संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पासवान ने कहा…
पटना। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय का विरोध किया जिसमें राज्यों को 15 फीसदी आरक्षण के एक हिस्से के लिए अनुसूचित जातियों के भीतर उप-समूह बनाने की अनुमति दी गई है। उन्होंने घोषणा की कि उनकी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) इसके विरुद्ध अपील करेगी।

यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पासवान ने बोला कि वह जाति जनगणना के पक्ष में हैं, जिसके लिए विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी जोरदार मांग कर रहे हैं, हालांकि उनका यह भी मानना है कि इसके निष्कर्षों को ‘सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए’। उन्होंने कहा, ‘हमारी पार्टी सुप्रीम कोर्ट से निवेदन करेगी कि वह अपने हाल के निर्णय की समीक्षा करे जिसमें अनुसूचित जाति कोटे के अनुसार 15 फीसदी उप-समूहों को अनुमति दी गई है।’
उन्होंने कहा, ‘एससी आरक्षण में क्रीमी लेयर को अनुमति नहीं दी जा सकती। एससी कोटे में उप-समूहों को अनुमति देने से सामाजिक रूप से हाशिए पर पड़े वर्ग के उत्थान का उद्देश्य पूरा नहीं होगा जो छुआछूत की प्रथा का शिकार रहा है।’
पीएम नरेंद्र मोदी के हनुमान कहे जाने वाले पासवान ने बिना विस्तार से बताए कहा, ‘मुझे लगता है कि हमें जाति जनगणना करानी चाहिए, लेकिन इसके निष्कर्षों को सार्वजनिक नहीं किया जाना चाहिए। एकत्रित आंकड़ों का इस्तेमाल गवर्नमेंट को नीतियां बनाने में करना चाहिए।’
गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने बहुमत से दिए एक निर्णय में बृहस्पतिवार को बोला कि राज्यों के पास अधिक वंचित जातियों के उत्थान के लिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति में उप-वर्गीकरण करने की शक्तियां हैं। हिंदुस्तान के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय पीठ ने 6:1 के बहुमत से प्रबंध दी कि राज्यों को अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) में उप-वर्गीकरण करने की अनुमति दी जा सकती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन समूहों के भीतर और अधिक पिछड़ी जातियों को आरक्षण दिया जाए।

