बिहार

वक्फ संशोधन कानून ने दिया नई जंग को जन्म, लालू की RJD ने खोला मोर्चा

वक्फ संशोधन कानून को लेकर सियासी और सामाजिक माहौल गरमाता जा रहा है. बिहार में भी इस पर घमासान जारी है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) आज उच्चतम न्यायालय में नए वक्फ कानून को चुनौती देने के लिए याचिका दाखिल करेगी. पार्टी की ओर से यह याचिका राज्यसभा सांसद मनोज झा और पार्टी नेता फैयाज अहमद के माध्यम से दाखिल की जाएगी. यह कानून हाल ही में संसद से पास होकर राष्ट्रपति की स्वीकृति के बाद लागू हो गया है. आरजेडी ने इसे गैरकानूनी करार देते हुए इसे राष्ट्र के सामाजिक सौहार्द के लिए घातक कहा है. खास बात तो यह है कि इस नए वक्फ संशोधन कानून को लेकर अब तक 6 याचिकाएं उच्चतम न्यायालय में दाखिल हो चुकी हैं. अब RJD की याचिका सातवीं होगी.

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कानून संविधान और सामाजिक ताने-बाने के खिलाफ
आरजेडी का बोलना है कि यह कानून संविधान की मूल भावना का उल्लंघन करता है और राष्ट्र की गंगा-जमुनी तहजीब को हानि पहुंचाएगा. आरजेडी सांसद मनोज झा ने रविवार को मीडिया से वार्ता में बोला कि यह कानून संविधान और सामाजिक ताने-बाने के विरुद्ध है. उन्होंने इसे “सौहार्द समाप्त करने की साजिश” करार दिया और भरोसा जताया कि उच्चतम न्यायालय जल्द इस पर सुनवाई करेगा. वक्फ संशोधन कानून को लेकर केवल सियासी दल ही नहीं, बल्कि धार्मिक संगठन भी विरोध में उतर आए हैं.

11 अप्रैल से देशभर में विरोध प्रदर्शन
ऑल इण्डिया मुसलमान पर्सनल लॉ बोर्ड ने घोषणा किया है कि वे 11 अप्रैल से देशभर में विरोध प्रदर्शन प्रारम्भ करेंगे. इसके अलावा, कई अन्य धार्मिक और सामाजिक संगठन भी आने वाले दिनों में उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल कर सकते हैं. यह कानून 2 अप्रैल को लोकसभा और 3 अप्रैल को राज्यसभा में लंबी बहस के बाद पास हुआ था. दोनों सदनों में इस पर करीब 12-12 घंटे की चर्चा हुई. इसके बाद इसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्वीकृति दी, जिससे इसे कानून का दर्जा प्राप्त हो गया.

सड़क से लेकर न्यायालय तक संघर्ष
कानून पास हो जाने के बाद अब इसे लागू करने के लिए केंद्र गवर्नमेंट एक नोटिफिकेशन जारी करेगी, जिसमें यह कहा जाएगा कि यह कानून कब से कारगर होगा. उधर, आरजेडी समेत अन्य विरोधी दलों और संगठनों की नजर अब उच्चतम न्यायालय की सुनवाई पर टिकी है. आरजेडी की याचिका और पर्सनल लॉ बोर्ड की घोषणा से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में इसे लेकर सड़क से लेकर न्यायालय तक संघर्ष देखने को मिलेगा. अब सबकी निगाहें उच्चतम न्यायालय की सुनवाई और केंद्र गवर्नमेंट के नोटिफिकेशन पर टिकी हैं.

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