छलांग लगाकर चेहरे पर हमला करता है ये सांप
बिहार के पश्चिम चंपारण में स्थित मशहूर वाल्मिकी टाइगर रिजर्व (VTR) के सदाबहार जंगल हैं. यहां केवल 45 प्रकार के सांप ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे घातक 5 सांप की प्रजातियों में से 2 भी देखे गए हैं. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से एक नयी प्रजाति की सांप

वैज्ञानिकों ने इसे अहेतुल्ला लोंगिरोस्ट्रिस’ नाम दिया गया है. यह प्रजाति सिर्फ़ बिहार और मेघालय में पाई जाती है. हालांकि, इसमें अन्य सांपों की तरह जहर नहीं पाए गए हैं. इसी कारण इसके काटने से किसी आदमी की मृत्यु नहीं होती है. एक्सपर्ट इसे बिहार के सुग्गा सांप की फैमिली का मान रहे हैं.
अमेरिका में हुई सांप के DNA की जांच
बिहार और मेघालय में एक साथ बड़ी नाक वाले सांप को देखा गया था. मेघालय में जिंदा सांप मिला था, लेकिन बिहार में 16 दिसंबर 2021 को यह दुर्लभ प्रजाति का सांप सौरभ वर्मा और सोहम पट्टेकर नामक वैज्ञानिकों को मिला था. दोनों वैज्ञानिक 2021 में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में सर्वेक्षण के लिए आए थे. सर्वे के दौरान उन्हें लंबी नाक वाला सांप मृत मिला था. सांप की DNA जांच में कई जानकारियां सामने आई हैं.
यह अपने आप में अलग और दुनिया का अनोखा सांप था. नेचर एनवायरनमेंट एंड वाइल्ड लाइफ सोसायटी के अभिषेक बताते हैं, पूरी दुनिया के लिए ये सांप की नयी प्रजाति है. 2021 में जब इसकी रिपोर्ट भेजी गई तो पता चला कि ऐसा ही दुर्लभ सांप मेघालय में भी मिला है. वह जिंदा पाया गया था, जबकि बिहार में सांप मृत मिला था. दोनों की DNA जांच के लिए सैंपल अमेरिका भेजा गया. जांच रिपोर्ट आई तो आगे की रिसर्च की तैयारी प्रारम्भ हो गई है.
बड़ी नाक वाले सांप मेघालय में जिंदा मिला था.
तक्षक की तरह नेचर, सुग्गा सांप की फैमिली
काफी रिसर्च और अमेरिका में हुए DNA टेस्ट से पुष्टि हुई कि ये बेल सांप की एक नयी प्रजाति है. इस खोज में सौरभ वर्मा और सोहम पट्टेकर के साथ जीशान मिर्जा, ब्रायन स्टुअर्ट, जयादित्य पुरकायस्थ, प्रत्यूष महापात्रा और हर्षिल पटेल भी शामिल थे. शोध का प्रकाशन जर्नल ऑफ एशिया पैसिफिक बायोडायवर्सिटी में किया गया है.
नेचर एनवायरनमेंट एंड वाइल्ड लाइफ सोसायटी के अभिषेक बताते हैं, DNA जांच में पता चला कि ये बेल सांप की एक नयी प्रजाति है. इस प्रजाति का वैज्ञानिक नाम “अहेतुल्ला लॉन्गिरोस्ट्रिस” है. इस सांप की फैमिली को बिहार में सुग्गा और बंगाल में डाउलोगा सांप बोलते हैं.
अभिषेक बताते हैं, बिहार और उत्तर प्रदेश के तराई इलाकों में सुग्गा सांप पाए जाते हैं. यहां का एनवायरनमेंट इनके लिए काफी अच्छा है. ऐसी आशा है कि नेपाल में भी इनकी संख्या अधिक होगी.
लंबी नाक वाली सांप पर रिसर्च
अभिषेक बताते हैं, ‘अब इस पर पर रिसर्च किया जाएगा. इस पर PhD तक की जाएगी, क्योंकि यह दुनिया का अनोखा सांप है. पहले तो इसकी DNA जांच रिपोर्ट का प्रतीक्षा था. रिपोर्ट आने के बाद अब इसकी जांच को लेकर तैयारी की जा रही है. बिहार में सुग्गा सांप मिलते हैं, इसलिए ऐसा लग रहा है कि ये इसी फैमिली का है.
अब इस फैमिली के सांपों पर भी काम किया जाएगा, जिससे इससे संबंधित पूरी जानकारी मिल सके. हालांकि, इसका मुंह सुग्गा सांप से पूरी तरह से अलग है, क्योंकि इसकी नाक काफी लंबी है. यही कारण है कि अब ये रिसर्च का विषय हो गया है.
आंख नांक और कान पर वार, काटने से नहीं होगी मौत
एक्सपर्ट मानते हैं कि इस सांप का नेचर तक्षक की तरह है. यह उड़ता तो नहीं है, लेकिन पेड़ों पर रहने के कारण ये सरलता से छलांग लगा सकता है. दूर से देखने वालों को लगता है कि उड़ रहा है. नेचर एनवायरनमेंट एंड वाइल्ड लाइफ सोसायटी के अभिषेक बताते हैं, दुनिया में पहली बार सांप के इस प्रजाति के मिलने का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है.
