इस बार बिहार में लैपटॉप भी दिखाएगा अपनी धमक, जानिए इस चुनावी राजनीति का पूरा खेल…
क्या बिहार चुनाव 2025 में आरजेडी लैपटॉप वाली पार्टी बनने जा रही है? क्या तेजस्वी यादव बिहार को लालू, लाठी और लालटेन युग से लैपटॉप युग में लेकर जाएंगे? बिहार में आरजेडी के मुख्यमंत्री फेस तेजस्वी यादव ने राहुल गांधी के साथ ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के दौरान एक एसी बात कही, जिसके अर्थ अब तलाशे जा रहे हैं। इस बयान को भाजपा जहां मामला बना सकती है, वहीं आरजेडी के सपोर्टर तेजस्वी की नयी सोच बताएंगे। दरअसल, तेजस्वी यादव ने बीबीसी को दिए एक साक्षात्कार में कहा, ‘राष्ट्रीय जनता दल लाठी के साथ-साथ लैपटॉप की भी पार्टी है। कंप्यूटर की भी पार्टी है। हमलोग सब मिलकर बिहार को आगे बढाना चाहते हैं।’ जब तेजस्वी से ‘लाठी’ वाले उत्तर पर प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने इसे नए सिरे से परिभाषित करते हुए कहा, पुलिस बंदूक लेकर घूमती है तो क्या गुंइई करती है?’

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की उलटी गिनती प्रारम्भ हो चुकी है। राजनेताओं के एक बयान का विपक्षी पार्टियां तील का ताड़ बना देती है। तेजस्वी यादव इस बार नए दांव और रणनीतियों के साथ मैदान में उतर रहे हैं। लालू प्रसाद यादव की पारंपरिक ‘लाठी और लालटेन’ वाली छवि को तेजस्वी आधुनिकता के साथ जोड़कर ‘लैपटॉप’ का प्रतीक अपनाने की प्रयास कर रहे हैं। यह नया दृष्टिकोण न सिर्फ़ युवा वोटरों को लुभाने का कोशिश है, बल्कि 2020 के चुनावों की तुलना में एक बदली हुई रणनीति को भी दर्शाता है।
2020 बनाम 2025
A 2 Z फॉर्मूला से साधेंगे तेजस्वी
लेकिन 2025 के लिए आरजेडी की रणनीति में कई परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। पहला, तेजस्वी ने ‘ए टू जेड’ रणनीति अपनाई है, जिसका लक्ष्य यादव और मुसलमान वोटरों के साथ-साथ सवर्ण, दलित और पसमांदा मुसलमान समुदायों को भी जोड़ना है। इस रणनीति के अनुसार राबड़ी देवी, जगदानंद सिंह, महबूब अली कैसर और उदय नारायण चौधरी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है, जो विभिन्न जातियों और समुदायों को साधने का कोशिश है। यह रणनीति 50-60 सीटों पर असर डाल सकती है।
दूसरा, तेजस्वी ने 65% आरक्षण, जॉब और डोमिसाइल जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाया है, जिसे लालू यादव की रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है। यह मामला युवाओं और पिछड़े वर्गों को लुभाने के लिए बनाया गया है, क्योंकि बिहार में युवा वोटर निर्णायक किरदार निभा सकते हैं। इसके अलावा, तेजस्वी ने बेगूसराय जैसे क्षेत्रों में भूमिहार वोटरों को आकर्षित करने के लिए बोगो सिंह जैसे नेताओं को पार्टी में शामिल किया, जो पहले लालू के ‘भूरा बाल साफ करो’ नारे के कारण आरजेडी से दूरी बनाए हुए थे।
लैपटॉप का दांव और युवाओं पर फोकस
कुलमिलाकर 2025 का बिहार चुनाव तेजस्वी और आरजेडी के लिए एक निर्णायक मोड़ है। 2020 की तुलना में, इस बार आरजेडी ने अपनी रणनीति को और व्यापक किया है, जिसमें जातीय समीकरणों के साथ-साथ युवाओं और आधुनिकता पर बल है। ‘लाठी, लालटेन, और लैपटॉप का मिश्रण तेजस्वी की छवि को पारंपरिक और प्रगतिशील दोनों बनाता है। हालांकि, तेज प्रताप की बगावत और गठबंधन की आंतरिक कलह आरजेडी के लिए जोखिम बनी हुई है। यदि तेजस्वी इन चुनौतियों से पार पा सके, तो 2025 में आरजेडी न सिर्फ़ सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है, बल्कि सत्ता की दहलीज तक भी पहुंच सकती है।

