बिहार

इन मूल सुविधाओं के बिना जीवन व्यतीत करने को मजबूर है बेतिया की जनता

कुछ ही महीनों बाद बिहार विधानसभा चुनाव होने वाला है ऐसे में सभी सियासी पार्टियों की तरह ही इस बार जनता भी पूरी तैयारी में है किसी को नए चेहरे की तलाश है, तो कोई आशा ही छोड़ बैठा है जनता के इस महापर्व को लेकर लोकल 18 की टीम ने जनता से ही चर्चा की बिहार के 38 जिलों में से एक जिसे क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से राज्य का सबसे बड़ा जिला पश्चिम चंपारण को माना जाता है‘ इस जिले में राज्य की 9 विधानसभा सीटे हैं

Images 19 7

WhatsApp Group Join Now

ऐसे में पश्चिम चंपारण की एक विधानसभा ‘बेतिया भी है यहां की जनता का मिजाज़ जानने के लिए लोकल 18 की टीम इस विधानसभा क्षेत्र में पहुंची यहां क्षेत्रीय विकास, पिछली बार चुने गए विधायक के कार्यों से संतुष्टि, इस बार के चुनाव के लिए तय किए गए मामले और चुनाव को लेकर बनाई गई नीतियों पर जनता का क्या मिजाज है इन सभी पहलुओं पर लोकल 18 की टीम ने बेतिया की जनता से वार्ता की आइए जानते हैं जनता ने क्या कहा…

मूलभूत विकास भी नहीं हुआ

बेतिया विधान सभा क्षेत्र की जनता ने कहा कि बिहार की राजनीति में पश्चिम चंपारण जिले का एक अहम किरदार है जिले के मुख्यालय बेतिया से ही पिछली बार राज्य के लिए उप सीएम को चुना गया था क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से भी यह सूबे के सबसे बड़े जिले पश्चिम चंपारण का मुख्यालय है दुख इस बात का है कि इन सब उपलब्धियों के बावजूद भी आजतक क्षेत्र का आधारित विकास भी नहीं हो पाया है शहर के मीना बाजार स्थित छोटा रमना निवासी महेश कुमार बताते हैं कि रोजगार और आधुनिक सुविधाओं को छोड़िए, बेतिया की जनता अभी सड़क, नाला और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए ही तरस रही है

नए चेहरे की तलाश में है बेतिया की जनता

कुछ ऐसा ही बयान क्षेत्रीय निवासी विवेक कुमार का भी है विवेक एक व्यवसायी हैं, जो शहर के मीना बाजार में ही अपनी दुकान चलाते हैं उनका बोलना है कि वह करीब तीन दशकों से मतदान करते आ रहे हैं उनका पसंदीदा आदमी के विधायक के रूप में चुन कर आने के बावजूद भी क्षेत्र के विकास को वह धार नहीं मिल पाई है, जिसकी कल्पना उन्होंने की थी ऐसे में इस बार उन्होंने अपनी नीति बदल ली है और कुछ नए की आशा में हैं

ऐसे में बात केवल विवेक की ही नहीं है, बेतिया की अधिकतर जनता ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए एक नयी नीति तैयार कर ली है दशकों-दशकों तक मत देने के बावजूद भी बेतिया की जनता को वो सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं, जिसके वो असली हकदार हैं ऐसे में इस बार क्षेत्र की जनता ने अपने मूलभूत विकास के लिए एक नए चेहरे को सत्ता में लाने की मंशा बनाई है

इन मुद्दों पर है इस बार की तैयारी

बेतिया के मीना बाजार निवासी रामबाबू प्रसाद साहित अन्य लोगों का भी बोलना है कि इस बार वो किसी ऐसे कैंडिडेट को अपना मत देना चाहते हैं, जो क्षेत्र की मूलभूत सुविधाओं सहित उसका सौंदर्यीकरण, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर और केंद्र या राज्य से समन्वय बैठाकर बेतिया वासियों के मूलभूत विकास की सुनवाई कर सके

बेतिया विधानसभा क्षेत्र की जानकारी

बता दें कि बेतिया विधानसभा सीट की बिहार विधानसभा में सीट क्रम संख्या 08 है यह पश्चिम चंपारण लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का एक हिस्सा भी है 2008 में परिसीमन आयोग की सिफारिश के बाद इस विधानसभा सीट में परिवर्तन किया गया और इसके अनुसार बेतिया सामुदायिक विकास ब्लॉक, मोहद्दीपुर, मझौलिया, परसा, बहुरवास गुदारास बखरिया, राजभर और सेनुवरिया समेत कई क्षेत्रों को शामिल किया गया बेतिया विधानसभा सीट पहले बेतिया लोकसभा का हिस्सा हुआ करता था, लेकिन साल 2008 के बाद इसमें परिवर्तन किया गया और इसे पश्चिम चंपारण लोकसभा क्षेत्र में शामिल कर दिया गया

कांग्रेस के बाद भाजपा का दबदबा

बेतिया वासियों की मानें तो, बेतिया की सीट पर कांग्रेस पार्टी का दबदबा रहा है, लेकिन वर्ष 2000 के चुनाव में इस सीट पर भाजपा ने अपनी जीत दर्ज की और इसपर अपना दबदब भी कायम किया हालांकि, साल 2015 में कांग्रेस पार्टी ने फिर से वापसी करते हुए इस सीट पर जीत हासिल की, लेकिन साल 2020 के विधानसभा चुनाव में भाजपा पूरी तैयारी के साथ ग्राउंड पर उतरी और अपने कैंडिडेट रेणु देवी की जीत के साथ एक बार फिर से दबदबा बनाने में सफल रही

बिहार की पहली स्त्री उप सीएम

इस चुनाव में रेणु देवी के सामने कांग्रेस पार्टी विधायक मदन मोहन तिवारी खड़े थे जनता ने भाजपा उम्मीदवार रेणु देवी को मौका दिया और करीब 18079 वोटों की बढ़त से उन्होंने सीट पर जीत दर्ज की रेणु को कुल 84496 वोट हासिल हुए, जबकि मदन मोहन तिवारी के खाते में केवल 66417 वोट आए गौर करने वाली बात यह है कि साल 2010 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा की तरफ से रेणु देवी ने जीत हासिल की थी जनता ने उन्हें एकतरफा चुनाव बना दिया था बहरहाल वर्तमान में रेणु देवी ही बेतिया की विधायिका हैं, जो साल 2020 से 2025 के बीच में करीब एक से डेढ़ सालों के लिए NDA की गवर्नमेंट में बिहार की पहली स्त्री उप सीएम के रूप में चुनी गई थीं

Back to top button