मामला बिहार से जुड़ा है, इसलिए अब बिहार से इस पर बड़ी रिसर्च भी होगी. अभिषेक ने कहा कि ‘रिपोर्ट में यह साफ हो गया है कि इसमें माइल्ड वेनम होता है. जहर की मात्रा कम होने से मृत्यु नहीं होती है. चौड़े स्थान पर ये वार नहीं करते हैं, ये उंगली, नाक आंख, कान पर अटैक करते हैं, लेकिन राहत की बात ये है कि इनके काटने से भी आदमी की मृत्यु नहीं होती है. पेड़ों पर ये ऊपर से नीचे तेजी से ग्लाइड कर सकते हैं, ऐसे ही वार भी करते हैं.‘
DNA जांच के बाद रिसर्च हुआ आसान
एक्सपर्ट बताते हैं, अमेरिका में हुई DNA जांच की रिपोर्ट आने के बाद अब रिसर्च थोड़ी आसान हो गई है. क्योंकि सबसे कठिन काम सांपों की प्रजाति की पहचान करना होता है. DNA में एक रास्ता मिल गया है, अब आगे की जांच से हम पूरा डिटेल निकाल सकते हैं. कोई भी नयी प्रजाति डिक्लेयर करने के लिए पहले इसके बारे में पूरी जांच पड़ताल करनी पड़ती है.
ऐसी कोई भी रिपोर्ट को लेकर पहले वेरिफाई भी करना होता है. हर स्टेज में छानबीन करने के बाद आगे की जांच की तरफ हम बढ़ रहे हैं. अब तक की जो भी जांच हुई है. हम इस आशा के साथ जांच कर रहे हैं कि इस प्रजाति के सांप वाल्मीकि नगर के साथ तराई में और स्थान मिल सकते हैं. इस क्षेत्र का इको सिस्टम काफी अच्छा है, इस कारण से इस प्रजाति के सांप यहां मिल रहे हैं. यह इसे एरिया के लिए गुड साइन है.
स्नैक एक्सपर्ट की टीम आ सकती है बिहार
अभिषेक बताते हैं, जब भी कोई नयी प्रजाति के सांप मिलते हैं तो इसकी जांच के लिए स्नैक एक्सपर्ट की टीम का आना जाना होता है. इस पर रिसर्च करने वाले भी आते हैं. स्नैक एक्सपर्ट की जाे कम्युनिटी है, वह पूरे हिंदुस्तान में घूमते रहते हैं.
सांपों का फोटो लेते और उनसे जुड़ी पूरी जानकारी इकट्ठा करते हैं. इससे हमारा डेटा बेस भी तैयार होता है. इसके बाद रिपोर्ट तैयार की जाती है. सांप की इस अनोखी प्रजाति पर अब रिसर्च होगा. इस सांप के बारे में अभी पूरी दुनिया कुछ नहीं जानती है.
हर किसी का सवाल- क्या सांप उड़ते हैं
सांपों के उड़ने को लेकर हर कोई प्रश्न करता है. बिहार में कई ऐसे सांप हैं, जिसके उड़ने को लेकर दावे किए जाते हैं. इसे लेकर जब हम एक्सपर्ट से बात किए तो कहा गया कि कुछ सांप ऐसे हैं जो उड़ने की कला जानते हैं, लेकिन ये सांप पक्षियों की तरह नहीं उड़ते हैं. इन्हें क्राइसोपेलिया (Chrysopelea) कहते हैं. ये सांप पेड़ पर ऊपर चढ़ जाते हैं और पेड़ से नीचे की ओर छलांग लगाते हैं, नीचे आते समय ये हवा में लहराने लगते हैं.
ये सांप अपने शरीर को फैलाकर चौड़ा कर लेते हैं, जिससे नीचे आते समय ये उड़ते हुए दिखते हैं. ये सांप ऊपर की ओर नहीं उड़ सकते हैं. आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, बिहार राज्यों में इस तरह के सांप देखे गए हैं. बिहार में ये सांप सुग्गा के नाम से भी जाने जाते हैं.
बिहार में ऐसे कई रोचक सांप की प्रजाति
सांप बीन की धुन पर नहीं, बीन और सपेरे के मूवमेंट को फॉलो करता है. जैसे-जैसे सपेरा बीन लहराता है, सांप भी उसी दिशा में, उसी तरह हिलता है. हमें लगता है कि सांप नाच रहा है, लेकिन ये बात ठीक नहीं. सांप स्थिर चीजों को देखकर रिएक्ट नहीं करता है, लेकिन जैसे ही उसके सामने किसी चीज का एक्शन होता है, सांप तुरंत मूवमेंट करने लगता है. बिहार में कुछ सांप ऐसे होते हैं, जिनकी पूंछ कुछ मोटी होती है और वे आगे-पीछे से एक-जैसे दिखते हैं. लोग इन्हें ही दो मुंह के सांप मान लेते हैं.

