनाओं को भुनाने की प्रयास कर रहे हैं खासकर 73 वर्षीय नीतीश कुमार की खामोशी और उनकी मानसिक स्थिति पर प्रश्न उठाकर अपने राजनीतिक सपने को साकार करने की आशा कर रहे हैं

आरजेडी की चुनावी रणनीति

यह धावासिर्फ़ नीतीश पर पर्सनल प्रहार है, बल्कि उनकी अगुआई वाली जनता दल (यूनाइटेड) और एनडीए गठबंधन को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा है बिहार विधानसभा चुनाव 2025 आरजेडी के लिए एक जरूरी मौका है, क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को महज कुछ हजार वोटों के अंतर से सत्ता से दूर रहना पड़ा था

तेजस्वी की मौजूदा रणनीति का मुख्य उद्देश्य नीतीश कुमार की लोकप्रियता को कम करना और उनके सहयोगी दलों, खासकर भाजपा और जेडीयू के बीच दरार पैदा करना है तेजस्वी ने नीतीश को ‘अचेत’ और ‘मौन’ बताकर उनकी मानसिक और शारीरिक स्थिति पर प्रश्न उठाए हैं यह रणनीति एनडीए के भीतर असंतोष को हवा देने की प्रयास है यदि नीतीश की छवि कमजोर हुई, तो भाजपा अपने लिए एक नए चेहरे की तलाश कर सकती है, जो गठबंधन को कमजोर करे

वोटबैंक पर मजबूत पकड़

आरजेडी ने हमेशा यादव और मुसलमान वोटों पर अपनी पकड़ मजबूत रखी है तेजस्वी नीतीश पर धावा करके इस वोट बैंक को एकजुट करने की प्रयास कर रहे हैं वह यह संदेश दे रहे हैं कि नीतीश की गवर्नमेंट ने इन समुदायों की सुरक्षा और हितों की अनदेखी की है, जिससे उनकी पार्टी को लाभ हो सकता है

नीतीश पर निशाना, टारगेट पर एनडीए

तेजस्वी का यह प्रहार एनडीए के लिए कई तरह से चुनौती बन सकता है सबसे पहले, नीतीश की छवि को हानि पहुंचने से जेडीयू की स्थिति कमजोर हो सकती है जेडीयू और भाजपा के बीच सीट बंटवारे और नीतीश की नेतृत्व शैली को लेकर यदि मतभेद बढ़े, तो गठबंधन में दरार आ सकती है, जो एनडीए की सीटों पर असर डालेगादूसरा, बिहार में कानून-व्यवस्था एक संवेदनशील मामला है यदि जनता को लगता है कि नीतीश गवर्नमेंट अपराधियों पर काबू नहीं रख पा रही, तो यह वोटरों के मूड को बदल सकता है 2020 के चुनाव में जेडीयू को 43 सीटें और भाजपा को 74 सीटें मिली थीं तेजस्वी की रणनीति सफल रही तो जेडीयू की सीटें घट सकती हैं, और भाजपा को भी हानि हो सकता है

तीसरा, तेजस्वी का युवा और आक्रामक चेहरा बिहार की युवा जनसंख्या को आकर्षित कर रहा है बेरोजगारी और क्राइम जैसे मुद्दों पर उनकी बातें गूंज रही हैं, जो एनडीए के लिए खतरा बन सकता है यदि आरजेडी महागठबंधन के साथ मिलकर एक मजबूत विपक्षी मोर्चा बना लेता है, तो 2025 के चुनाव में सत्ता बदलाव की आसार बढ़ सकती है

नीतीश कुमार ने अभी तक तेजस्वी के आरोपों का सीधा उत्तर नहीं दिया है, जो उनकी खामोशी को और बढ़ा रहा है उनके सहयोगी दलों ने इसे आरजेडी का सियासी स्टंट करार दिया है, लेकिन नीतीश की निष्क्रियता जनता और अपने सहयोगियों में भी प्रश्न पैदा कर रही है यदि नीतीश जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाते और तेजस्वी यादव के प्रहार पर उत्तर नहीं देते तो बिहार चुनाव के नतीजों पर असर अवश्यंभावी प्रतीत हो रहे हैं

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