तेजस्वी यादव को सीएम फेस घोषित नहीं किया जाएगा : कांग्रेस
पटना: बिहार चुनाव से पहले महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर घमासान मचा हुआ है। खासकर कांग्रेस पार्टी और आरजेडी के बीच विवाद तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने साफ कह दिया है कि फिलहाल तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री फेस घोषित नहीं किया जाएगा और इसका निर्णय जनता करेगी। बताया जा रहा है कि इसी वजह से आरजेडी नाराज़ है। राहुल गांधी के साथ साझा मंच से निकलने के बाद तेजस्वी अब अपनी अलग चुनावी यात्रा प्रारम्भ कर चुके हैं। ऐसे में सीट शेयरिंग का पूरा समीकरण और उलझता जा रहा है। अब प्रश्न यह है कि कांग्रेस पार्टी की असल मांग क्या है और बाकी घटक दल कितनी सीटों पर दावा ठोक रहे हैं।

कांग्रेस का बोलना है कि महागठबंधन का मकसद एनडीए को हराना है और इसके लिए समझौता करना पड़े तो किया जाएगा। लेकिन अंदरखाने सीट बंटवारे की यह खींचतान और मुख्यमंत्री चेहरे पर असहमति महागठबंधन की मुश्किलें बढ़ा रही है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि आखिर किसे कितनी सीटें मिलती हैं और महागठबंधन का चेहरा कौन होता है।
कांग्रेस की मांग
- कांग्रेस का बोलना है कि सीट बंटवारे में ‘अच्छी’ और ‘खराब’ सीटों का संतुलन होना चाहिए।
- अच्छी सीटें वे हैं जहां कांग्रेस पार्टी 2020 के चुनाव में जीती थी या फिर बहुत कम अंतर से हारी थी।
- कांग्रेस चाहती है कि उसे 2020 की अपनी 19 जीत वाली सीटें मिलें।
- साथ ही वे सीटें भी दी जाएं जहां वह करीब 5 हजार वोट से हारी थी।
- कुल मिलाकर कांग्रेस पार्टी इस बार भी करीब 70 सीटों की मांग कर रही है।
आरजेडी की स्थिति
- 2020 में आरजेडी ने 144 सीटों पर चुनाव लड़ा था
- आरजेडी को 75 पर जीत मिली थी
- 17 सीटों पर वह 5 हजार वोट से भी कम अंतर से हारी थी।
- आरजेडी के पास 90 से अधिक ‘अच्छी सीटों’ का दावा है।
- ऐसे में पार्टी मानती है कि कांग्रेस पार्टी को इतनी अधिक सीटें नहीं मिलनी चाहिए।
- आरजेडी का तर्क है कि पिछली बार उसने कई सीटें अपने सहयोगियों को दीं और उस हानि की भरपाई अब तक नहीं हुई है।
बाकी सहयोगी दलों का हाल
महागठबंधन में इस बार केवल आरजेडी और कांग्रेस पार्टी ही नहीं, बल्कि लेफ्ट पार्टियां (CPI, CPM, CPI-ML), झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), पशुपति पारस की पार्टी RLJP और मुकेश सहनी की वीआईपी भी शामिल हैं। हर कोई अधिक सीटें चाहता है, जिससे समीकरण और जटिल हो गया है। CPI-ML ने 2020 में 19 सीटों पर लड़ा था और 12 जीती थी। बाकी लेफ्ट दलों का प्रदर्शन भी बेहतर रहा, इसलिए वे भी अपना दावा मजबूत कर रहे हैं।
असली विवाद क्यों?
तेजस्वी यादव लंबे समय से चाहते हैं कि उन्हें महागठबंधन का मुख्यमंत्री चेहरा घोषित किया जाए। राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ में भी वे उनके साथ मंच साझा करते रहे। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने अब तक मुख्यमंत्री चेहरा तय नहीं किया। विपरीत पार्टी का बोलना है कि जनता ही यह निर्णय करेगी। यही वजह है कि तेजस्वी नाराज़ बताए जा रहे हैं और उन्होंने 243 सीटों पर स्वयं के नाम पर वोट मांगने वाला बयान देकर दबाव बना दिया।

